सीखने की प्रकृति - Nature of Learning
सीखने की प्रकृति - Nature of Learning
सीखना एक मनोवैज्ञानिक प्रकिया है। सीखने की अनेक परिभाषाएँ दी गयी है तथा अनेक सिद्धान्तो का प्रतिपादन किया गया है। इसके आधार पर सीखने की प्रकृति की व्याख्या निम्नलिखित प्रकार
से की जा सकती है-
1) सीखना प्रकिया तथा परिणाम है- अधिगम प्रकिया द्वारा छात्र नए अनुभवों, व्यवहारों, तथा प्रत्ययो को अर्जित करता है। यह अधिगम के परिणाम भी माने जाते हैं।
2) व्यवहार परिवर्तन सीखना है - क्रियाओं तथा अनुभव से जो व्यवहार परिवर्तन होता है, उसे अधिगम की संज्ञा दी जाती है।
3) सीखना मानव की प्रकृति है - मानव के वस्तुओं के सम्बध के बारे में जानने की उत्सुकता रहती है। क्या? तथा क्यों? प्रश्नों के उत्तर को जानने की इच्छा रहती है। इसी जानकारी को अधिगम कहते हैं।
4) सीखना मानसिक क्षमताओ की एक प्रक्रिया है- ज्ञानात्मक, भावात्मक तथा क्रियात्मक पक्षों का ज्ञान अधिगम प्रकिया द्वारा किया जाता है। अधिगम के यही तीन उद्देश्य है।
5) सीखना एक सामाजिक प्रक्रिया भी है- बालक समाज, परिवार तथा अपने बड़ों के कार्यों को देखकर, समाज की अनेक बातों को सीख लेता है, जिसे सामाजिक अधिगम (Social Learning ) कहते है। अधिगम प्रत्यक्षीकरण तथा अनुकरण द्वारा होता है।
6) सीखना एक समायोजन की प्रक्रिया है - अधिगम से समायोजन की क्षमताओं का विकास होता है। व्यक्ति अपने ज्ञान से परिस्थिति से समायोजन जल्दी कर लेता है।
7) सीखना एक समस्या समाधान की प्रक्रिया है - जीवन की समस्याओं का समाधान व्यक्ति अपने पूर्व अनुभवों की सहायता से करता है। पूर्व अनुभव व्यक्ति का अनुभव होता है। अधिगम समस्या-समाधान में सहायक होता है।
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