संविलयन एवं अधिग्रहण की असफलता के प्रमुख कारण - Major reasons for failure of mergers and acquisitions
संविलयन एवं अधिग्रहण की असफलता के प्रमुख कारण - Major reasons for failure of mergers and acquisitions
व्यवहार में सभी संविलयन एवं अधिग्रहण सफल नहीं होते हैं उनमें से कुछ तो सफल होते है और अन्य असफल हो जाते हैं। उनकी असफलता के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-
1. उचित मूल्यांकन न किया जाना- यदि संविलयन से पूर्व विक्रेता कंपनी के संपत्तियों एवं दायित्व का उचित व सही मूल्यांकन नहीं किया जाता तो वह असफलता का कारण बन सकती है।
2. भिन्न व्यावसायिक क्रियायें सामान्यतः क्रेता एवं विक्रेता कंपनी की व्यावसायिक क्रियायें भिन्न भिन्न होती है। इससे उसके प्रबंधन में कठिनाईयाँ आ सकती है जिससे पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता।
3. सही वित्तीय जानकारी का न होना प्रायः व्यवहार में विक्रेता कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति को बढ़ा-चढ़ा कर बताती है। यदि सही-सही वित्तीय जानकारी नहीं मिल पाती तो संविलयन के पश्चात् इससे कठिनाईयाँ उत्पन्न हो सकती है।
4. अधिक भुगतान करना - विक्रेता कंपनी के शुद्ध मूल्य से अधिक धनराशि का भुगतान करने पर भी संविलयन असफल हो सकता है।
5. अधिक नियंत्रण मिलने में देरी प्रायः व्यवहार में क्रेता कंपनी विक्रेता कंपनी पर शीघ्र ही नियंत्रण प्रबंधकीय स्थापित ननहीं कर पाती। इसके फलस्वरूप स्थिति बिगड़ जाती है और संविलयन असफल हो जाता है।
6. उचित संयोजन का न होना- एक कंपनी का दूसरी कंपनी से संयोजन तभी सफल हो सकता है जबकि उसके लिये कुशल प्रबंधक उपलब्ध हों। यदि उच्च स्तर के प्रबंधक नहीं होंगे तो संविलयन के समान होने की संभावना कम हो जाती है।
7. कंपनियों की स्थिति का अनुकूलन न होना यदि एक सुदृढ़ कंपनी एक कमजोर कंपनी का अधिग्रहण करती है तो की सफलता की संभावना अधिक रहती है। किंतु यदि दो सुदृढ़ कंपनियों का दो कमजोर कंपनियों का संविलयन होता है तो उनकी सफलता की संभावना कम होती है।
8. सांस्कृतिक एवं सामाजिक कारण यदि संविलयन कंपनियों का सांस्कृतिक एवं सामाजिक परिदृश्य भिन्न-भिन्न होता है तो उस स्थिति में भी संविलयन की सफलता की संभावना कम होती है।
9. पहचान का मिट जाना यदि दो संविलयन कंपनियों की अपनी पहचान समाप्त हो जाती है तो उसके परिणामस्वरूप उनके ख्याति में कमी आती है जो बाद में असफलता का कारण बन सकती है।
10. व्यावसायिक कार्यकलापों में परिवर्तन संविलयन करने वाली कंपनियाँ, संविलयन से पूर्व निर्धारित विधियों को प्रयोग में लाती है। संविलयन के पश्चात् उनकी कार्यविधियों में जो भी परिवर्तन होता है उसके परिणाम अच्छे हो भी सकते है और नहीं भी। यदि परिणाम अच्छे नहीं होते तो वह धीरे-धीरे असफलता का कारण बन सकता है।
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