शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य - Main Objectives of Education
शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य - Main Objectives of Education
1) व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास
2) मोक्ष की प्राप्ति
(3) जीवन को शिक्षा
(4) सामाजिक कुशलता
(5) संस्कृति का संरक्षण
6) चरित्र का निर्माण
7) नागरिक व सामाजिक कर्तव्य पालन की भावना का समावेश
1) व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास (Harmonious Development of Personality)
वैदिक शिवा का उदद्देश्य व्यक्ति के व्यक्तित्व का सर्वागीण विकास करना था। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास था। गुरु के सामीप्य में रहकर विद्यार्थी आत्म-संयम एवं आत्म सम्मान का पाठ पढ़ते थे।
2) मोक्ष की प्राप्ति (To attain salvation)
वैदिक शिक्षा का प्रमुख उददश्य माथ की प्राप्ति था। मनुष्य जीवन के चार मुख्य पुरुषार्थ मान गए है अर्थ, धर्म, काम और मात्र भारतीय संस्कृति के अनुसार तीन पुरुषार्थ के बाद ही चौंध पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है। शिक्षा का तत्कालीन पाठयक्रम इसी उद्देश्य पर आधारित था।
3) जीवन की शिक्षा (Education for life) :
वैदिक काल की शिक्षा एक प्रकार की जीवन की शिक्षा थी। शिया प्राप्ति के समय ही विद्यार्थियों का स्वावलंबन की शिक्षा दी जाती थी।
4) सामाजिक कुशलता (Social Efficiency):
वैदिक काल में विद्यार्थी मानसिक शिक्षा के साथ साथ सामाजिक कार्यो में भी कुशलता प्राप्त करते थे। जो उन्हें समाजोपयोगी कार्यों में दक्ष करती थी। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए विद्यार्थियों का उनकी रुचि और परम्परागत कर्म के अनुसार किसी उद्याग या व्यवसाय की शिक्षा अनिवार्य रूप से दी जाती थी।
5) संस्कृति का संरक्षण (Preservation of culture):
वैदिक काल में शिक्षित ज्ञान का लिखकर संरक्षित करना अत्यन्त जटिल था इसलिए शिक्षक अपने विद्यार्थिया का बदां के अध्याय कठस्थ करा दिया करते थे।
इससे वैदिक ज्ञान लिपि के अभाव में भी सुरक्षित बना रहता था। इस प्रकार संस्कृति की सुरक्षा भी तत्कालीन शिक्षा का उद्देश्य था।
6) चरित्र का निर्माण:
वैदिक काल में छात्रा का चरित्र निर्माण सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य था। इसके लिये छात्रों का चरित्र निर्माण की शिक्षा दी जाती थी। छात्र सदाचारपूर्ण जीवन व्यतीत कर विद्याध्ययन करते थे। इसके लिए व अपने गुरु के चरित्र से प्रेरणा लेते थे।
7) नागरिक व सामाजिक कर्तव्य पालन की भावना का समावेश:
छात्रों में नागरिक व सामाजिक कर्तव्य पालन की भावना का समावेश करना वैदिककालीन शिक्षा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य था। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए छात्रा का गुरु द्वारा विभिन्न प्रकार के उपदेश दिए जाते व अतिधियांका सत्कार, दीन-दुखियों की सहायता, दूसरों के प्रति निःस्वार्थ व्यवहार और आदर्श पुत्र, पिता एवं पति के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले उपदेश प्रमुख रूप से दिये जाते थे।
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