कोष-प्रवाह विवरण का आशय - Meaning of Funds Flow Statement

कोष-प्रवाह विवरण का आशय - Meaning of Funds Flow Statement


किसी व्यवसाय के दो आर्थिक चिट्टों के बीच व्यवसाय में कोषों के प्रवाह की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए बनाया गया विवरण कोष प्रवाह विवरण कहलाता है । फाउल्के के शब्दों में, कोषों के स्त्रोतों और प्रयोगों का विवरण एक तकनीकी युक्ति है जो कि दो तिथियों के बीच एक व्यावसायिक उपक्रम की वित्तीय स्थिति में हुए परिवर्तनों का विश्लेषण करने के लिए तैयार किया जाता है।"


राबर्ट एन्थोनी के अनुसार, " कोष प्रवाह विवरण उन स्रोतों का वर्णन करता है जिनसे अतिरिक्त कोष प्राप्त किये गये थे और जिनमें इन कोषों का प्रयोग किया गया है।" अतः स्पष्ट है कि ये विवरण दो तिथियों के आर्थिक चिट्ठों के बीच विभिन्न सम्पत्तियों और समताओं में हुए परिवर्तनों को प्रदर्शित करता है सक्षेप में, यह विवरण किसी संस्था के वित्तीय ढाँचे के परिवर्तनों को प्रकट करता है।


कोष का आशय (Meaning of Funds) - कोष प्रवाह में प्रयुक्त कोष' शब्द का प्रयोग विभिन्न अर्थों में किया जाता है। वास्तव में इस शब्द का अर्थ इसके बनाने वाले के इरादों और आवश्यकताओं के अनुसार अलग अलग हो जाता है। अपने संकुचित अर्थ में इसका आशय रोकड़' से लिया जाता है। प्रबन्ध द्वारा व्यवसाय के अल्पकालीन वित्तीय नियोजन में इस शब्द का प्रयोग भुगतानों के विवरण के अतिरिक्त और कुछ नहीं रह जाता है। ऐसे कोष विवरण को रोक-प्रवाह •विवरण कहते है । अतः रोक प्रवाह विवरण में कोष और रोकड़ एक दूसरे के पर्यायवाची हो जाते हैं।


व्यापक अर्थो में कोष शब्द का आशय शुद्ध कार्यशील पूँजी (Net Working Capital) से होता है। कोष शब्द का यह अर्थ ही अधिक प्रचलित है तथा कोष प्रवाह विवरण में इसका प्रयोग इसी अर्थ में ही किया जाता है।

इसीलिए कुछ विद्वान इस विवरण के लिये कार्यशील पूँजी का विश्लेषण शब्द का प्रयोग अधिक तर्कसंगत मानते है। चूँकि कुल चालू सम्पत्तियों (Total Current Assets) और कुछ चालू दायित्वों (Total Current Liabilities) का अन्तर शुद्ध कार्यशील पूँजी होता है, अतः कुल चालू सम्पत्तियों और चालू दायित्वों का अन्तर ही कोष कहलाता है।


चालू सम्पत्तियाँ (Current Assets) - चालू सम्पत्तियों में सामान्यतः निम्नांकित सम्पत्तियाँ शामिल की जाती हैं : हस्तस्थ रोकड़ (Cash in hand) बैंक में रोकड़ (Cash at Bank) देनदार (Debtors), पूर्वदत्त व्यय (Prepaid Expenses), अल्पकालीन निक्षेप (Short-term Deposits) प्राप्य बिल (Bill Receivable),


पुस्तकीय ऋण (Book-Debts), स्टॉक / स्कन्ध (Stock, Inventory or Merchandise), विक्रय (विपणन)


योग्य प्रतिभूतियाँ (Marketable Securities) | सामान्यतः विनियोगों ( Investments) को चालू सम्पत्तियों के अन्तर्गत शामिल नहीं करना चाहिए, परन्तु यदि उक्त विनियोग आसानी से विपणन योग्य है अर्थात् बाजार में बेचे जा सकते हैं या अल्पकालीन हैं तो इन्हें चालू सम्पत्तियों में शामिल करना चाहिए। स्पष्ट सूचना के अभाव में सामान्यतः विनियोगों को दीर्घकालीन ही माना जाता है।


चालू दायित्व (Current Liabilities) चालू दायित्वों का आशय ऐसे दायित्वों से है जिनका भुगतान सामान्यतः एक वर्ष के अन्दर कर दिया जाता है। चालू दायित्वों में सामान्यतः निम्नलिखित को शामिल किया जाता है


व्यापारिक लेनदार (Trade Creditors) नकद साख (Cash Credit), बैंक अधिविकर्ष (Bank Overdraft), देय बिल (Bills Payable), कर के लिए प्रावधान या देय आयकर (Provision for Taxation or Income Tax Dues ), अदत्त व्यय (Outstanding Expenses), अल्पकालीन ऋण (Short term Loans), डूबत एवं संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधान (Provision or Reserve for Doubtful Debts), अयाचित या न मांगा गया लाभांश (Unclaimed Dividend), प्रस्तावित लाभांश (Proposed Dividend)।


प्रस्तावित लाभांश तथा कर प्रावधान को कुछ व्यक्ति चालू दायित्व में शामिल नहीं करते हैं। इनकी विस्तृत विवेचना इसी अध्याय में आगे की गई है।