मध्ययुगीन शिक्षा , मध्ययुगीन काल में शिक्षा के उद्देश्य - Medieval Education, Objectives of Education in Medieval Period

मध्ययुगीन शिक्षा , मध्ययुगीन काल में शिक्षा के उद्देश्य - Medieval Education, Objectives of Education in Medieval Period


भारत सान की चिडिया कहलाने वाला देश था इसीलिए भारतवर्ष पर सबसे अधिक विदेशी आक्रमण हुए है। भारत पर वस्तुतः मुस्लिम लुटेरा ने सबसे अधिक आक्रमण किए। भारत पर मुसलमानी शासन का विशेष प्रभाव सन् १९९२ से लगातार १५०८ तक रहा। मुस्लिम शासक भारतीय संस्कृति की जगह मुस्लिम संस्कृति का प्रतिष्ठित करने की भी काशिश करते रहे। भारत का प्रथम मुस्लिम शासक मुहम्मद गौरी ने पाठशालाओं को खत्म कर वहाँ मकतब एवं मदरस बनवाए। बाद में कुतुबद्दीन ने विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय का नष्ट भ्रष्ट कर दिया फिर भी मुगलकाल मध्यकालीन शिक्षा का स्वर्णकाल कहलाता है। इस काल में कला, संगीत, न्याय, कृषि, चिकित्सा, शिल्पकला आदि के क्षेत्र में प्रगति हुई है।


मध्ययुगीन काल में शिक्षा के उद्देश्य


1) धर्म का प्रचार


(2) इस्लामी नैतिकता का विस्तार


(3) ज्ञान का प्रसार


(4) मुस्लिम संस्कृति का प्रसार


(5) इस्लामी नैतिकता की प्रतिस्थापना


6) धन, यश के साथ उंच आहद पाना


(7) राजनीतिक व्यवस्था का प्रचार


8) कला कौशल्य का प्रचार


9) धर्म प्रेरणा


10) सांसारिक सुख की प्राप्ति


11) राजनीतिक शिक्षा


1) धर्म का प्रचार:- मध्ययुगीन काल में धर्म का प्रचार करना महत्वपूर्ण उददेश्य था। इसके लिए मुस्लिम शासका मकसद के साथ मकतब या मदरसे खोले।


2) इस्लामी नैतिकता का विस्तार:- भारत में मुसलमाना ने शिक्षा के दवारा एक विशेष सामाजिक एवं लौकिक नीति का प्रचार किया


3) ज्ञान का प्रसार:- मुस्लिम शिक्षा का उद्देश्य जनता के बीच ज्ञान का प्रकाश फैलाना भी था। 


4) मुस्लिम संस्कृति का प्रसार:- मुस्लिम संस्कृति का प्रसार करना भी मुस्लिम शिक्षा का उददेश था। शिक्षा ही एक माध्यम था जिसक व्दारा मुस्लिम सिद्धान्तों, कानून, सामाजिक परंपराओं तथा प्रथाओं का ज्ञान भारतीय मुसलमानों का कराया जा सकता था।


5) इस्लामी नैतिकता की प्रतिस्थापना:- मुसलमानां क नैतिक तथा चारित्रिक प्रतिमान हिन्दुओं से भिन्न व इसीलिए इस्लामी नैतिकता को प्रतिस्थापना करने के कार्य शिक्षा में विशेष रूप से सहायता ली जा सकती थी।


6) धन, यश के साथ ऊँचे ओहदे पाना:- शिक्षा में विशेष श्रेणी प्राप्त करनेवालों को उँच पद दिये जाते थे। 


7) राजनीतिक व्यवस्था का प्रचार:- भारत की उच्च राजनीतिक व्यवस्था को नष्ट कर अपनी राजनीतिक व्यवस्था का प्रसार एवं प्रचार किया।


8) कला कौशल का प्रचार:- मुस्लिम शिक्षा व्दारा इस्लामी कला कौशल का भी प्रचार किया गया।


9 ) धर्मप्रेरणा:- मुसलमाना का प्रेरणा देकर पूर्णतया धर्मपरायण बनाना यह मुस्लिम शिक्षा का एक उद्देश्य था। इस उद्देश्य में ही मकतब तथा मदरसा की स्थापना मस्जिदों से जाकर की जाती थी।


10 ) सांसारिक सुख की प्राप्ति:- शिवा प्राप्त व्यक्तियों का मुसलमान साक काजी, वजौर तथा सिपहसालार आदि पद पर नियुक्त करते थे। इस प्रकार मध्ययुग में सांसारिक वैभव को प्राप्ति करना भी मुस्लिम शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य था।


11) राजनीतिक शिक्षा:- मुस्लिम शिक्षा का अन्तिम उद्देश्य देश में राजनितिक स्थिरता उत्पन्न करना था। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मुस्लिम शिक्षा का प्रसार करना परम आवश्यक था।