सीखने की विषेशताएँ - learning characteristics
सीखने की विषेशताएँ - learning characteristics
योकम एवं सिम्पसन (Yoakam and Simpson ) के अनुसार सीखने की विषेशतायें निम्नलिखित हैं-
1. सीखना जीवन पर्यंत चलने वाली एक सतत प्रक्रिया -सीखने की प्रक्रिया जीवन भर चलती है। व्यक्ति अपने जन्म के समय से मृत्यु तक कुछ न कुछ सीखता है।
2. सीखना व्यवहार में परिवर्तन है व्यक्ति के व्यवहारमें शोधन अथवा परिमार्जन होना ही सीखना है जिसके कारण व्यक्ति अपने पूर्व व्यवहार की अपेक्षा भिन्न व्यवहार करने लगता है।
3. सीखना सार्वभौमिक प्रक्रिया है अपने अनुभवों से सीखने का गुण मनुष्य के साथ-साथ पशुओं में भी मिलता है।
4. सीखना अनुकूलन है- शिशु जन्म के बाद से ही किसी न किसी रूप में अपने बाताबरण से समायोजन प्रारंभ कर देता है।
5. सीखना अनुभवों का संगठन है- सीखना न तो नये अनुभवों की प्राप्ति है और न पुराने अनुभबो का योग, वरन नये व पुराने अनुभवों का संगठन है।
6. सीखना उद्देश्यपूर्ण है- सीखना उद्देश्यपूर्ण होता है। उद्देश्य जितना ही प्रबल होगा, सीखने की प्रक्रिया उतनी ही तीव्र होगी। उद्देश्य के अभाव में सीखना असफल होता है।
7. सीखना बातावरण की उपज है सौखना बातावरण के प्रति सक्रिय अनुक्रिया के रूप में होता है। अतः माता-पिता एवं अध्यापको को घर एवं विद्यालय में सक्रिय एवं प्रभावशाली वातावरण का निर्माण करना चाहिये जिससे बच्चे अच्छे गुणों व बालों को सीख सके।
8. सीखना खोज करना है- किसी बात की खोज करना भी सीखना है। व्यक्ति विभिन्न प्रकार के प्रयास करके स्वयं एक परिणाम पर पहुंचता है।
9. सीखना व्यक्तिगत व सामाजिक दोनों है सीखना व्यक्तिगत प्रक्रिया केसाथ-साथ सामाजिक प्रक्रिया भी है। योकम एवं सिम्पसन के अनुसार सौखना सामाजिक है, क्योंकि किसी प्रकार के सामाजिक वातावरण के अभाव में व्यक्ति का सौखना असंभव है।
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