सीखने के नियम व सिद्धान्त - Laws and Theories of Learning
सीखने के नियम व सिद्धान्त - Laws and Theories of Learning
सिखाने की प्रक्रिया कैसे सम्पन्न होती है ?हम कैसे सीखते हैं ? कोई व्यक्ति गणित के प्रश्न को हल करना, गाना, खाना पकाना आदि कैसे सौखता है ?ऐसे कई प्रश्नों के उत्तर के लिये सौखने की प्रक्रिया का अध्ययन आवश्यक है। मनोवैज्ञानिकों ने इस दिशा में बहुत प्रयत्न किये हैं और परिणामस्वरूप सीखने या अधिगम सम्बन्धी कुछ सिद्धांतों की रचना की हैं जिनका संक्षिप्त विवा आगे प्रस्तुत है।
सीखने का सिद्धान्त.
ई. एल. थार्नडाइक के सिद्धान्त के अनुसार जब कोई प्राणी सौखता है तो उसके सामने एक विशिष्ट प्रकार की परिस्थिति होती है। यह परिस्थिति उसे किसी प्रकार की अनुकिया करने के लिये दबाव डालती है। धार्नडाइक ने अनुक्रिया की दिशा में दबाबडालने वाली परिस्थिति को उद्दीपन (Stimulus) के रूप में तथा उद्दीपन के परिणाम को अनुक्रिया (Response) के रूप में परिभाषित किया है।
इस प्रकार एक उद्यापन का किसी अनुक्रिया के समय संयोग ही उद्दीपन-अनुक्रिया संबंध (S-R Bond) के रूप मैं जाना जाता है। इस प्रकार थार्नडाइक के अनुसार अधिगम की प्रक्रिया मनुष्य के मस्तिष्क में सम्पन्न होती है तथा यह प्रक्रिया विशिष्टपरिस्थितियों में मध्य स्थापित होने वाले संबंधों का परिणाम होती है।
थार्नडाइक का प्रयोग:
थार्नडाइक ने अपने सिद्धान्त की परीक्षा करने के लिये बिल्लियों पर प्रयोग किये। उसने अपने एक प्रयोग में एक भूखी बिल्ली को पिजड़े में बन्द कर दिया। पिंजड़े का दरवाजा लीवर के दबने से खुलता था। पिजड़े के बाहर भोजन रख दिया। बिल्ली के लिये भोजन उद्दीपन था। उद्दीपन (s) के कारण उसमें प्रतिक्रिया (R) आरंभ हुई। उसने अनेक प्रकार से बाहर आने का प्रयत्न किया। एक बार संयोग से उसका पंजा लीवर पर पड़ गया। फलस्वरूप वह दब गया और दरवाजा खुल गया। थार्नडाइक ने यह प्रयोग कई बार दोहराया। अन्त में एक समय ऐसा आया जब बिल्ली किसी प्रकार की भूल किये बिना लीवर को दबाकर पिजड़े का दरबाजा खोलने लगी। इस प्रकार उद्दीपन और प्रतिक्रिया में सम्बन्ध (S-R Bond) स्थापित हो गया। थार्नडाइक ने सम्बन्धवाद के सिद्धान्त में सीखने के क्षेत्र में प्रयास एवं त्रुटि (Trial and Error) के महत्व को विशेष महत्व दिया है। प्रयास एवं त्रुटि के सिद्धान्त की व्याख्या करते हुए कहा गया है कि हम किसी कार्य को करने में त्रुटि या भूल करते हैं। बार-बार प्रयास करके त्रुटियों की संख्या कम या समाप्त हो जाती है। यह प्रक्रिया प्रयास एवं त्रुटि द्वारा सीखना या अधिगम कहलाती है।
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