प्रधान अध्यक्ष के रूप में मैकाले की नियुक्ति - Macaulay's appointment as President

प्रधान अध्यक्ष के रूप में मैकाले की नियुक्ति - Macaulay's appointment as President


सन 1834 को 10 जून को लॉर्ड मैकाल भारत में कंपनी का सदस्य बनकर आया। प्राच्य एवं पाश्चात्य विचारों का लेकर विवाद की उझा समस्या का हल करने के लिए लाक शिक्षा समिति ने मैकाल का समिति का अध्यक्ष नियुक्त करने का गवर्नर जनरल से अनुरोध किया और विलियम बैंटिंग ने मैकाल का लोक शिक्षा समिति का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। मैकाल से कहा गया कि वे 1813 ई के आज्ञापत्र में शिक्षा एवं साहित्य संबंधी धाराओं का व्यय करने के लिए कानूनी राय दें। लॉर्ड मैकाल न 8 फरवरी 1835 का ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत किया जिसम भारतीय साहित्य तथा संस्कृति पर आघात किया गया।


मैकाले के विवरण पत्र की प्रमुख बाते


1) साहित्य संबंधी व्याख्या:- लॉर्ड मैकाल न 1813 ई के आज्ञापत्र में आए हुए साहित्य शब्द की व्याख्या अपने ढंग से की और उन्होंने कहा कि साहित्य का मतलब अंग्रेजी साहित्य है न की अरबी और संस्कृत साहित्य उसने वित्त और अनुदान का व्यय करने की सपूर्ण छूट कम्पनी को दो।


2) भारतीय विद्वान संबंधी व्याख्या:- आज्ञा पत्र में लिखित भारतीय विद्वान का अर्थ मैकाल ने प्राच्च भाषा और साहित्य के ज्ञाता का नहीं बताया बल्कि उन्हाने इसका अर्थ वैसे भारतीय लोगों से किया जा लॉक और मिल्टन के साहित्य से परिचित है।


3) शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी:


शिक्षा का माध्यम उन्होंने अंग्रेजी बताया और उसके लिए निम्नलिखित कारण दिये- 


1) उसके अनुसार अंग्रेजी भाषा पाश्चात्य भाषाओं में सर्वोपरि है जा इस भाषा का जानता है वह सुगमता से उस विशाल ज्ञान भण्डार का प्राप्त कर सकता है जिस विश्व की सबसे बुद्धिमान जातियों ने रखा है। 


2) भारतीया में प्रचलित भाषाओं में साहित्य तथा वैज्ञानिक ज्ञानकाष का अभाव है। वे इतनी अल्प विकसित तथा गंवार है कि उसका बाहरी भण्डार से ज्ञान प्राप्त करने की सख्त आवश्यकता है।


3) देश की अधिकांश जनता अंग्रेजी पढ़न के लिये उत्सुक है।


4) शासक वर्ग की भाषा अंग्रेजी रहने के कारण भारत का उच्चतम वर्ग भी अग्रेजी बालना पसंद करता है।


4) भारतीय साहित्य का मजाक:- भारत के साहित्य का मजाक उड़ाते हुए उसने लिखा, "भारत तथा अरबी साहित्य का मान एक अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय की एक अलमारी को पुस्तकों से अधिक नहीं है"।


(5) भारतीय धर्म पर प्रहार:- मैकाल के अनुसार भारतीय धर्म संबंधी ज्ञान असत्य है उन्हान संस्कृत का शिक्षण का माध्यम बनाने की सलाह नहीं दी, संस्कृत का एक असत्यपूर्ण समन्वय कहा Teaching false history, false astronomy false medicine, because we find therm in company with a false religion.


6) अरबी और संस्कृत पर समय एवं धन का अपव्यय:


मैकाल ने सरकार का सलाह दी कि संस्कृत तथा अरबी की पुस्तका पर ३० वर्ष म ६० हजार रुपए खर्च किए गए और इसक बदल में एक हजार रुपए की भी प्राप्ति नहीं हो सको अतः अरबी और संस्कृत की पुस्तकों के प्रकाशन एवं पुनरुद्धार पर रुपए खर्च करना एक तरह से समय और धन का अपव्यय करना है। 


7) देशी संस्थाओं का विरोध: मैकाल न सर्वाधिक विराध देशी शिक्षण संस्थाओं का किया उनका कथन था कि इन दशी शिया संस्थाओं सरकार और जनता को किसी तरह का लाभ नहीं है।


8) मैकाले ने निस्यंदन सिद्धांत (Downward Filtration Theory) को लागू किया उसके अनुसार,


"हम इस समय एक एस वर्ग का निर्माण करना है जिसमें च रंग तथा रक्त में भारतीय द्वारा परंतु रुचि नैतिकता तथा बुद्धि में अग्रज हाग"। इस प्रकार भारतीय शिक्षा के इतिहास में मैकाल का विवरणपत्र महत्वपूर्ण स्थान रखता है।