पुनर्भुगतान विधि के गुण - Merits, Criticisms of Repayment Method
पुनर्भुगतान विधि के गुण, आलोचना -Merits, Criticisms of Repayment Method
इस विधि के निम्नलिखित गुण है-
क. इसकी गणना तथहा समझा बड़ा ही सरल है इसीलिये यह पद्धति निगम प्रबंधकों, यहाँ तक कि सोवियत नियोजनकों, जो इसे वसूली विधि कहते हैं, में बहुत लोकप्रिय है।
ख. अन्य परिष्कृत विधियों, जिनमें विश्लेषण के समय सगणकों के उपयोग में पर्याप्त लागत आती है, अतः उसकी तुलना में यह कम लागतशील विधि है।
ग. रोकड़ कमी वाली संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
घ. ऐसे जिनमें तकनीकी प्रगति बड़ी तेजी से होती है, में मशीनों के अप्रचलन का भय अधिक रहता है। अत: वहाँ उन्हीं परियोजनाओं को चुना जाता है, जिनकी अदायगी अवधि कम से कम हो।
च. तरला के मापन के अतिरिक्त, अदायगी, अवधि विधि कुछ दशाआओं में गणना करने में भी सहायता प्रदान करती है। जैसे- आंतरिक प्रत्याय दर के लिये अदायगी अवधि सन्निकटन का अच्छा मान है अन्यथा 'भूल एवं जाँच' विधि को अपनाना पड़ता है। इसे आगे समझाया गया है।
पुनर्भुगतान विधि की आलोचना
इस विधि की आलोचना निम्नलिखित बिंदुओं पर की जाती है-
क. यह विधि परियोजना की लाभदायकता का मूल्यांकन नहीं करती और न ही परियोजना में लागत की वसूली पर ही बल देती है।
ख. अदायगी अवधि के बाद वाले रोकड़ अंतरप्रवाहों की उपेक्षा इस विधि के अंतर्गत परियोजना के संपूर्ण रोकड़ अंतरप्रवाहों पर विचार नहीं किया जाता अर्थात अदायगी अवधि के पश्चात् के रोकड़ अतंर्वाहों को छोड़ दिया जाता है।
ग.
एम.बी.ए
रोकड़ अंतरप्रवाहों के आकार एवं समय की उपेखा इस विधि में विभिन्न समय एवं विभिन्न मात्राओं में प्राप्त रोकड़ अंतवाहों में कोई अंतर नहीं किया जाता अर्थात यदि एक परियोजना प्रारंभ के वर्षों में अधिक व अंतिम वर्षो में कम तथा दूसरी परियोजना प्रारंभ में कम तथा अंत में अधिक रोकड़ अर्जित करती हैं
तो कम अदायगी अवधि के आधार पर निर्णय अलाभकारी हो सकती है।
घ. रोकड़ लागत की उपेक्षा करती है।
च. पूँजी लागत की उपेक्षा है।
इस विधि प्रबंध के लिए एक न्यूनतम स्वीकृत योग्य अदायगी अवधि, जिसके आधार पर किसी परियोजना को स्वीकृत करने का निर्णय लिया जा सके। जिसका निर्धारण कठिन है।
• पुनर्भुगातन विधि की एक प्रमुख आलोचना इस आधार पर की जाती है कि इसमें पुनर्भुगतान अवधि के पश्चात् परियोजना की आवश्यकता नहीं देखी जाती है। इस दोष को दूर करने के लिए यह सुझाव दिया जाता है कि पुनर्भुगतान अवधि के पश्चात् परियोजना से पुनर्भुगतान अवधि के पश्चात् सर्वाधिक आय प्राप्त हो उसे श्रेष्ठ विनियोग मान कर लिया जाए।
• पुनर्भुगतान अवधि विधि के अंतर्गत न तो समय कारक पर ध्यान दिया जाता है और न ही विनियोग पर, प्रत्याय दर गणना की जाती है। इन दोनों कमियों को पुनर्भुगतान अवधि व्युत्क्रमों की गणना करके दूर किया जा सकता है।
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