केंद्रीय प्रवृत्तियों का मापन - Measures of Central Tendency
केंद्रीय प्रवृत्तियों का मापन - Measures of Central Tendency
किसी आंकिक श्रृंखला के अंक अपने मूल रूप में निरर्थक रहते हैं। उनको सार्थक बनाने के लिए और उनसे कुछ अर्थ निकालने के लिए उनका औसत (Average) निकालना होता है, तभी उन अंकों का हम अर्थपूर्ण उपयोग कर सकते हैं। विशेषता के प्रतिनिधित्व के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। समस्त अंकों की प्रवृत्ति प्रायः किसी केंद्रीय अंक या मूल्य के चारों ओर केंद्रित होने की होती हैं। इस प्रवृत्ति के माप को ही केंद्रीय प्रवृत्ति का मापन कहते हैं। सामान्य रूप से मनोविज्ञान और शिक्षा में प्रयुक्त केंद्रीय प्रवृत्ति के माप निम्निलिखित तीन प्रकार के होते हैं-
1. मध्यमान
2. मध्यांक
3. बहुलाक
1. मध्यमान (Mean )
किसी समूह के प्राप्ताकों का वह मान जो उन समस्त प्राप्तांको के योग को उन प्राप्ताकों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है, मध्यमान कहलाता है। जैसे पाँच विद्यार्थियों के प्राप्तांक और उनका मध्यमान इस प्रकार है
प्राप्तांक 10.12, 14, 16, 18
मध्यमान 10+12+14+16+ 18 = 70/5 = 14
मध्यमान की गणना (Computation of Mean)
मध्यमान की गणना व्यापाक रूप के दो प्रकार से की जाती है अव्यवस्थित आँकड़ों से मध्यमान की गणना (Computation of Mean from Ungrouped Data) इस विधि का उपयोग छोटे समूह के आँकड़ों के लिए किया जाता है। इसमें आँकड़ो का योग करके समूह की संख्या से भाग दिया जाता है। इस विधि से मध्यमान की गणना का सूत्र निम्निलिखित है
मध्यमान = ΣΧ/N
जहाँ
X = प्राप्तांक
Σ = योग
ΣΧ = प्राप्तांको का योग
N = प्राप्तांकों की संख्या
व्यवस्थित आँकड़ो से मध्यमान की गणना (Computation of Mean from Grouped Data)
जब आँकड़े व्यस्थित हों तब मध्यमान की गणना करने की प्रमुख दो विधियाँ हैं-
लघु विधि (Short Method) दीर्घ विधि (Long Method)
लघु विधि से मध्यमान की गणना (Computation of Mean from Short Method) यह विधि अपेक्षाकृत सरल है तथा समय कम लगता है। इस विधि में एक कल्पित मध्यमान मानकर आँकड़ो के मध्यमान की गणना की जाती है।
लघु विधि द्वारा मध्यमान की गणना निम्निलिखित सूत्र से की जाती है-
सूत्र- मध्यमान (Mean ) = AM + ( Σfx ) i / N
जिसमें AM - कल्पित मध्यमान
Σfx = सभी आवृत्तियों के गुणनफल का योग
N = सभी आवृत्तियों की संख्या
i = वर्गान्तर का आकार
दीर्घ विधि से मध्यमान की गणना (Computation of Mean from Long Method)
इस विधि में प्रत्येक वर्गान्तर का मध्यबिंदु ज्ञात किया जाता है। इसके बाद प्रत्येक वर्गान्तर की आवृत्तियों का उसके मध्यबिंदु से गुणा किया जाता है। गुणनफल का योग करके समूह के सदस्यों की संख्या का भाग देकर मध्यमान की गणना कर ली जाती है।
दीर्घ विधि से मध्यमान की गणना निम्नलिखित सोपानों (steps) द्वारा की जाती है -
प्रथम सोपान - वर्गान्तर के मध्यबिंदुओं को निकालना।
द्वितीय सोपान - प्रत्येक वर्गान्तर के मध्यबिंद का उसकी आवृत्तियों से गुणा करना।
तृतीय सोपान वर्गान्तर और आवृत्तियों के गुणनफल का योग करना ।
चतुर्थ सोपान - गुणनफल के योग में समूह के सदस्यों की संख्या का भाग करना
मध्यमान की गणना किसी भी विधि से की जाए, उत्तर सदैव समान ही प्राप्त होता है। इन दोनों विधियों में अंतर केवल गणना
की कठिनाई और लगने वाले समय का है। जब वर्गान्तर और आवृत्तियों की संख्या बहुत अधिक हो तो लघुविधि से गणना करना बहुत सरल होता है। इसी प्रकार जब मध्य बिंदुओं का मूल्य दशमलव अंकों में हो तब दीर्घ विधि का प्रयोग करना ही अधिक उत्तम और सरल होता है।
(2) मध्यांक (Median)
केंद्रीय प्रवृत्ति का दूसरा माप मध्यांक (Median) है।
मध्यांक की स्थिति किसी क्रमबद्ध आंकिक श्रृंखला में ऐसी होती है कि उस बिंदु के ऊपर तथा नीचे अंको की संख्या समान होती है। अर्थात् कोई भी आंकिक श्रृंखला मध्यांक (Median) के द्वारा दो बराबर भागों में बँट जाती है। अतः मध्यांक किसी आंकिक श्रृंखला का केंद्र बिंदु होता है जिसके ऊपर नीचे समान अंक होते है।
अव्यवस्थित आँकड़ो से मध्यांक की गणना (uting Computation of Median from Ungrouped Data) अव्यवस्थित आँकड़ो से मध्यांक की गणना करने के लिए अंको को आरोही अथवा अवरोही रूप से व्यविस्थत किया जाता हैं। तत्पश्चात उनकी संख्या में जोड़ देते हैं इस योग में 2 का भाग देते हैं। भाग देने पर जो संख्या प्राप्त होती है वह सख्यांक कहलाता है। अव्यवस्थित आँकड़ो से मध्यांक ज्ञात करने के लिए निम्न सूत्र उपयोग में लाया जाता है - yth मध्यांक (Mdn) = (N+1 ) item / 2
जिसमें N = प्राप्तांकों की संख्या
व्यवस्थित आँकडो से मध्यांक की गणना (Computation of Median from Grouped Data)
बड़े समूहों मध्यांक ज्ञात करने के लिए प्राप्तांको को पहले व्यवस्थित कर लिया जाता है। आमतौर से आवृत्ति वितरण तालिका के रूप में प्राप्ताकों को व्यवस्थित किया जाता है। यहाँ भी मध्यांक बिंदु वह है जिसके ऊपर तथा नीचे बराबर बराबर प्राप्तांक होते हैं। व्यवस्थित आँकड़ो से मध्यांक की गणना करने के लिए निम्न सूत्र को प्रयोग में लाया जाता है
मध्यांक (Median) = LL + ( N/2- F ) i / Fm
जिसमें L = उस वर्गान्तर की वास्तविक निम्नतम सीमा जिसमें N/2 पड़ता हो
N /2 = कुल आवृत्तियों का आधा
F = N/2 वाले वर्गान्तर के नीचे वाले वर्गान्तर की संचयी आवृत्तियाँ
fm = N/2 वाले वर्गान्तर की आवृत्तियाँ
i= वर्गान्तर का आकार
(3) बहुलांक (Mode)
प्राप्तांको के समूह में जिस प्राप्तांक की आवृत्ति सबसे अधिक होती है उसे बहुलांक (Mode) कहते हैं अर्थात् बहुलांक वह प्राप्तांक है जो समूह में सबसे अधिक प्रचलित या लोकप्रिय होता है। अर्थात् बहुलांक वह प्राप्तांक है जो समूह में सबसे अधिक विद्यार्थी प्राप्त करते हैं जैसे 7, 9, 6, 8, 9, 7, 9, 5, 4, 8, 9 का बहुलांक 9 है क्योंकि प्राप्तांक 9 की आवृत्ति सबसे अधिक है। बहुलांक को Mo' संकेत से व्यक्त किया जाता है। कभी-कभी दो या अधिक प्राप्ताकों की आवृत्तियाँ अन्य प्राप्तांकों से अधिक किंतु बराबर होती हैं, तब इन सभी प्राप्ताकों को बहुलांक कहते है। जब आकड़ों के लिए दो बहुलांक होते है तब इन आकड़ों को द्वि बहुलांक आँकड़े (Bimodal Data) कहा जाता है। दो या दो से अधिक बहुलांक होने पर आकड़ों को बहु बहुलांकी आँकड़े (Multi Multimodal Data) कहते हैं। जैसे 4, 5, 7, 7, 7, 8, 9, 10, 12, 12, 12, 15 में प्राप्तांक 7 व 12 की आवृत्तियाँ अन्य प्राप्ताकों से अधिक परंतु बराबर है। अत: ये दोनों प्राप्तांक ही बहुलांक कहलायेंगें तथा इन आँकड़ो को द्विबहुलांकी आँकड़े कहा जाएगा।
व्यवस्थित आँकड़ो से बहुलांक की गणना (Computingutation mof Mode from Grouped Data)
जब आवृत्ति वितरण लगभग सममित (symmetrical) होता है तब मध्यमान (M) तथा मध्यांक (Md ) की सहायता से निम्न सूत्र के द्वारा बहुलांक का मान ज्ञात करना अधिक श्रेष्ठ माना जाता है।
Mo 3 Md -2M
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