पुस्तकालय - Library

पुस्तकालय - Library


विद्यालय में पुस्तकालय का महत्वपूर्ण स्थान है।


कार्लाइल:- पुस्तकालय पुस्तकों का संकलन नहीं आज के युग का वास्तविक विद्यालय है।


पुस्तकालय विद्यालय की एक बुरी है। जिसके चारों ओर विद्यालय का संपूर्ण जीवन चक्कर लगाता है। पुस्तकालय विद्यालय की आत्मा है। कोई भी विद्यालय पुस्तकालय के बिना अधूरा है।


पुस्तकालय की आवश्यकता


१) स्वाध्याय विद्यार्थियों को स्वाध्याय हेतु पुस्तकालय की आवश्यकता होती है। स्वाध्याय में रूचि उत्पन्न करके, उसे जीवन का स्थायी अंग बनाने, विद्यालय की प्रयोजना प्रणाली को सफलतापूर्वक कियान्वित करने, पाठयक्रम सहगामी क्रियाओं को प्रभावशाली ढंग से पूरा करने के लिये एक संपन्न पुस्तकालय की आवश्यकता


होती है।


(२) शैक्षिक दक्षता


(३) स्वतंत्र चिंतन


४) शैक्षिक लक्ष्य


५) अतिरिक्त अध्ययन


(६) सामान्य ज्ञान


(७) विभिन्न प्रकार की पुस्तके


८) सामाजिक सांस्कृतिक जानकारी।


९) मौन अभ्यास ।


१०) वैयक्तिक अध्ययन।


११) समय का सदुपयोग।


१२) पाठ्येत्तर अध्ययन।


९३) प्रगतिशील शिक्षण विधियों में सहायक


१४) निर्धन।



पुस्तकालय के कार्य (Functions of Library)


पुस्तकालय के प्रमुख कार्य:


१) पुस्तके शिक्षकों के अनुदेशन कार्यों में सहयोग देती है। विभिन्न विषयों की पुस्तके तथा संदर्भ पुस्तके ज्ञान में वृद्धि करती है।


२) पुस्तके विद्यार्थियों के स्वाध्याय को बढ़ावा देती है।


३) पढ़ने की आदतों को पुस्तकालय के माध्यम से डाला जा सकता है।


४) पुस्तकालय अच्छे साथी के रूप में पुस्तकें पढ़ने को प्रोत्साहित करता है।


५) पाठ्यक्रम को समृद्ध बनाने का कार्य करता है।


६) सद्साहित्य पढ़ने को प्रोत्साहित करता है।


७) बालाकों में शब्दकोश, संदर्भ ग्रन्थों आदि के उचित प्रयोग की कुशलता विकसित करता है।

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पुस्तकालय कक्ष (Library Room)


पुस्तकालय भवन में २२ X ९०या ३० X १० का हॉल तथा एक स्टोर १५ x २० का हो सकता है। इसकी स्थिति केन्द्रीय होनी चाहिए। यह ऐसी जगह पर होनी


चाहिए जहा शोर-शराबा न होता हो।


वातावरण:- १. पुस्तकालय में प्राकृतिक हवा और प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए।


२. भवन का फर्श आवाज ना करे।


फर्नीचर: पुस्तकालय का फर्नीचर पर्याप्त होना चाहीये।


१) मेज:- इसमें पढ़ने वाली मेजों की व्यवस्था हो। इनका आकार ३४५ होना चाहिए।


२) कुर्सियाँ:- कुर्सियाँ हल्की तथा मजबूत हो।

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३) पत्रिका स्टैंड पत्र-पत्रिकाओं के लिए मैग्जीन स्टैंड हो जिसमें उन्हें प्रदर्शित किया जा सके।


४) डिस्पले बोर्ड- २-४ डिस्पले बोर्ड होने चाहिए जिन पर पुस्तकालय नियम, नवीन पुस्तकों का प्रदर्शन तथा सूचनायें लगाई जा सके।


(५) पुस्तकालया दक्ष्य के लिये अलग काउंटर तथा मेज हो ।


६) कोई तालिका बॉक्स:- पुस्तकों की तलाश करने के लिये कार्ड तालिका बॉक्स बहुत उपयोगी होता है


७) पुस्तको की अलमारियाँ: पुस्तकों के लिये बनवायी गई अलमारियाँ ही उपयोग में लानी चाहिए।


पुस्तकालय परिषद ने पुस्तकालय का महत्व निम्नलिखित रूप से बताया है।

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१) अध्यापक, बालक तथा उनके माता-पिता एवं अभिभावकों की आवश्यकताओं को संतुष्ट करने के लिये सहयोग हो ।


२) छात्र-छात्राओं की ऐसी उपयोगी एवं सर्वोत्तम पुस्तकालय संबंधी सेवाएं प्रदान करना जो उनके विकास में सहायक हो।


(३) छात्रों को अध्ययन में आनंद एवं संतोष प्राप्त कराने के लिये उन्हें उत्साहित करना।


४) छात्रों में दृश्य एवं श्रव्य (कपवटपेनस) साधनों को प्रयोग करने की क्षमता उत्पन्न करना।।


५) छात्रों के लिए उपयोगी पुस्तकों के चयन और अन्य सहायक सामग्री को एकत्र करने के लिये अध्यापकों का सहयोग प्राप्त करना।। भारत में पुस्तकालयों को वर्तमान दशा:


मुदालियार आयोग के अनुसार आजकल के अनेक विद्यालयों में पुस्तकालय व्यवस्था नाम मात्र को है। उनमें पुस्तकें पुरानी एवं बालकों की रूचि के अनुकूल नहीं


है।