ज्ञान और सूचना - knowledge and information
ज्ञान और सूचना - knowledge and information
ज्ञान - ज्ञान की स्थिति में अन्तरनिहित है कि एक ओर ज्ञाता व एक ओर ज्ञेय पदार्थ होता है। जब ज्ञाता ज्ञेय पदार्थ के साथ इन्द्रियो के माध्यम से सम्पर्क में आता है तब उसे ज्ञेय पदार्थ की चेतना होती है, जिसे साधारणत: ज्ञान की संज्ञा दी जाती है। अत: ज्ञान का सदैव एक विषय होता है व किसी चेतना युक्त ज्ञाता को उस विषय का ज्ञान होता है। हमारे साधारण ज्ञान में ज्ञाता तथा ज्ञेय का यह द्वैत अत्यन्त महत्वपूर्ण है। भारतीय एवं पाश्चात्य दर्शन के कुछ महत्वपूर्ण निकायों तथा दार्शनिको के मतानुसार ज्ञान की प्रक्रिया के प्रारम्भ में यह द्वैत भले ही रहता हो, समुचित ज्ञान प्राप्ति के बाद यह द्वैत बिल्कुल समाप्त हो जाता है। जाता तथा ज्ञेय एक दूसरे से अभिन्न हो जाते है। अर्थात ज्ञाता ज्ञेय के साथ तादात्य स्थापित कर के ही उसका ज्ञान प्राप्त करता है। पुनः असाधारण व अलौकिक ज्ञान का वह प्रकार है जो हमारे दैनिक जीवन के ज्ञान से भिन्न है और ऐसे ज्ञान को वास्तविक सत्य की संज्ञा दी जाती है।
अनेको दार्शनिकों ने ज्ञान को मानसिक स्थिति के रूप में प्रतिपादित एवं प्रदर्शित किया है, जैसे कि किसी विषय का हमें ज्ञान हुआ इसका तात्पर्य यह है कि वह वस्तु वैसी ही है जैसा कि हम उसे जानते है तथा उसकी सत्ता ज्ञाता की सत्ता पर निर्भर करती है। परन्तु व्यवहारवादी ज्ञान की संकल्पना के अनुसार ज्ञान मानसिक स्थिति होकर कुछ खास व्यवहार करने की योग्यदता है। जैसे यदि हमें लैटिन भाषा का ज्ञान हुआ, का आशय यह है कि हम लैटिन भाषा लिख सकते है, पढ़ सकते है, उसका अर्थ समझ सकते है तथा दूसरों को अर्थ समझा सकते हैं। इस तरह ज्ञान का मानसिक व व्यवहारवादी दृष्टिकोण रखा गया।
ज्ञान का एक अर्थ परिचय से भी है। जैसे आप किसी अमुक व्यक्ति को जानते हैं पर आप उस अमुक व्यक्ति को पूर्णतः जानते है या उसके हर पक्ष का ज्ञान रखते है, ऐसा नहीं कहा जा सकता है। पुनः जानने का एक अन्य अर्थ है किसी कार्य मे क्षमता हासिल करना । जैसे मैं तैरना जानता हूँ आदि। दूसरे शब्दों में कुछ जानने का अर्थ किसी विशेष कार्य को सम्पन्न करना व कराना होता है।
साथ ही ज्ञान की एक अन्य संकल्पना हैं जिसके अनुसार किसी वस्तु का ज्ञान होने से आशय यह होता है कि उस वस्तु के संबंध में कुछ प्रतिज्ञप्तियाँ है जो सत्य हैं और जिनकी जानकारी हमें है।
सूचना
सूचना पद का अर्थ किसी भी विषय वस्तु तथा पदार्थ के अन्तर्वस्तु के सम्बन्ध में सूचित करना, कहना, जानकारी का आदान-प्रदान करना आदि से होता है। सूचना का अंग्रेजी रूपान्त्रण इनफार्मेशन लैटिन शब्द फॉर्मेटिया अथवा फोरम से बना है। ये दोनों ही शब्द वस्तु के आकार स्वरूप के अभिप्राय को व्यक्त करते हैं। हाफमैन के अनुसार- सूचना वक्तव्यो, तथ्यो अथवा आकृतियों का संकलन होती है। एन बैल्किन के अनुसार सूचना उसे कहते है जिसमे आकार को परिवर्तित करने की क्षमता होती है। जे बीकर के अनुसार किसी विषय से संबंधित तथ्यो को सूचना कहते है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि सूचना का मतलब होता है किसी भी विषय-वस्तुस के बारे में जानकारियों का प्रेषण व ग्रहण करना जो दैशीय व कालिक सन्दर्भों में सत्य या असत्य हो सकती है।
वार्तालाप में शामिल हों