तरलता में सुधार के उपाय - Measures to improve liquidity
तरलता में सुधार के उपाय - Measures to improve liquidity
प्रत्येक फर्म के लिये यह आवश्यक है कि उसमें कोषों की तरलता बनी रहे। यदि तरलता संबंधी समस्यायें बढ़ रही हो तो उसमें सुधार के लिये निम्न उपाय अपनाये जा सकते हैं -
1) फर्म को विक्रय वृद्धि के प्रयास करने चाहिए, जिससे वह विक्रय से प्राप्त होने वाले आगमों या आयों में पर्याप्त वृद्धि करें। इसके लिये विभिन्न उपायों को अपनाकर बिक्री को बढ़ाना होगा। आवश्यकतानुसार या परिस्थिति को देखते हुए फर्म को मूल्य में कमी करके, कम लाभ - उपात पर ही बिक्री करनी चाहिए। कम लाभ पर यदि बिक्री का आवर्त बढ़ता है तो उससे भी लाभ में वृद्धि होती है।
2) तरलता लाने के लिये यह आवश्यक है कि स्टॉक के आवर्त में पर्याप्त वृद्धि की जाये। यदि साल में स्टॉक का आवर्त 5 है तो उसे 7 या 10 गुना तक करने का प्रयास करना चाहिए। इससे फर्म की तरलता बढ़ेगी।
3) उचित साख प्रबधन करके भी तरलता बढ़ाई जा सकती है। इसके लिये लेनदारों से अधिक समय के लिये उधार लिया जाये तथा भुगतान में देरी की जाये, तो उससे तरलता बढ़ेगी।
4) उसी प्रकार से देनदारों को कम अवधि का साख प्रदान किया जाए तथा उनसे वसूली का कुशल प्रबंधन करके भी तरलता को बढ़ाया जा सकता है।
5) ऐसी संपत्तियों को जिन्हें कई वर्षों पूर्व क्रय किया गया हो और जो अब बहुत उपयोगी न रह गयी हो, बेचकर भी तरलता को बढ़ाया जा सकता है।
6) ऋणों के भुगतान की अवधि बढ़ाई जा सकती है जिससे तरलता पर विपरीत प्रभाव न पड़े।
7) उसी प्रकार से लाभाश के भुगतान के लिये भी उदार नीति न अपनाकर तरलता बढ़ाई जा सकती है।
8) स्थायी संपत्तियों के क्रय को कुछ समय के लिये स्थगित करके भी तरलता बढ़ाई जा सकती हैं।
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