एन.सी.ई.आर.टी. एस.सी.ई.आर.टी, सी.बी.एस.ई. - N.C.E.R.T., S.C.E.R.T, C.B.S.E.
एन.सी.ई.आर.टी. एस.सी.ई.आर.टी, सी.बी.एस.ई. - N.C.E.R.T., S.C.E.R.T, C.B.S.E.
१) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission )
इसका कार्य विश्वविद्यालयों को अनुदान देकर उनका पोषण करना है। यह उच्च शिक्षा के कार्य में संतुलन बनाये रखती है। इस आयोग की स्थापना सन १९५३ में हुई।
२) राष्ट्रीय शिक्षण अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (N.C.E.R.T.)
इस संस्था की स्थापना १९६५ में हुई। इस संख्या के अंतर्गत कई संस्थान है। प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह प्राथमिक शिक्षा में शिक्षा नियोजन, प्रशासन, साहित्य निर्माण, आकड़ों को इकट्ठा करना और निर्देशन की व्यवस्था करती है।
इसमें निम्नलिखित सामिल प्राप्त है
१. भारत सरकार का शिक्षा परामर्शदाता
२. दिल्ली विश्वविद्यालय का कुलपति
3. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष
४. प्रत्येक राज्य सरकार का एक-एक प्रतिनिधि
५. भारत सरकार द्वारा मनोनित १२ सदस्य
यह संगठन मानव संसाधन विकास मंत्रालय में शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्य करता है और समाज कल्याण मंत्रालय को कियान्वयन में सहायता करता है।
साथ ही विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में उसकी नीति निर्धारण तथा प्रमुख कार्यक्रमों के संचालन में उस मंत्रालय को सहायता प्रदान करता है।
परिषद के प्रमुख कार्य (Main Functions of Council)
१) सेवारत शिक्षकों और सेवा पूर्व शिक्षकों को नेतृत्व प्रदान करना शिक्षकों को नवीन आयामों तथा परिवर्तनों से अवगत कराना और प्रशिक्षण देना।
(२) प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की शिक्षा में सुधार हेतु शोधकार्यों के लिए अनुदान देना।
(३) प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर की शिक्षा संबंधी समस्याओं के शोध कार्यों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना।
४) पाठ्यक्रम शैक्षिक सामग्री, शिक्षण विधि, मूल्याकन तकनीकों आदि पर विचार करना।
५. उच्च गुणवत्ता वाली अनुदेशन सामग्री का प्रकाशन करना।
६ राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान और क्षेत्रीय महाविद्यालय का संचालन और प्रकाशन का कार्य करना।
N.C.E.R.T. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (National Council for Education Research and Training- NCERT)
एन. सी. ई.आर.टी. के घटक (Elements of NCERT) परिषद की तीन प्रमुख इकाइयों है।
राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान
२. शैक्षिक प्रौद्योगिक केंद्र
३. क्षेत्रीय शिक्षा महाविद्यालय
१) राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान (National Institute of Education NIE)
मुख्यालय- श्री. अरविंद मार्ग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के समीप, नई दिल्ली
कार्य:- १) शिक्षा में अनुसंधान तथा विकास, सेवारत प्रशिक्षण, प्रकाशन और प्रचार-प्रसार करना।
(२) पूर्व प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम आयोजित करना।
राष्ट्रीय शिक्षा संस्था के विभाग:
१) अध्यापक शिवा विशेष शिक्षा तथा विस्तार सेवा विभाग (Department Teacher Education Special Education and Extenstion Service)
कार्य:- १) सेवापूर्व एवं सेवारत अध्यापकों के प्रशिक्षण हेतु कार्यक्रम, नीति
निर्धारण एवं सामग्री का निर्माण करना।
२) पाठयक्रमों में सुधार करना तथा उसमें परिवर्तन करना।
३) विशेष शिक्षा और विस्तार सेवा का कार्य ।
४) विकलांग एवं मंदबुद्धि
बालकों के प्रशिक्षण से जुड़े पाठयक्रम में सुधार हेतु सुझाव देना।
२) सामाजिक विज्ञान और मानविकी विभाग (Department of Social Sciences and humanities )
कार्य:- १) माध्यमिक स्तर पर पाठ्यकमों की रचना एवं पाठ्यसामग्री का निर्माण
२) पाठ्य पुस्तकों, सहायक पुस्तकों व अन्य संबंधित शिक्षा सामग्री का निर्माण
(३) विज्ञान और गणित विभाग (Department of Science and Mathematics) कार्य:- १) विज्ञान और गणित विषयों से संबंधित पाठ्यक्रम एवं पुस्तकों की रचना
(२) माध्यमिक स्तर के भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान एवं गणित विषयक पाठ्य सामग्री का निर्माण
(३) उपयोगी सामग्री को साइंस किट का रूप देकर ग्रामीण क्षेत्रों में भेजना।
४) शिक्षा मनोविज्ञान परामर्श / तथा निर्देशन विभाग (Department of Educational Psychology, Counseling and Guidance)
कार्य:- १) बाल केन्द्रित शिक्षा को रूचि कर बनाना।
(२) सीखने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना / परीक्षण करना।
(३) शैक्षिक और व्यावसायिक परीक्षण द्वारा उचित परामर्श व निर्देश देने का कार्य।
५) मापन तथा मूल्यांकन विभाग (Department of Measurement and Education) कार्य – १) शैक्षिक विषय तथा व्यावसायिक कार्यकलापों के मापन और मूल्यांकन
हेतु परीक्षण सामग्री का निर्माण
(२) प्रश्नों की रचना करके उनका संग्रहण करना और उन्हें प्रश्न बैंक का रूप देना।
६) व्यावसायिक शिक्षा विभाग (Department of Vocational Education)
कार्य:- १) व्यावसायिक शिक्षा से संबंधित समस्याओं का अध्ययन करना।
(२) कार्यानुभव की शिक्षा देना तथा समाजोपयोगी कार्य बालकों को सिखाना।
७) क्षेत्रीय सेवा विस्तार व समन्वय विभाग (Department of Field Service Extension and Co-ordination)
कार्य:-
१) विभिन्न प्रकार की उपलब्धियों को देश के विभिन्न भागों में पहुँचाना।
२) अपनी उपलब्धियों से प्रादेशिक शिक्षा संस्थान को अवगत कराना।
(३) शिक्षा संस्थानों में समन्वय स्थापित करना।
८) प्रकाशन विभाग (Department of Publication)
कार्य:- १) एन.सी.ई.आर.टी. के पाठयपुस्तके, शिक्षण सामग्री, विभिन्न आवश्यक पाण्डुलिपियाँ तैयार करना।
२) शिक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण पत्रिका (जर्नल) प्रकाशित करना
१.इंडियन ऐजूकेशन रिव्यु
२.जर्नल ऑफ इंडियन एज्यूकेशन
३. स्कूल साइंस
४. प्राइमरी टीचर व प्राथमिक शिक्षक आदि को हिंदी में प्रकाशित करना।
(२) केंन्द्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (Centre for Instruction in Educational Technology, CIET)
प्रस्तावना:- १) प्रारंभ में यह (CIE) के नाम से जाना जाता था।
(२) १९८४ में इसे केन्द्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का नाम दिया गया।
(३) एन.सी.ई.आर.टी. का दूसरा घटक सी.ई.टी. है।।
४) इस विभाग की स्थापना १९७३ में संचार माध्यमों का समुचित प्रयोग कर शिक्षा का प्रसार करने के लिये की गई थी।
कार्य:- १) रेडियो एवं दुरदर्शन पर शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रसारण के लिए शैक्षिक सामग्री का निर्माण पटकथा लेखन, मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था व प्रस्तुतिकरण
आदि सभी कार्य किये जाते है।
२) नई शिक्षा नीति के अनुसार निर्दिष्ट स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास,
● राष्ट्रीय अस्मिता सांस्कृतिक विरासत पर्यावरण, जागरुकता आदि के सम्बंधित
कम्प्यूटर के कार्यक्रम बनाना।
(३) ५ से १८ तथा ९ से ११ वर्ष की आयु के बालकों के लिए शैक्षिक दूरदर्शन कार्यक्रम का निर्माण करना।
(३) क्षेत्रीय शिक्षा महाविद्यालय (Regional College of Education RCE )
एन्.सी.ई.आर.टी. ने चार क्षेत्रीय महाविद्यालयों की स्थापना की है
१. क्षेत्रीय शिक्षा महाविद्यालय भुवनेश्वर
२. क्षेत्रीय शिक्षा महाविद्यालय, अजमेर
३. क्षेत्रीय शिक्षा महाविद्यालय, मैसूर
४. क्षेत्रीय शिक्षा महाविद्यालय, भोपाल
कोर्स:- १) इन शिक्षा महाविद्यालयों में चार वर्ष के एकीकृत अध्यापक शिक्षा के कोर्स (बी.एससी एड) चलाए जाते है।
२) ग्रीष्मावकाश में पत्राचार के माध्यम से कोर्स चलाए जाते है जिनमें
अप्रशिक्षित अध्यापको को प्रशिक्षित किया जाता है।
कार्य:- १) नवीन पाठ्यक्रमों का आयोजन समय-समय पर करना।
(२) विभिन्न कार्यशालाएं, सम्मेलन, वर्कशॉप आदि का आयोजन करना।
३) प्रकाशन में अनुदान की व्यवस्था करना।
इस प्रकार तीनों ही घटक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण व सराहनीय कार्य रहे हैं।
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