संवेगात्मक विकास का अर्थ , संवेगों की विशेषताएँ - Meaning of emotional development, characteristics of emotions

संवेगात्मक विकास का अर्थ , संवेगों की विशेषताएँ - Meaning of emotional development, characteristics of emotions

मानव व्यवहार के तीन पक्ष होते हैं- जानात्मक, भावात्मक एवं क्रियात्मक इन तीन पक्षों के संतुलित विकास पर मानब का अस्तित्व निर्भर करता है। भावात्मक अथवा संवेगात्मक विकास का तात्पर्य उस उत्तेजनापूर्ण अवस्था से है जो व्यक्ति के शरीर एवं मस्तिष्क को अशान्त या अस्थिर बना देती है तथा जिसके परिणामस्वरूप वह कार्य को करने हेतु उत्तेजित होता चला जाता है। संवेग वह भावात्मक अनुभूति है जो व्यक्ति की मानसिकता एवं शारीरिक उत्तेजनापूर्ण अवस्था तथा सामान्यीकृत आन्तरिक समायोजन के साथ जुड़ी होती है तथा उसकी अभिव्यक्ति प्रकट व्यवहार के द्वारा होती है। 


संवेगों की विशेषताएँ


संवेग की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार है:- 


1) एक संवेग से विभिन्न संवेग पैदा होते हैं।


(2) संवेगों का क्षेत्र व्यापक होता है।


3) संवेग व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताओं से सम्बन्धित होता है।


(4) संवेगों की उत्पत्ति अचानक ही होती है तथा धीरे-धीरे से समाप्त हो जाती है।


5) प्रत्येक संवेग के पीछे कोई भावना कार्य करती है। यही भावना बच्चे को कार्य करने हेतु विवश करती है।