कोठारी आयोग - Kothari Commission

कोठारी आयोग - Kothari Commission


1964 में डॉ. दौलत सिंह कोठारी की अध्यक्षता में शिक्षा आयोग, जिसने अपना प्रतिवेदन 1966 में दिया था, ने भी महिला शिक्षा की समस्या पर विचार किया तथा अपने सुझाव प्रस्तुत किए। कोठारी आयोग ने मानव संसाधनों के विकास, परिवारों की उन्नति तथा बच्चों के चरित्र निर्माण में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की शिक्षा को अधिक महत्वपूर्ण स्वीकार किया तथा महिला शिक्षा के लगभग सभी पक्षों पर अपने विचार प्रस्तुत किए जिनमें से कुछ प्रमुख सुझाव अग्रकित हैं-


1. भारतीय संविधान में संकल्पित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लड़कियों की अनिवार्य शिक्षा के लिए अधिकाधिक प्रयास किए जाएँ।


2. लड़कियों को अध्ययन के लिए लड़कों के विद्यालय में भेजने के लिए जनमत तैयार किया जाए।


3. उच्च प्राथमिक स्तर पर लड़कियों के लिए अलग विद्यालय खोले जाएँ। 


4. लड़कियों के लिए निःशुल्क छात्रावासों तथा छात्रवृत्तियों की व्यवस्था की जाए।


5. लड़कियों के लिए अल्पकालीन शिक्षा तथा व्यावसायिक शिक्षा की व्यवस्था की जाए।


6. लड़कियों की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाए। 


7. लड़कियों के लिए पृथक कॉलेज स्थापित किए जाएँ।


8. शिक्षाशास्त्र, गृहविज्ञान तथा सामाजिक कार्यक्रमों के पाठ्यक्रम को समुन्नत करके लड़कियों के लिए अधिक उपयोगी बनाया जाए।


9. नारी शिक्षा के लिए अनुसंधानइकाईओं की स्थापना की जाए।


10. विवाहित स्त्रियों के लिए अंशकालीन शिक्षा तथा अविवाहित स्त्रियों के लिए पूर्णकालिक शिक्षा की व्यवस्था की जाए।


11. स्त्री शिक्षा के संचालन के लिए केंद्र तथा राज्य स्तर पर प्रशासनिक तंत्र का गठन किया जाए।