आधुनिक अवधारणा - modern concept
आधुनिक अवधारणा - modern concept
बदलते व्यावसायिक वातावरण में कमजोर सैद्धान्तिक आधार वाली एक तरफ वित्त प्रणाली पर जोर देने वाली परम्परागत विचारधारा का महत्व समाप्त हो गया है। वर्तमान स्थिती में वित्तीय कार्य, व्यावसायिक प्रबंध का महत्वपूर्ण अंग तो है ही साथ में व्यावसाय के सुचारू संचालन एवं उसके उद्देशों को हासिल करने में वित्तीय कार्य की बहू आयामी आधारभुत भूमिका है। आधूनिक काल में वित्त कार्य की सर्पक व्याख्या करने वाले विभिन्न विद्वानों के अनुसार वित्त कार्य का संबंध निम्ननांकित कार्य से आता है।
1. व्यावसाय की वित्तीय माग अनुमानित कर उसका वित्तीय नियोजन करना।
2. विभिन्न स्त्रोतों से पूंजी प्राप्त करना।
3. पूंजी का परिणाम कारक अनुकुल उपयोग करना।
उपरोक्त के अनुसार वित्त कार्य का अन्य कार्यों के साथ संबंध को देखते हुए यह स्पष्ट होता है की, व्यावसाय के विकास के लिए निर्माण किए गए वित्त का उचित उपयोग करने हेतु व्यावसायिक को विनियोग संबंधी निर्णय लेने, वित्त स्वरूप के मामलों पर निर्णय लेने एवं लाभाश के संबंध में उचित निर्णय लेने इत्यादी तिन निर्णय लेना आवश्यक होता है। वित्त कार्य के उद्देशों में निवेषकर्ता के व्यक्तिगत उद्देशों एवं हित संबंध तथा व्यावसाय के उद्देश एवं हित संबंध इसमें समन्वय प्रस्थापित करना यह मुख्य उद्देश है। आधूनिक विचारधारा के अनुसार वित्त कार्य में वित्त पूर्वानुमान, वित्तीय नियोजन एवं वित्तीय संगठन इन कार्यों के साथ वित्तीय विश्लेषण, वित्तीय नियन्त्रण तथा वित्तीय नितीया एवं योजनाओं का मूल्यमापन इत्यादी कार्यों को भी सम्मिलित किया गया है।
एक सुदृढ़ व्यावसाय के विकास तकनिकी सुधारों विस्तृत विपणन, विभिन्न गतिविधियों तथा स्वस्थ प्रतियोगीता में व्यावसाय को निरन्तर स्थिर रखने के लिए वित्त कार्य अब एक प्रशासनिक प्रक्रिया का रूप ले चुका है।
अतः वित्त कार्य से आशय किसी भी व्यावसायीक संस्थात के लिए आवश्यक माग के अनुसार वित्त प्राप्ती की व्यवस्था करने से है। लेकिन यह परंपरागत विचारधारा है। वर्तमान में वित्त कार्य से आशय, व्यावसाय के लिए न सिर्फ आवश्यक मांग के अनुसार वित्त की व्यवस्था करना ही नहीं तो यह भी देखना है कि प्राप्त वित्त का उचित एवं प्रभावपूर्ण उपयोग हो रहा है की नहीं इसे आधूनिक विचारधारो कहते हैं।
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