पूंजीकरण का आशय , पूंजीकरण की उद्देश - Meaning of capitalization, purpose of capitalization

पूंजीकरण का आशय , पूंजीकरण की उद्देश - Meaning of capitalization, purpose of capitalization

आधूनिक अवधारणा के अनुसार पूजीकरण में दिर्घकालिन देयता के साथ-साथ अल्पजकालिन देयताओं का विचार करना अनिवार्य है। आधूनिक अवधारणा के अनुसार पूजीकरण में निम्नीनांकित को सम्मिलित किया जाता है।


i. व्यायवसायध्उद्योगध्कपनी ने जारी किए गए अंश पूजी


ii दिर्घकालिन ॠण (Share capital)


iii. संचिती एवं आधिक्यों (Reserve & Surplus)


iv. अल्पतकालिन ऋण ( Short term Debt )


V. धनको (Creditors)


पूंजीकरण की उद्देश


किसी भी व्योवसाय को सुसचालित करने हेतु पूंजी की आवश्यकता होती है। व्यातवसाय के विभिन्नक क्षेत्रों की मांग को देखते हुए पूंजीकरण किया जाता है। निम्नकलिखित उद्देशों को सामने रखते हुए पूजीकरण की प्रक्रिया सम्पनन्नन की जाती है।


व्यावसाय को स्थापन करने


सामान्य तरू व्याथवसाय सुरू करने की प्रक्रिया से ही व्यारवसाय स्थापपन किया जाता है। व्यातवसाय स्थातपन करते समय व्यानवसाय की मांग के अनुसार पूजीकरण की प्रक्रिया कार्यान्धीरतध्चलाई की जाती है। व्यावसाय के कार्य के स्ववरूप के अनुसार पूंजीकरण की मांग निश्चित कर व्या वसाय को स्थापन करते समय पूंजीकरण किया जाता है।