रोकड बजट का अर्थ - Meaning of cash budget

रोकड बजट का अर्थ - Meaning of cash budget


नकदी के आयोजन के क्षेत्र में प्रयुक्त होने वाला दूसरा महत्वपूर्ण उपकरण है रोकड़ बजट । गुथमैन एवं डूगल के शब्दों में, "किसी व्यावसायिक संस्था के लिए एक निश्चित अवधि के लिये रोकड़ स्थिति का पूर्वानुमान लगाना ही रोकड़ बजट कहलाता है।" इस प्रकार एक रोकड़ बजट किसी निश्चित भावी अवधि के लिए रोकड़ प्रवाह का पूर्वानुमान होता है। इसे भावी रोकड़ अन्तर्वाहों तथा रोकड़ बहिर्वाहों का अनुमान लगाकर तैयार किया जाता है। ये अनुमान विक्रय उत्पादन, विपणन, सेविवर्गीय तथा उपक्रम की अन्य नीतियों पर विचार करके लगाये जाते हैं।


जब रोकड़ बजट व्यापार के लिए नकदी की आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगा देता है तो इसका दूसरा कार्य रोकड़ नियन्त्रण के रूप में शुरू होता है। इस कार्य के लिये नकदी- बजट रिपोर्ट (Cash Budget Report) बनाई जाती है।

इस रिपोर्ट का आशय वास्तविक आय-व्यय की तुलना पूर्वानुमान आय-व्यय करने से है। प्रत्येक बजट समय की समाप्ति पर वास्तविक (Actual) व्ययों एवं बजट की राशियों में तुलना की जाती है। तुलनात्मक अध्ययन द्वारा यदि दोनों में अन्तर पाया जाता है तो अन्तर का कारण ढूंढा जाता है। नकदी- रिपोर्ट (Cash Report) नियन्त्रण करने की एक अच्छी विधि है।


गुथमैन एवं डूगल के शब्दों में, किसी व्यावसायिक संस्था के लिये एक निश्चित अवधि के लिए रोकड़ स्थिति का पूर्वानुमान लगाना ही रोकड़ बजट कहलाता है।


इसी प्रकार जेम्स वैन होने के शब्दों में, एक रोकड़ बजट किसी निश्चित भावी अवधि के लिए रोकड़ प्रवाह का पूर्वानुमान होता है।"


इस प्रकार रोकड़ बजट बनाकर यह पूर्वानुमान लगाया जाता है कि एक परिकल्पित अवधि में अनुमानित व्ययों के लिये कितनी रोकड़ की आवश्यकता होगी और फर्म की सामान्य गतिविधियों से (नकद बिक्री, उधार की वसूली आदि) कितनी रोकड़ एकत्रित हो सकती है। इस प्रकार रोकड़ बजट बनाने का मुख्य उद्देश्य उपक्रम की शोधन क्षमता (Solvency) को बनाये रखना है, एक रोकड़ बजट प्रायः एक वर्ष के लिए बनाया जाता है जिसे भविष्य में छमाही, तिमाही अथवा मासिक आधार पर भी विभाजित किया जा सकता है।


रोकड़ बजट बनाने के लिए वित्तीय प्रबन्ध को निम्न कार्य करने पड़ते है -


(अ) प्राप्तियों का पूर्वानुमान लगाना (Estimating Cash-inflow) - रोकड़ बजट बनाने में सबसे पहला कदम रोकड प्राप्तियों से विभिन्न साधनों को निश्चित करके उनसे प्राप्त होने वाली रोकड़ का पूर्वानुमान लगाना है।

रोकड की प्राप्ति नकद बिक्री, देनदारों से वसूली, प्राप्य बिलों से भुगतान, अग्रिम तथा ऋणों पर ब्याज, स्थिर सम्पत्तियों की बिक्री से प्राप्य आय आदि से होती है। नकद बिक्री से प्राप्त हो सकने वाली रोकड़ का पूर्वानुमान तो गत वर्षों में हुई नकद बिक्री तथा उधार बिक्री के पारस्परिक अनुपात के आधार पर लगाया जा सकता है। परन्तु उधार बिक्री से प्राप्त होने वाली रोकड़ का पूर्वानुमान लगाना प्रायः कठिन होता है। इसके लिए व्यवसाय की प्रकृति, साख नीति, देय नकद कटौतियाँ, वसूली की अवधि तथा अपने ग्राहकों की साख-स्थिति आदि कई तत्वों को ध्यान में रखना पड़ेगा।


(ब) भुगतानों का पूर्वानुमान लगाना ( Estimating Cash-outflows )– इसका अनुमान लगाने के लिये सामग्री के क्रय, मजदूरी, प्रत्यक्ष उपरिव्यय, ऋणदाताओं को दिये जाने वाले भुगतान कर दायित्वों का अनुमान तथा लाभांश देयता आदि का अनुमान लगाया जाता है, लेकिन ऐसा कोई भी व्यय इनमें सम्मिलित नहीं किया जाता जिस पर रोकड़ का व्यय नहीं होता, जैसे हास की व्यवस्था आदि। ऋणदाताओं के भुगतान के लिये आवश्यक रोकड़ का अनुमान लगाते समय पिछले अनुभवों के आधार पर छूट आदि की व्यवस्था करनी चाहिये।