कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धांत , द हाइन्ज डिलेम्मा - Kohlberg's Theory of Moral Development, The Heinz Dilemma
कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धांत , द हाइन्ज डिलेम्मा - Kohlberg's Theory of Moral Development, The Heinz Dilemma
लॉरेंस कोहलबर्ग, हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। वह नैतिक निर्णय के विकास के क्षेत्र में अपने द्वारा किए 1970 के दशक के काम के लिए प्रसिद्ध हुए। उन्होंने एक विकासात्मक मनोवैज्ञानिक के रूप में शुरुआत की और फिर नैतिक शिक्षा के क्षेत्र की तरफ अग्रसर हुए। उन्हें विशेष रूप से उनके नैतिक विकास के सिद्धांत के लिए जाना जाता है, जिसे उन्होंने विभिन्न शोध अध्ययन के माध्यम से हार्वर्ड के नैतिक शिक्षा के केंद्र में लोकप्रिय बनाया।
नैतिक विकास का उनका यह सिद्धान्त, स्विस मनोवैज्ञानिक जीन पियाजे और अमेरिकी दार्शनिक जॉन डीवी के विचारों से प्रभावित है। इन दोनों व्यक्तियों का मानना था
कि एक प्रगतिशील फैशन में मनुष्य का विकास दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक प्रकार से होता है। कोहलबर्ग ने पियाजे के सिद्धांत को आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि नैतिक विकास निरंतर चलने वाली एक प्रक्रिया है जो की जीवन भर घटित होती है।
"द हाइन्ज डिलेम्मा (हाइन्ज की दुविधा)
कोहलवर्ग का सिद्धांत युवा बच्चों के समूह के साथ किए शोध और साक्षात्कार पर आधारित है। इन बच्चों के समक्ष नैतिक दुविधाओं की कुछ श्रेणियों को प्रस्तुत किया गया तथा उस पर उनके तर्क के पीछे के निर्णय को जानने के लिए साक्षात्कार भी लिया गया। नैतिक दुविधा के उदाहरणस्वरूप "यूरोप में एक महिला एक विशेष प्रकार के कैंसर की बीमारी से ग्रस्त होने के कारण मरणासन्न स्थिति में थी।
चिकित्सको के अनुसार वो केवल एक दवा से बच सकती थी जोकि उसी शहर के एक वैद्य ने बनाई थी। परंतु वह वैदय दवा के मूल्य से दस गुना ज्यादा मूल्य में उसे बेच रहा था। उस बीमार महिला का पति हाइन्ज उस दवा की कीमत का आधा मूल्य ही जुटा पाया। उसने वैदय से निवेदन किया की उसकी पत्नी मर जाएगी, इसलिए वह उसे कम कीमत में दवा दे दे। परंतु वैदय ने ऐसा करने से मना कर दिया। इसके बाद, हाइन्ज ने अपनी पत्नी के लिए वैदय के स्टोर को तोड़कर उस दवा को चुरा लिया।"
कोहलबर्ग की दिलचस्पी ये जानने में नहीं थी, कि हाइन्ज गलत था या सही बल्कि शोध में शामिल बच्चों के निर्णय के पीछे के तर्क को जानना था। इन्हीं प्रतिक्रियाओं को इस नैतिक विकास के सिद्धांत के चरणों में विभाजित किया गया है।
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