शिक्षा का अर्थ - Meaning of Education
शिक्षा का अर्थ - Meaning of Education
प्लेटो ने नैतिक शिक्षा को एक प्रक्रिया माना है। क्या नैतिकता की शिक्षा दी जा सकतीहै? दूसरे शब्दों में क्या सदगुण को सिखाया जा सकता है? इस प्रश्न ने प्राचीन यूनान के सभी दार्शनिकों का ध्यान आकृष्ट किया था। सुकरात ने सद्गुण को ज्ञान के रूप में देखा। उसके अनुसार ज्ञान ही सद्गुण है। प्लेटो ने सुकरात के विचारों को आगे बढ़ाते हुए जान और सद्गुण में भेद किया प्लेटो विचार में भद्र मनुष्य में निम्नलिखित चार बातें सम्मिलित हैं
• दर्शनसंबंधी ज्ञान
• विज्ञान
• ललित कला
• बुद्धि द्वारा निर्दोष समझी जाने वाली श्रेष्ठ तृप्ति
सद्गुण के संबंध में विचार करते हुए प्लेटो कहता है
कि प्रमुख सदगुण चार हैबुद्धिमत्ता, साहस, संयम और न्याय यूनानियों की दृष्टि में अच्छा आदमी राष्ट्र का अच्छा नागरिक होता है। शिक्षा का कार्य राष्ट्र के लिए अच्छे नागरिक तैयार करना है। राष्ट्र में व्यक्तियों के कम से कम तीन वर्ग होने चाहिए। एक तो राष्ट्र के सरक्षक होने चाहिए, दूसरे उन संरक्षकों के सहायक सैनिक होने चाहिए तथा संरक्षकों एवं सैनिकों के अतिरिक्त सम्पत्ति का उत्पादक वर्ग भी होना चाहिए। प्रत्येक वर्ग को अपना निश्चित कार्य करना चाहिए। राष्ट्र में इस प्रकार की व्यवस्था हो कि प्रत्येक वर्ग अपना कार्य करें और दूसरे वर्ग को अपना कार्य करने दें। प्लेटो ने इस व्यवस्था को सामाजिक न्याय' कहा है। सामाजिक न्याय की स्थापना जिस प्रक्रिया द्वारा की जाती है उसे 'शिक्षा' कहा जा सकता है। जो गुण समाज के लिए आवश्यक है, वह व्यक्ति के लिए भी आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति में इन चारों गुणों का संतुलित विकास होना चाहिए। सामाजिक न्याय की व्याख्या करते प्लेटो कहता है कि राष्ट्र के अन्य दो वर्गों को सरक्षकों के अधीन रहना चाहिए।
बाद में प्रसिद्ध जर्मन दार्शनिक शापनहार ने प्लेटो की उपर्युक्त सूची का विरोध किया है।
वह कहता है कि बुद्धिमत्ता और साहस जीवन के लिए आवश्यक तो हैं किंतु इसे सदगुण का पद नहीं दिया जा सकता। बहुत से बुद्धिमान एवं साहसी व्यक्ति अपनी बुद्धि एवं साहस का दुरपयोग करते हैं। संयम का पथ भी निश्चित नहीं है। जो पथ मेरे लिए संयम का है वह अत्यधिक ठंडी जगहों पर रहनेवालों के लिए संयम का पथ नहीं हो सकता।
कुछ भी हो, प्लेटो स्पष्ट रूप से कहता है कि बुद्धिमत्ता साहस, संयम एवं न्याय मौलिक सद्गुण है एवं व्यक्ति को इनमें प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया ही शिक्षा है। अपनी अंतिम पुस्तक राजनियम (लॉज) में वह कहता है कि शिक्षा से मेरा अभिप्राय उस प्रशिक्षण से है जो शिशुओं में उचित आदतों के निर्माण के दद्वारा सदगुणों को उत्पन्न करता है। इस प्रशिक्षण से यह योग्यता प्राप्त हो जाती है कि हम उस वस्तु से सदा घृणा करें जिससे हमें घृणा करनी चाहिए और उस वस्तु से सदैव प्रेम करें, जिससे वास्तव में प्रेम करना चाहिए। मेरी दृष्टि में इसके प्रशिक्षण को शिक्षा कहना ठीक ही है।"
प्लेटो के अनुसार संयम तथा साहस का विकास अभ्यास से होता है। ये दोनों गुण आदतजन्य हैं। प्रारंभिक जीवन के उचित नियंत्रण से ही आदत तथा अभ्यास सम्भव है। आदत एवं अभ्यास के आधार पर बाद में बुद्धितत्व विकसित होता है। इसी बुद्धितत्व पर बुद्धिमत्ता एवं न्याय के सद्गुण आधारित हैं। शिक्षा द्वारा इन्हीं सद्गुणों का विकास किया जाता है।
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