निर्देशन का अर्थ - Meaning of Guidance

निर्देशन का अर्थ - Meaning of Guidance


निर्देशन को विभिन्न मनोवैज्ञानिकों तथा शिक्षाशास्त्रियों ने भिन्न-भिन्न रूप से परिभाषित किया है। निर्देशन के अर्थ को निम्न परिभाषाओं की सहायता से स्पष्ट किया जा सकता है-


नैप (Knapp) ने निर्देशन को निम्न प्रकार परिभाषित किया है, "किसी विद्यार्थी के बारे में सीखना या जानना, उसे समझने में सहायता देना, उसमें तथा उसके वातावरण में परिवर्तन लाना जो उसके और विकास में सहायक हो, निर्देशन है। "


कार्टर बी, गुड के अनुसार, "निर्देशन छात्रों या व्यक्तियों को ज्ञान व विवेक प्राप्त करने में सहायता देने और आत्मनिर्देशन की दिशा में अग्रसर करने के दबाव या आदेश से मुक्त व्यवस्थित सहायता है। " 


प्रोक्टर ने निर्देशन की परिभाषा में इसको स्पष्ट करते हुए लिखा है,

"निर्देशन एक सेवा है जिसका निर्माण व्यक्ति विशेष अथवा व्यक्तियों के समूह को सहायता प्रदान करने हेतु हुआ है ताकि वे वातावरण के साथ आवश्यक समायोजन कर सकें जिसका सम्बन्ध विद्यालय उसके अतिरिक्त है।" 


एमरी स्टूप्स ने निर्देशन को स्वयं की क्षमताओं के विकास में सहायता मानते हुए लिखा है कि, "व्यक्ति को स्वयं तथा समाज के उपयोग के लिए स्वयं की क्षमताओं के अधिकतम विकास के प्रयोजन में निरंतर दी जाने वाली सहायता ही निर्देशन है।"


उपर्युक्त परिभाषाओं का गहनता से विश्लेषण करने पर हम पाते हैं कि निर्देशन एक संयुक्त सेवा है, जिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की इस प्रकार सहायता करता है कि वह व्यक्ति अपनी समस्याओं का हल स्वयं कर सके एवं स्वयं के सर्वांगीण विकास हेतु कार्य कर सके। यह एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति अपनी क्षमताओं, रूचियों, अभिवृत्तियों, योग्यताओं का इस प्रकार विकास करता है कि वह अपने आपको वातावरण के साथ समायोजित करता है और जटिल से जटिल परिस्थितियों में निर्णय भी ले सकता है।