पर्यावरण शिक्षा को प्रभावशाली बनाने के लिए तरीके एवं रणनीतियाँ - Methods and Strategies to Make Environmental Education Effective

पर्यावरण शिक्षा को प्रभावशाली बनाने के लिए तरीके एवं रणनीतियाँ - Methods and Strategies to Make Environmental Education Effective


पर्यावरण विकास के सर्वाधिक महत्वपूर्ण आधार स्तम्भों में से एक है। सामाजिक आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण परस्पर निर्भर प्रक्रियाएँ है। समय-समय पर आयोजित पर्यावरण से संबंधित सम्मेलन और संगोष्ठियाँ मानव जाति का ध्यान पर्यावरण-क्षरण से उत्पन्न खतरों की ओर आकर्षित करते रहे हैं। आज विश्वभर में पर्यावरण में मानवीय हस्तक्षेप एक मुख्य मुद्दा हो गया है। मनुष्य ने अपनी निरन्तर वृद्धिशील अपेक्षाओं को पूरा करने हेतु बिना सोचे समझे विभिन्न प्राकृतिक घटकों के नाजुक संतुलन के साथ छेड़छाड़ की है। वैश्वीकरण के इस युग में एक देश के पर्यावरण में ह्रास अन्य देशों को भी प्रभावित करता है। अतः इस समस्या के समाधान पर एक विहंगम दृष्टि डालने की आवश्यकता है। अवांछित वैश्विक कचरे के कारण विकासशील देशों को दीर्घकालीन नुकसान हो रहा है।

भौतिक वातावरण के साथ सामाजिक सांस्कृतिक वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है। इस संदर्भ में जन जागरूकता एवं जन प्रयास बढ़ाने हेतु सुनियोजित पर्यावरण शिक्षा की अनिवार्य आवश्यकता है । पर्यावरण शिक्षा के अन्तर्गत अपने वातावरण के बारे में जागरूकता अर्जित करना है तथा भावी पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप से कार्य करना है। वस्तुतः पर्यावरण शिक्षा, पर्यावरण द्वारा पर्यावरण से संबंधित तथा पर्यावरण के लिए शिक्षा है। यह शिक्षा की शैली तथा विषय वस्तु दोनों है। शैली का तात्पर्य पर्यावरण के शिक्षण अधिगम की सामग्री तथा शिक्षा के एक उपागम के रूप में प्रयुक्त करना । विषयवस्तु का तात्पर्य- पर्यावरण के घटकों एवं अंगों के बारे में शिक्षण इसके अन्तर्गत पर्यावरण नियंत्रण एवं संतुलन अर्थात् संसाधनों का उपयुक्त उपयोग तथा नियंत्रण शामिल है ताकि पर्यावरण सबके लिए उपयोगी एवं आनंददायक हो सके। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कहा गया है "पर्यावरण संरक्षण एक मूल्य है जिसे अन्य मूल्यों के साथ शिक्षा के सभी स्तरों पर पाठ्यक्रम के एक अभिन्न अंग के रूप में शामिल होना चाहिए ।"


विषय या अवधारणा का संरचनात्मक निरूपण शिक्षण कहलाता है। किसी पठन पाठन में इसकी भूमिका अहम होती है क्योंकि शिक्षण के उद्देश्य प्राप्ति के लिए शिक्षण विधा को समझना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए हम कह सकते है कि शिक्षण विधा की जानकारी कौशल का हस्तांतरण भाग है। शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षक विभिन्न विधाओं का प्रयोग करते है। इसके अन्तर्गत प्राचीन व्याख्यान विधि, वर्तमान समस्या निवारण, खोज, निर्देश, स्लाइड, टेप विधि इत्यादि सम्मिलित है, कुछ विषयों को पढ़ाने के लिए ये अति प्रभावी है। उदाहरण विज्ञान की अवधारणाओं को समझाने के लिए प्राचीन तरीको से अधिक प्रभावी प्रतिदर्श एवं प्रयोगों में सर्वेक्षण, प्रोजेक्ट, क्षेत्र भ्रमण, खेल, परिचर्चा, प्रयोगात्मक खोज इत्यादि प्रभावी है। इनसे केवल पठन पाठन में सीखने वालों की सहभागिता ही नहीं बढ़ती वरन जानकारी संग्रहण एवं विभिन्न परिस्थितियों में उनके स्थानान्तरण में भी मदद मिलती है। पर्यावरण शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए कुछ विशेष विधाओं का उपयोग किया जाना चाहिए जैसे सर्वेक्षण, परियोजना, परिचर्चा, समस्या निवारण विधा, केस अध्ययन, ब्रेन स्टोर्मिंग विधा, पर्यावरण क्लब, क्षेत्र भ्रमण, खेल एवं रोल प्ले इत्यादि ।


1. क्षेत्र भ्रमण - इस विधि में हम विद्यार्थियों को विद्यालय परिसर से बाहर या किसी बगीचे में ले जा सकते हैं और उन्हें भ्रमण के दौरान विभिन्न वस्तुओं का अवलोकन करने को कहते है। विद्यार्थियों को सर्वेक्षण के लिए विषय देना चाहिए जो कि विज्ञान या सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों से हो सकता है।


2. परिचर्चा - परिचर्चा के माध्यम से छात्रों में विश्लेषण एवं सम्प्रेषण कला का विकास होता है। पर्यावरण विषय पर सुनियोजित परिचर्चा के आयोजन से पर्यावरण के प्रति सकारात्मक रुख का विकास होता है एवं मूल्य स्पष्टीकरण में मदद मिलती है। परिचर्चा को अन्य विधाओं जैसे व्याख्यान, प्रदर्शनी, परियोजना, सर्वेक्षण या क्षेत्र भ्रमण के साथ करने पर और भी प्रभावी हो जाता है। सुनियोजित परिचर्चा में किसी विषय / मुद्दे पर विभिन्न सदस्यों द्वारा अपना पक्ष रखा जाता है एवं संचालक परिचर्चा से उभरे बिन्दुओं को व्यवस्थित ढंग से एकत्र करता है। ते मैत्री


3. रोल प्ले ( भूमिका अभिनय) - यह एक संरचनात्मक गतिविधि है जो वास्तविक जीवन की घटनाओं से संबंधित है। यह बहुआयामी मुद्दों के लिए जिन पर भिन्न-भिन्न मत होते है, एक सार्थक ढंग है। रोल प्ले के द्वारा बच्चे पर्यावरणीय समस्या को कई ढंग से देख सकते हैं। पर्यावरणीय जागरुकता एवं चेतना को बढ़ावा मिलता है। पर्यावरण शिक्षा के उद्देश्यों को संलग्न करता है। रचनात्मक गुणों का विकास होता है एवं बढ़ावा मिलता है। कक्षा में रोल प्ले का आयोजन हम निम्न प्रकार से कर सकते है।


• पर्यावरणीय समस्या या मुद्दे पर प्रतिभागियों से परिचर्चा करें एवं इसके कारण एवं प्रभावों पर प्रकाश डाले ।


• इसमें उपयोगी चरित्रों की पहचान करें।


• चरित्रों की पहचान के आधार पर प्रतिभागियों का चयन करें।


• चुने हुए प्रतिभागियों को चरित्र कार्ड एवं उनके रोल दे।


• प्रतिभागियों को वर्णन समझने एवं उसके अनुसार संवाद बनाने के लिए पर्याप्त समय दें।


• समय निश्चित करके रोल प्ले करवाएं। 


• रोल प्ले से उत्पन्न बिन्दुओं पर परिचर्चा करें एवं मुद्दे पर विभिन्न आयामों पर प्रतिभागियों की मदद करें।


• उदाहरण जनसंख्या वृद्धि के नुकसान जंगल में आग ।


4. समस्या निवारण - विधा जैसे कि शीर्षक दर्शाता है इस विधा में प्रतिभागी किसी समस्या का समाधान ढूंढते है। यह एक शिक्षण पहल है जो किसी पर्यावरणीय समस्या पर केन्द्रित होती है। किसी समस्या को इसके अवधारणा एवं नियमों सहित खोजा जाता है । समस्या के विभिन्न पहलुओं / आयामों पर परिचर्चा कर इसका समाधान ढूंढ़ा जाता है। प्रतिभागी इन समाधानों में से सर्वोत्तम समाधान का चयन करते हैं।