मोदिगिल्यानी एवं मिलर मॉडल , मान्यतायें - Modigilani and Miller Models, Assumptions
मोदिगिल्यानी एवं मिलर मॉडल , मान्यतायें - Modigilani and Miller Models, Assumptions
मोदिगिल्यानी एवं मिलर ने लाभांश का अप्रासंगिक मॉडल प्रस्तुत किया है। इनका मत है कि फर्म की लाभांश नीति का संपत्तियों के मूल्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इस प्रकार से उनका तर्क है कि अंशधारियों की संपदा के लिए लाभांश अप्रासंगिक है।
मान्यतायें
इस मॉडल की निम्नलिखित मान्यतायें हैं:-
1. कोई भी व्यक्तिगत या कंपनी कर नहीं लगया जाता है।
2. कंपनी की लाभांश नीति का कंपनी की समता की लागत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
3. कंपनी की पूँजी विनियोग नीति का लाभांश नीति से कोई संबंध नहीं है।
4. सभी विनियामों को समान ब्याज दर पर उधार देते या लेते हैं।
5. प्रतिभूतियों के क्रेता अथवा विक्रेता मूल्य पर कोई प्रभाव नहीं डाल सकते ।
6. लाभांश संबंधी निर्णय का प्रयोग सूचना प्रदान करने के लिये नहीं किया जाता है।
7. पूँजी बाजार पूर्ण है और उसमें सूचनाओं का अबाध प्रवाह है।
8. कंपनी के भविष्य के संबंध में कोई अनिश्चितता या जोखिम नहीं है।
9. विनियोक्ता विवेकपूर्ण व्यवहार करते है। कोई भी विनियोक्ता अपने कार्यकलापों से अंशों के बाजार मूल्य को प्रभावित करने की स्थिति में नहीं होता है।
इस संबंध में मोदिगिल्यानी एवं मिलर का यह तर्क है कि अंशधारियों के लाभांश प्राप्त करने पर धन में जो वृद्धि होती है उतना ही कंपनी द्वारा वित्त के बाह्य स्रोतों से पूँजी प्राप्त करने से कमी आ जाती है। इस प्रकार से दोनों प्रकार के लेन-देन एक दूसरे की क्षतिपूर्ति कर देते हैं। इसके फलस्वरूप अंशधारियों की संपदा में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
उनके विचार से, वास्तव में लाभांश एक उदासीन अवशेष है।
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