अंबेडकर के सन्दर्भ में आधुनिक मूल्य जैसे समानता - Modern values like equality in the context of Ambedkar

अंबेडकर के सन्दर्भ में आधुनिक मूल्य जैसे समानता - Modern values like equality in the context of Ambedkar


डॉ० भीमराव रामजी अंबेडकर एक विश्व स्तर के विधिवेत्ता थे। वे एक बहुजन राजनीतिक नेता और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी होने के साथ साथ, भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार भी थे। वे बाबासाहेब के नाम से लोकप्रिय हैं। बाबासाहेब अंबेडकर के जीवन व दर्शन में स्पष्ट रूप से समानता व आधुनिकता का समावेश झलकता है, उनके विचारों में समानता के प्रमुख तत्त्व इस प्रकार हैं - अंबेडकर समता के सिद्धांत को वैचारिक एवं व्यावहारिक दोनों रूपों में महत्व देते थे। उन्होंने यह माना कि सब मनुष्य समान पैदा नहीं होते, परन्तु उन्होंने प्रश्न किया कि क्या सभी मनुष्यों के साथ इसलिए असमानता का व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि वे असमान जन्मे हैं। अम्बेडकर ने स्पष्ट किया कि 'जहां तक व्यक्तिगत प्रयत्नों का संबंध है, उनको भिन्न अथवा असमान माना जा सकता है, किन्तु लोगों को अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा एवं शक्ति को प्रदर्शित करने का अवसर तो दिया जाना चाहिए ताकि वे अपने को प्रगतिशील बनालें और समाज में कुछ योगदान कर सके।

यदि व्यक्तियों को असमान ही समझकर व्यवहार किया जाए, तो उनकी द अकल्पनीय हो जाएगी। डॉ. अम्बेडकर के अनुसार यदि ऐसा ही ठीक समझा जाए, तो जिन व्यक्तियों के पक्ष में जन्म, धन, शिक्षा, परिवार, नाम एवं व्यावसायिक संबंध हैं, वे ही लोग मानव दौड़ में प्रथम आएंगे। उन्हीं को अवसर प्राप्त होंगे। परन्तु यह एक कृत्रिम चुनाव होगा जिसका आधार विशेष प्रतिष्ठा होगी न कि योग्यता डॉ. अम्बेडकर की दृष्टि में चुनाव हमेशा योग्यता के अधार पर ही होना चाहिए, अन्यथा सामाजिक प्रजातंत्र एवं मानवतावाद के प्रति घोर अन्याय होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे लोग जो बिना सुविधाओं के आगे नहीं बढ़ सकते, उन्हें आवश्यक रूप से सुविधाएं दी जानी चाहिए। ऐसा कार्य न्याय तथा निष्पकता से किया जाए, तो बहुत अच्छा होगा। उनके अनुसार यदि कोई समाज अपने सदस्यों को प्रगतिशील, उत्तम और उत्तरदायी बनाना चाहता है, तो यह समता को आधार मानकर ही संभव हो सकता है, इसलिए नहीं कि सब लोग समान हैं, बल्कि इसलिए कि उनका न्याय संगत विभाजन करना असंभव है। उन्होंने अवसरों की एकता पर बल नहीं दिया, अपितु प्राथमिकताओं की समता को न्यायोचित स्थान दिया। लोकतंत्र में समानता बहुत जरूरी है।