स्मृति , स्मृति के प्रकार- memory, type of memory
स्मृति , स्मृति के प्रकार - memory, type of memory
स्मृति से तात्पर्य पूर्व अनुभूतियों को मस्तिष्क में इकट्ठा कर रखने की क्षमता होती है। संज्ञानात्मक, में मनोवैज्ञानिकों जैसे- लेहमैन, लेहमैन एवं बटरीफील्ड ने स्मृति को परिभाषित करते हुए कहा है कि विशेष समयावधि के लिए सूचनाओं को संपोषित करके रखना ही स्मृति है। भाषा, दृष्टि, श्रवण, प्रत्यक्षीकरण, अधिगम तथा ध्यान की तरह स्मृति भी मस्तिष्क की एक प्रमुख बौद्धिक क्षमता है। हमारे मस्तिष्क में जो कुछ भी अनुभव, सूचना और ज्ञान के रूप में संग्रहित हैं वह सभी स्मृति के ही विविध रूपों में व्यवस्थित रहता है।
वुडबर्थ के अनुसार जो बात पहले सीखी जा चुकी है, उसे स्मरण रखना ही स्मृति है। रायबर्न के अनुसार अपने अनुभवों को संचित रखने और उनको प्राप्त करने के कुछ समय बाद चेतना के क्षेत्र में पुनः लाने की जो शक्ति हममें होती है उसी को स्मृति कहते हैं।
स्मृति की प्रकृति
स्मृति किसी भी व्यक्ति का प्रमुख अंग होता है। स्मृति व्यक्ति के सीखने की प्रथम इकाई कही जाती है। स्मृति मानव मस्तिष्क में संचित ज्ञानराशि का वह कोश है, जो हमारे मस्तिष्क में पूर्ण ज्ञान, अनुभूतियों, सूचना, अनुभव, घटना, भाषा इत्यादि तथ्यों को मस्तिष्क में इकट्ठा करने की क्षमता रखती है।
स्मृति हमारी याद करने की क्षमता है, स्मृति के सहारे ही व्यक्ति अपने अनुभव, ज्ञान, विज्ञान, घटना आदि तथ्यों को दूसरे व्यक्ति तक संप्रेषित करता है। स्मृति की प्रकृति निम्न है:
● स्मृति अनुभूतियों को एकत्रित करके रखती है।
● स्मृति का धनात्मक पक्ष तथा ऋणात्मक पक्ष होता है।
● जो बात पहले सीखी जा चुकी है, उसे स्मरण रखती है।
● अनुभवों को संचित रखने और उनको प्राप्त करने कुछ समय बाद चेतना के क्षेत्र में पुनः लाने की शक्ति होती।
स्मृति के प्रकार
मनोवैज्ञानिकों ने स्मृति के कई प्रकार बताए हैं। 1968 में एटकिंसन तथा सिफ्रिन ने स्मृति की बहुस्तरीय संग्रह की व्याख्या प्रस्तुत की। इनके अनुसार स्मृति के तीन प्रकार होते हैं- सांवेगिक स्मृति, अल्पकालिक स्मृति और दीर्घकालिक स्मृति।
1. सांवेगिक
हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ किसी भी सूचना को वातावरण से ग्रहण करके उसे मस्तिष्क तक पहुंचाने का कार्य करती हैं। बाद में उस सूचना के आधार पर मस्तिष्क द्वारा एक निष्कर्ष निकाला जाता है। हम देखने, सुनने या त्वचा द्वारा सीत या गर्मी की अनुभूति का उदाहरण ले सकते हैं। कोई भी वातावरणीय उद्दीपन जैसे प्रकाश या ध्वनि सबसे पहले अपने सम्बन्धित ज्ञानेन्द्रिय में बहुत ही कम समय के लिए कूटबद्ध रूप में संग्रहित होता है। यह संग्रहण अत्यल्प समय के लिए होता है। दृष्टि के लिए इसका सीमा 0.5 सेंकंड और श्रवण के लिए इसकी समय सीमा 2 सेकंड के आसपास होती है। इस समय सीमा के पश्चात् इस संग्रहित स्मृति का क्षय हो जाता है। ऐद्रिक स्तर पर सूचनाएँ अभी प्रारंभिक होती हें और इनसे कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सकते। इनका मस्तिष्क द्वारा संयोजन तथा परिमार्जन अभी बाकी होता है।
2. अल्पकालिक
ज्ञानेन्द्रियों द्वारा प्राप्त सूचनाएँ जब हमारे ध्यान में आती हैं तो वे अल्पकालीन स्मृति का भाग बनती हैं। यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि संवेदी स्तर की वे सभी सूचनाएँ जिन पर हम ध्यान देते हैं वे समाप्त हो जाती हैं। केवल वही सूचनाएँ जिन पर हम एकाग्र होते हैं वे अल्पकालीन स्मृति ‘स्मृतियाँ बनती हैं।
अल्पकालीन स्मृति को क्रियात्मक स्मृति भी कहा जाता है। इस प्रकार की स्मृति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हमारे द्वारा कोई फोन नम्बर याद करना है। जब हम किसी नम्बर को देखकर उसे डायल करते हैं तो दो बातें होती हैं। सबसे पहले हम नंबर को देखते हैं और उसे कुछ एक बार दोहरा के याद करते हैं फिर नम्बर डायल करने के बाद सामान्यतः उसे भूल जाते हैं।
2. दीर्घकालिक स्मृति
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि दीर्घकालीन स्मृतियाँ स्थायी होती हैं। हम इस स्मृति का उपयोग बहुत तरीकों से करते हैं। आज सुबह हमने नाश्ते में क्या खाया, परसों हमारे घर कौन-कौन मिलने आये थे, उन लोगों ने कौन से कपड़े पहन रखे थे, हमने अपना पिछला जन्मदिन कहाँ और कैसे मनाया था, हम साईकिल कैसे चला लेते हैं, से लेकर वर्ग पहेली हल करने तक इन सारी गतिविधियों में हमारी यह स्मृति हमारा साथ देती है। इसी प्रकार की स्मृति सबसे अधिक विविध होती है और हमारी भावनाओं, अनुभवों तथा ज्ञान इत्यादि इन सभी रूपों में परिलक्षित होती है। अल्पकालीन स्मृति की सूचनाएँ बार-बार दोहराई जाने के बाद दीर्घकालीन स्मृति बन जाती है। इस स्मृति का क्षय नहीं होता, लेकिन इसमें परिवर्तन हो सकता है।
घटनाओं तथा अनुभूतियों के आधार पर टूलविंग ने दीर्घ अवधि स्मृति को दो प्रकार में विभाजित किया है:
प्रासंगिक स्मृति:- इसमें वैसी व्यक्तिगत स्मृति है, जो व्यक्तिगत रूप से अनुभूतियाँ तथा घटनाएँ घटती हैं और हम स्मरण करते हैं कि कब घटा कैसे घटा इत्यादि । जीवन में घटने वाली घटनाएँ जो हमारे मस्तिष्क में संचित रहता है, प्रासंगिक स्मृति कहलाता है। इस तरह की स्मृति बचपन की यादों को ज्यादा संचित करती है।
अर्थगत स्मृतिः- इस स्मृति में व्यक्ति शब्दों, संप्रत्यय तथा किसी तथ्य के अर्थ को संचित करके अपने मन मस्तिष्क में रखता है। सामान्य ज्ञान सूचनाओं को मस्तिष्क में संचित करना इसका उदाहरण है।
3. कार्यात्मक स्मृति (वर्किंग मेमोरी)
कार्यात्मक स्मृति को चलन स्मृति के नाम से भी जाना जाता है।
चलन स्मृति का प्रतिपादन बेड़ेली द्वारा किया गया था। चलन स्मृति में सूचनाओं को 25-30 सेकंड तक ही संचित किया जाता है तथा उस सूचनाओं को संसाधित भी किया जाता हैं अतः चलन स्मृति उस स्मृति को कहते हैं, जिसमें सूचनाओं का संचयन के साथ-साथ सूचनाओं को संसाधित भी किया जाता है। सूचनाओं का संचयन और संसाधित दोनों प्रक्रिया इस स्मृति में होती है। जब संख्या को देखकर 25-30 सेकण्ड तक याद करते हैं तो लघु स्मृति होगा, परन्तु उसी संख्या को विभिन्न भागों में बांट कर याद करते हैं तो उस प्रक्रिया को चलन स्मृति कहा जाता है। चलन स्मृति, स्मरण के साथ-साथ सूचनाओं को संसाधित करता है। चलन स्मृति के तीन तत्व होते हैं।
1. ध्वनिग्रामीय लूप :- स्मृति के इस तथ्य में सूचनाएँ थोड़ी देर के लिए संचित होती है। इनके दो तत्व होते हैं, ध्वनिकोड तथा रिहर्सल जो व्यक्ति स्मरण दिलाती है।
ध्वनि कोड तथ्यों का कुछ सेकंड में क्षीण हो जाता है तथा रिहर्सल संचित सूचनाओं को दोहराता है। इसे ही ध्वनिग्रामीय लूप स्मृति क्षमता कहते हैं।
2. दृष्टि-स्थानिक स्केच पैड:- यह चलन स्मृति का महत्वपूर्ण अंग है इस स्मृति के द्वारा तत्व दृष्टि तथा स्थानिक सूचनाओं को संसाधित करता है। इसमें वस्तु के रंग, आकार तथा स्थान तथा वो कहाँ उपस्थित है का संसाधन होता है। ध्वनि ग्रामीण लूप तथा दृष्टि स्थानिक स्केच पैड दोनों स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। इसमें संख्या का रिहर्सल तथा स्थानिक व्यवस्था होता है।
3. केन्द्रीय कार्यपालक :- केन्द्रीय कार्यपालक चलन स्मृति का तीसरा तत्व है यह स्मृति ध्वनिग्रामीय लूप तथा दृष्टि स्थानिक पैड की सूचनाओं समन्वित करता है बल्कि दीर्घकालीन स्मृति की सूचनाओं की भी समन्वित करता है। इस स्मृति के द्वारा सूचनाओं को संग्रहित तथा नियोजित और संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी समस्या का समाधान करने के समय विभिन्न प्रकार के उपायों का सृजन भी करता है। समाधान तथा सूचनाओं का उपयोग करता है। चलन स्मृति के तीनों तत्व क्षमता सीमित होती है।
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