पाठ्य सहगामी गतिविधियों का अर्थ - Meaning of co-curricular activities
पाठ्य सहगामी गतिविधियों का अर्थ - Meaning of co-curricular activities
"छात्रों में शास्त्रीय दृष्टिकोण विकसित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, इन गतिविधियों को पाठ्यसहगामी गतिविधियाँ कहते हैं।"
पाठ्यसहगामी गतिविधियाँ
1 क्षेत्र भ्रमण / पर्यटन
सामाजिक विज्ञान की प्रथम पाठ्यपुस्तक स्थानीय वातावरण और सामुदायिक वातावरण प्रयोगशाला हैं। स्थानीय वातावरण के अध्ययन के लिए भ्रमण या पर्यटन सर्वोत्तम है। समाज का सूक्ष्म अवलोकन इस विधि की सहायता से कर सकते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद क्षेत्र भ्रमण या पर्यटन से ले सकते हैं। स्थानीय समाज के सदस्यों के पारंपरिक सम्बन्ध, रीति-रिवाज आदि का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। भ्रमण या सैर, अध्ययन यात्रा. क्षेत्रीय पर्यटन आदि युक्तियों से शैक्षिक पर्यटन सफल बनाया जा सकता है।
क्षेत्र भ्रमण / पर्यटन का महत्व :
1) विभिन्न विषयोंका ज्ञान प्राप्त होता है।
2) निरीक्षण की सहायता से ज्ञान प्राप्त होने के कारण ज्ञानेन्द्रियों की कार्यक्षमता बढ़ती है।
3) छात्रों में शोध वृत्ति का विकास होने के कारण जानकारी प्राप्त करने के लिए खोज करने की क्षमता का विकास होता है।
4) विशिष्ट विषय के सन्दर्भ में विस्तृत एवं अधिक जानकारी प्राप्त होती है।
5) प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त होता है।
6 ) आनन्ददायी एवं कृतियुक्त शिक्षा उपलब्ध होती है।
7) क्षेत्र पर्यटन में ज्ञानेन्द्रिय सक्रिय रूप में कार्य करती हैं।
8) सहनशक्ति, सहभागिता, अनुशासन, नेतृत्व, उत्तरदायित्व, रुचि अभिवृत्ति, अभिव्यक्ति आदि का विकास सामाजिक विज्ञान शिक्षण के उपयुक्त है।
9) ऐतिहासिक स्थल, अवशेष, भवन, संग्रहालय, भौगोलिक या सांस्कृतिक पर्यावरण, ग्रामीण परिवेश, आर्थिक वाणिज्य-वैज्ञानिक महत्व के स्थलों के अवलोकन के लिए उपयुक्त विधि है।
2 फिल्म स्क्रीनिंग अध्ययन-
अध्यापन प्रक्रिया को सुलभ सुचारु, मनोरंजक आनन्ददायी बनाने के लिए शैक्षणिक साधन उपयुक्त
होते हैं। छात्रों को क्रियाशील बनाने के लिए विभिन्न साधनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
छात्रों में योग्यता, रुचि, मनोवृत्तियों को विकसित करने के लिए दृश्य-श्रव्य सामग्री सहायक होती है। पाठ्यांश को सजीव, सरल तथा प्रभावी बनाने के लिए यह उपयुक्त है। दृश्य-श्रव्य सामग्री में रेडियो, चलचित्र, दूरदर्शन आदि प्रभावी है।
चल चित्र / फिल्म खण्ड / फिल्म स्क्रीनिंग:
प्रथम महायुद्ध के पश्चात विभिन्न विषयों के शिक्षण में चलचित्रों का प्रयोग होने लगा था। पश्चिमी देशों में इनका उपयोग विषय शिक्षण के लिए अधिकतर हो रहा है। सामाजिक विज्ञान शिक्षण में सीखने की प्रक्रिया को यह सरल बनाने में योगदान देता है। मानवीय सम्बन्धों को अधिक स्पष्ट करने के लिए सामाजिक विज्ञान शिक्षण में चलचित्र का प्रक्षेपण उपयुक्त होता है। विभिन्न स्थलों के रीति-रिवाज, परंपरा. पोशाक, रहन-सहन, त्यौहार, उत्सव आदि का परीक्षण किया जा सकता है। मानव कल्याण एवं अन्तरराष्ट्रीय सद्भाव विकसित करने में सहायक होता है। सामाजिक विषय शिक्षण में फिल्मो का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है।
सामाजिक विज्ञान शिक्षण में समसामयिक घटनाओं की समझ बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक, राजनैतिक, सामाजिक, भौगोलिक, आर्थिक क्षेत्रों में घटित घटनाओं पर विशेष चलचित्र का निर्माण एवं प्रक्षेपण उपयुक्त होता है। चल चित्र / फिल्म खण्ड/ फिल्म स्क्रीनिंग का महत्व :
1) छात्रों को सीखने के लिए प्रेरणा देने का कार्य करती है।
2) अनुभव करने की स्थितियाँ प्रस्तुत करने में सहायक होती है।
3) छात्रों की ग्राह्य शक्ति को विस्तृत, विकसित एवं व्यापक बनाने में उपयुक्त होता है।
4 ) छात्रों को स्वयं शिक्षा के लिए प्रेरणा प्राप्त करती है।
5) छात्रों में समझ की शक्ति विकसित करने में सहायक है।
6) छात्र अपनी क्षमता एवं योग्यता के अनुसार इससे ज्ञान प्राप्त कर सकता है।
छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए चलचित्र का चयन महत्वपूर्ण है। फिल्म विषयवस्तु में समाहित ज्ञान के लिए सहायक होनी चाहिए। शिक्षाप्रद, मनोरंजक, अभिनयपूर्ण, आकर्षक, कलात्मक, रुचिपूर्ण, योग्य भाषा होनी चाहिए। आवाज स्पष्ट एवं समझने योग्य होनी चाहिए। चलचित्र प्रदर्शित करने के उपरांत शिक्षकों की छात्रों के साथ चर्चा होना जरूरी है। छात्रों द्वारा पूछे प्रश्न, शंका, समस्या आदि का निवारण शिक्षक द्वारा होना आवश्यक है। छात्रों की समझ की कमी को शिक्षक अपने निवेदन द्वारा पूरा कर सकते हैं। चलचित्र पर लेखन से विषय समझ का ज्ञान प्राप्त होता है।
3 सर्वेक्षण (Survey )
सर्वेक्षण द्वारा छात्रों को स्व- अन्वेषण के लिए प्रेरित किया जाता है। स्थानीय वातावरण के सर्वेक्षण के लिए यह विधि उपयुक्त है। सर्वेक्षण के लिए कक्षा के छात्रों को 5-6 समूहों में विभाजित कर उनमें आपस में सहभागिता को बढ़ावा दिया जा सकता है। प्रत्येक समूहों को एक विषय क्षेत्र का सर्वेक्षण करने का कार्य दिया जा सकता है। उदाहरणार्थ किसी ग्राम का सर्वेक्षण निम्न आधार पर कर सकते हैं।
• परिवार की संख्या
• परिवार में सदस्यों की संख्या
• परिवार में स्त्री-पुरुष सदस्यों की संख्या
• परिवार में आय कमाने वाले सदस्यों की संख्या इत्यादि
सर्वेक्षण का महत्व
सामाजिक विज्ञान शिक्षण में सर्वेक्षण का महत्वपूर्ण स्थान है। सर्वेक्षण द्वारा किसी भी क्षेत्र का सकल ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
1) भौगोलिक स्थिति
ग्राम की भौगोलिक स्थिति कैसी है। पहाड़, नदियाँ, झरने, जंगल, खेती, मौसम की स्थिति आदि की जानकारी छात्र लेंगे।
2) उद्गम एवं विकास
ग्राम का इतिहास क्या है। ग्राम का उद्गम और विकास कैसे हुआ है। छात्र ग्राम की वर्त्तमान एवं प्राचीन विकास की अवस्था की जानकारी हासिल करेगा।
3) आर्थिक व्यवस्था
ग्राम के लोगों का व्यवसाय, आर्थिक उत्पादनों का साधन क्या है इसकी जानकारी हासिल की जा सकती है।
4) सुविधा
निवास व्यवस्था, दुकान, यातायात, स्वास्थ्य आदि सुविधाओं की जानकारी छात्र हासिल करेंगे।
5) शासन व्यवस्था
ग्राम की पंचायत व्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था आदि की जानकारी सर्वेक्षण द्वारा प्राप्त होती है।
इस प्रकार सभी छात्र निर्धारित कार्य पूरा करने के उपरांत एक दस्तावेज तैयार करेगा। जिसका वह विश्लेषण करेगा। यह सर्वेक्षण द्वारा प्राप्त विश्वसनीय आलेख होगा। इस आधार पर उपयुक्त निष्कर्ष निकल सकते हैं। आनेवाले छात्रों के लिए यह उपयुक्त रहेगा। इसके द्वारा छात्र जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव करेगा।
कार्य आवंटन
1) सामाजिक विज्ञान शिक्षण की विधियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
2) सामाजिक विज्ञान शिक्षण की विभिन्न विधियों में प्रभावी विधियों का वर्णन कीजिए।
क्रियाएँ
1) सामाजिक विज्ञान शिक्षण की विभिन्न विधियाँ एवं तंत्रों की उपयोगिता का वर्णन कीजिए।
2) विभिन्न पाठ्य सहगामी गतिविधियों की सामाजिक विज्ञान शिक्षण में भूमिका बताइए।
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