औपर्यावरण शिक्षा के तरीके एवं उपागम - Methods and Approaches to Environmental Education

  औपर्यावरण शिक्षा के तरीके एवं उपागम - Methods and Approaches to Environmental Education


पर्यावरण शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति औपचरिक तथा अनौपचारिक शिक्षा से की जा सकती है। इसकी प्रकृति अंतरानुशासनीय अधिक है। इसके सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक दोनों ही पक्ष होते है। इसलिए शिक्षण विधियों का क्षेत्र अधिक व्यापक है। इसके उद्देश्यों में भी निरन्तरता होती है इसलिए शिक्षण विधियाँ प्राथमिक स्तर से उच्च शिक्षा के स्तर तक प्रयुक्त की जाती हैं शिक्षक की भूमिका भी 'पर्यावरण शिक्षा' से अधिक महत्वपूर्ण तथा व्यापक होती है। शिक्षण विधियों तथा प्रविधियों के लिए अधोलिखित तथ्यों को ध्यान में रखा गया है।


• पर्यावरण शिक्षा के उद्देश्य, ज्ञान, बोध, कौशल, अभिवृत्ति तथा मूल्य,


• पर्यावरण शिक्षा के लिए औपचारिक तथा अनौपचरिक अभिक्रम,


• पर्यावरण शिक्षा के अंतरानुशासनीय आयाम,


• पर्यावरण शिक्षा के उद्देश्यों तथा पाठ्यक्रम में निरन्तरता, प्राथमिक शिक्षा के स्तर से उच्च शिक्षा के स्तर तक 


• पर्यावरण शिक्षा में शिक्षक की भूमिका, तथा 


• पर्यावरण शिक्षा के सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक दोनों पक्षों का होना।


'पर्यावरण शिक्षा' का आयोजन दो अवस्थाओं में किया जाता है-


• औपचारिक पर्यावरण शिक्षा


• अनौपचारिक पर्यावरण शिक्षा