शिक्षण विधि का अर्थ - Meaning of Teaching Method
शिक्षण विधि का अर्थ - Meaning of Teaching Method
"योजना नियोजन तथा निर्देशन वह कला अथवा विज्ञान है जिससे वृहत् सेनाओं के कार्य एवं गति संचालित होती है।"
(शब्दकोष)
“शिक्षण योजना पाठ की एक सामान्य योजना है जिसमें संरचना अनुदेशन के उद्देश्यों के संदर्भ में अधिगमकर्ता के वांछित व्यवहार तथा योजना के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक नियोजित युक्तियों की रूपरेखा सम्मिलित होती है। पाठ योजना रचना बृहत् विकास योजना का एक अंग होती है।"
(स्टोन्स एवं मौरिस)
" शिक्षण पद्धति शिक्षक द्वारा संचालित वह क्रिया है जिससे विद्यार्थियों को ज्ञान की प्राप्ति होती है।”
(वैस्ले)
“शिक्षण पद्धति के द्वारा हम पठन सामग्री को व्यवस्थित करके निष्कर्षो को प्राप्त करते है।"
(जॉन ड्युई)
विधि प्रक्रियाओं की वह सुपरिभाषित संरचना है, जिसमें परिस्थितियों की मानको के अनुसार प्रविधियाँ तथा युक्तियाँ निहित होती हैं।"
(थट व गेरबेरिच)
“शिक्षक द्वारा संचालित जिन क्रमबद्ध विधियों के सहारे से छात्रों को ज्ञान की उपलब्धि होती है, उस क्रमबद्ध विधियों को शिक्षण विधि कहते हैं।"
“शिक्षण को प्रभावोत्पादक बनाने वाले साधन को शिक्षण विधि कहते हैं।" “शिक्षा के विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति हेतु बनाई गई नीतियों की शिक्षण योजना को शिक्षण विधि कहते हैं।”
छात्रों के मष्तिष्क, कर्म और भावनाओं के क्षेत्र में अपेक्षित परिवर्तन लाना अध्यापन का उद्देश्य होता है। मन, कर्म, ह्रदय की प्रवृत्तियों से सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास शिक्षा से अपेक्षित है। शिक्षक किसी एक विधि का प्रयोग करके अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सकते। शिक्षक को अपने उद्देश्यों की अधिकतम पूर्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ विधि का चयन करने के लिए सभी अध्यापन विधियों का ज्ञान होना आवश्यक है। साज-सज्जा, उपागम, विषयवस्तु का संगठन, शिक्षक छात्र सम्बन्ध, छात्र-छात्र सम्बन्ध, छात्र सहभागिता, सीखने के सिद्धान्त, विचार की स्वतंत्रता, शिक्षा के लक्ष्य, ज्ञानेन्द्रियों पर आधारित विभिन्न विधियों का निर्माण हुआ है। सामाजिक ज्ञान के अध्यापन की कोई एक सर्वश्रेष्ठ विधि नहीं बताई जा सकती। छात्रों की रुचि, योग्यता, आयु एवं आवश्यकता के अनुसार शिक्षण विधि का चुनाव ही सर्वश्रेष्ठ विधि कहलाती है। विनिंग के अनुसार, “सर्वश्रेष्ठ विधि वही है जो अभिरुचि और प्रयत्न को बढ़ावा दे एवं क्रियाशीलता और अभिक्रमशीलता को विकसित करे, छात्रों के स्वतंत्र चिंतन और निर्णय को उद्दीप्त करे और सहयोग तथा समाजीकरण को स्थापित करे।" ज्ञान वर्धन के लिए भाषण एवं पाठ्यपुस्तक विधि, भावनात्मक विकास के लिए अभिनय और भूमिका निर्वाह विधि, कुशलता और योग्यता के लिए प्रयोगशाला विधि, योजना विधि, सामाजिक अभिव्यक्ति और समस्या विधि उपयुक्त मानी जा सकती है। सामाजिक अध्ययन के शिक्षण में व्यावहारिकरूप से पाठ्यपुस्तक विधि, व्याख्यान विधि, कहानी विधि, नाट्य रूपांतरण विधि, तुलनात्मक विधि आदि महत्वपूर्ण है।
वार्तालाप में शामिल हों