मॉण्टेसरी विद्यालय - Montessori School

मॉण्टेसरी विद्यालय - Montessori School


मॉण्टसरी विद्यालय में शिक्षार्थी को खेल द्वारा शिक्षा दी जाती है। इसलिए, खेल के लिए विद्यालय में काफी बड़ा मैदान होता है जिसमें बालक खुले वातावरण में खेल सकते हैं। बच्चों के बैठने के लिए छोटी छोटी कुर्सिया तथा मेजें होती हैं जिन पर बैठकर कभी-कभी खेल भी खेलते हैं। मैदान में कुछ कबल बिछा दिए जाते हैं जिन पर बैठकर बालक खेलते हैं। चाय पीने के लिए छोटे-छोटे कप तथा प्लेटें होती है। टी पॉट' से बच्चे चाय परोसते हैं और इतनी सावधानी बरतते हैं कि जरा भी चाय नहीं गिरती है। कोई खाद्य या पेय पदार्थ मेजपोश पर भी नहीं गिरता है। विद्यालय में एक बड़ा कमरा और कई छोटे छोटे कमरे होते हैं। बड़े कमरे में पढ़ाई होती है और छोटे कमरों में खाना बनाना, व्यायाम आदि होते हैं। विद्यालय में सभी सामान बच्चों की सुविधा के अनुसार एकत्र किया जाता है।

सभी चीजें छोटी-छोटी रहती है ताकि बच्चे इधर-उधर सामान को उठाकर ले जा सके। बड़े कमरे में कई छोटे सद् कहोते हैं जिनमें शिक्षा के उपकरण रखे होते हैं। श्यामपट्ट पर शिक्षार्थी चित्र भी बनाया करते हैं। मॉण्टेसरी विद्यालय की कुछ अन्य प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-


1. मॉण्टेसरी विद्यालयों में कोई कठोर अनुशासन नहीं होता।


2 कोई पुरस्कार नहीं दिया जाता विकास ही पुरस्कार है। 


3. शैक्षणिक उपकरणों के सहारे शिक्षा दी जाती है।


4. रूसो और स्पेंसर की आत्मशिक्षा पर अनुगमन होता है।


5. शिक्षक एक योग्य निर्देशक होता है। शिक्षक को यह जानकारी होनी चाहिए कि उसे कब हस्तक्षेप करना है और कब नहीं। 


6. मॉण्टेसरी विद्यालय में शिक्षार्थी को पूरी स्वतंत्रता रहती है।


7. बुद्धि से अधिक इंद्रियों पर ध्यान दिया जाता है।


8. बच्चों को व्यक्तिगत रूप से प्रशिक्षित किया जाता है।


9. स्पर्श की संवेदना मौलिक संवेदना है अतः इसका सर्वाधिक ध्यान रखा जाता है।