वायगाँत्सकी के सिद्धान्त की सीमाएँ , वायगाँत्सकी तथा शिक्षा - Limitations of Vygantsky's Theory, Vygantsky and Education

वायगाँत्सकी के सिद्धान्त की सीमाएँ , वायगाँत्सकी तथा शिक्षा - Limitations of Vygantsky's Theory, Vygantsky and Education

वायगोत्सकी ने संज्ञानात्मक विकास में समाज तथा संस्कृति की भूमिका को महत्व दिया है। परंतु वायगात्सकी के कार्य में इस सवाल का जवाब मिलना मुश्किल है कि वह कौन-सी संज्ञानात्मक प्रक्रिया है जिसके कारण बच्चा समाज की गतिविधियों में स्वतंत्र रूप से भाग ले पाता है? बायगॉत्सकी के सिद्धांत में अधिकतर केवल सैद्धातिक संकल्पनाएँ होती हैं। बायगोत्सकी का ३२ वर्षों की अल्पायु में देहांत हो गया। और वे अपने विचारों को आगे नहीं ले जा सके। हालांकि उनके सिद्धातों पर उनके विद्यार्थियों ने शोध कर अध्ययन किया। वायगात्स्की के सिद्धांत की उपयोगिताएँ उनके अनुयायियों ने ही प्रस्तुत की हैं, जो कि आवश्यक नहीं कि बायगोत्स्की का भी तात्पर्य रहा हो।

वायगाँत्सकी तथा शिक्षा


सहपाठियों तथा बड़ों का योगदान वायगात्सकी के अनुसार, बालक अकेले ही ज्ञान का निर्माण करना नहीं सीखता अपितु अपने सहपाठियों तथा बड़ों के मार्गदर्शन से सीखता है जिसे स्कैफोल्डिंग (scaffolding) कहते हैं। बायगोत्सकी ने सहकारी ढंग से सीखने (Cooperative learning) को भी बढ़ावा दिया जहाँ बच्चों का एक छोटा समूह एक निश्चित उद्देश्य के लिए मिलकर कार्य करता है। वायगात्स्की के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त से पारस्परिक शिक्षण (Reciprocal Teaching) को भी बढ़ावा मिला। जहाँ शिक्षक तथा 2-4 विद्यार्थी एक समूह में बैठकर बारी-बारी से पठन करते है इस दौरान वे 4 संज्ञानात्मक तरीकों का प्रयोग करते हैं सवाल करना, सारांश बताना, समझाना, अनुमान लगाना। सीखने के दौरान, शिक्षक को बालक का मार्गदर्शन करना चाहिए। जैसे कार्य शुरू करते समय ताकि बालक धीरे-धीरे उस कार्य को स्वतंत्र रूप से कर सके। इसे ही सहायक सीखना (Assisted learning) कहते हैं।