सीखना या अधिगम - learning or learning
सीखना या अधिगम - learning or learning
शिशु जन्म के समय अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये अपने मातापिता पर निर्भर रहता है। आयु में वृद्धि के साथ-साथ उसकी चेतनाशक्ति भी प्रबल होती जाती है जिससे वातावरण के प्रति उसकी क्रिया- प्रतिक्रिया प्रारंभ हो जाती है। वह शैशवावस्था से ही वातावरण के साथ समायोजन करने लगता है। जैसे जैसे वह बड़ा होता है उसका वातावरण भी विस्तृत होता जाता है और उसी के अनुसार उसके समायोजन के स्वरूप में भी परिवर्तन आता है। वातावरण के साथ समायोजन करने के लिये वह अपने भौतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक वातावरण से भाषा, उठने-बैठने के तरीके, रहन-सहन, रीति-रिवाज, परम्परार्य तथा कार्य करने के तरीके सीखता है। समायोजन के दौरान वह जो अनुभव अर्जित करता है, उन अनुभवों के आधार पर वह अपने व्यवहार में आवश्यक बदलाव लाता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि अनुभवों के द्वारा व्यवहार में परिवर्तन ही सीखना है।
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