प्रबन्धकीय अर्थशास्त्र की प्रकृति एवं क्षेत्र - Nature and Scope of Managerial Economics

प्रबन्धकीय अर्थशास्त्र की प्रकृति एवं क्षेत्र - Nature and Scope of Managerial Economics


किसी भी तरह के व्यावसायिक अथवा औद्योगिक संगठन में तरह तरह के निर्णय लिये जाते हैं। उस संगठन की सफलता उस निर्णय के सही होने पर निर्भर करती है। व्यासायिक निर्णय सही हो इसके लिये यह आवश्यक है कि निर्णय लेने से पूर्व सभी विकल्पों पर विचार करें। श्रेष्ठ विकल्प का चुनाव करने के लिये अर्थशास्त्र, प्रबंध विज्ञान तथा लेखाशास्त्र के सिद्धांतो का वृहद् ज्ञान होना आवश्यक है, जो केवल प्रबन्धकीय अर्थशास्त्री मे ही हो सकता है। अतः सही निर्णय के लिये प्रबन्धकीय अर्थशास्त्र का ज्ञान होना नितान्त आवश्यक है।


वर्तमान युग में एक वाणिज्यिक तथा औद्योगिक संगठन की समस्याएँ पहले की तुलना में बहुत अधिक जटिल हो गई है। जहाँ पहले व्यवसायिक समस्याओं के समाधान तथा विश्लेषण में आर्थिक सिद्धांतों का उपयोग सीमित था, वहाँ वर्तमान में प्रबंधकीय अर्थशास्त्र के माध्यम से नवीन धारणाएँ वैज्ञानिक विधियाँ, गणितीय पद्धतियों तथा संक्रिया विज्ञान का प्रचलन बढ़ता जा रहा है।


प्रबन्धकीय अर्थशास्त्र तथा व्यावसायिक अर्थशास्त्र दो शब्द है जिनका एक दूसरे के स्थान पर उपयोग किया जाता रहा है। हाल ही के वर्षों में प्रकन्धकीय अर्थशास्त्र की लोकप्रियता में बढ़ोतरी हुई है और व्यावसायिक अर्थशास्त्र का स्थान प्रबन्धकीय अर्थशास्त्र ने ले लिया है।

प्रबन्धकीय अर्थशास्त्र आधुनिक व्यवसायों के प्रभावपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से प्रबंधन के लिए एक शक्तिशाली संयन्त्र बन गया है जिससे प्रबंधकों को सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त होता है।


प्रबन्धकीय अर्थशास्त्र को विभिन्न विद्वानो ने अलग-अलग रूप में समय-समय पर परिभाषित किया है। आधुनिक युग प्रबन्धकीय अर्थशास्त्र का स्वर्ण काल है क्योंकि एक व्यवसाय प्रबंधक के लिए वर्तमान समय में अर्थशास्त्र का ज्ञान बहुत आवश्यक होता है। परम्परागत अर्थशास्त्र के अन्तर्गत आर्थिक घटनाओं के केवल सैद्धान्तिक पहलू का ही विवेचन किया जाता है और ये सभी सिद्धांत अवास्तविक मान्यताओं पर आधारित होते हैं। अतः इन सिद्धांतो का प्रबंधक के लिए बहुत ही सीमित महत्व रह जाता जहै एक व्यवसाय प्रबंधक का सम्बन्ध आर्थिक घटनाओं के व्यावहारिक पहलू से होता है और उसके लिए वे ही घटनायें महन्वपूर्ण होती हैं जिनका सम्बन्ध उसकी फर्म के क्रियाकलापों से होता है। उसे ऐसे अर्थशास्त्र की जानकारी आवश्यक है जो कि व्यवसाय - जगत की वास्तविकताओं पर आधारित हो तथा उसकी फर्म की आर्थिक समस्याओं के हल में सहायक सिद्ध हो प्रबन्धकीय अर्थशास्त्र ही इन आकांक्षाओं को पूरा करता है।