कोष प्रवाह न होना - non-flow of funds

कोष प्रवाह न होना - non-flow of funds


जिन लेन-देनों से शुद्ध कार्यशील पूँजी में कोई कमी या वृद्धि नहीं होती, उन लेन-देनों से कोष प्रवाह नहीं होता है। मुख्यतः निम्नलिखित लेन-देन ऐसे है जिनसे कोष प्रवाह नहीं होता है : 


(1) लेन-देन से प्रभावित होने वाले दोनों खाते चालू सम्पत्ति वर्ग के हों जैसे माल का नकद क्रय, नकद बिक्री, देनदारियों से भुगतान प्राप्त होना, देनदारों से प्राप्त विपत्र मिलना, प्राप्य विपत्रों का भुगतान मिलना आदि। इन व्यवहारों से चालू सम्पत्तियों के स्वरूप में ही परिवर्तन होता है, उनका कुल योग पूर्ववत् ही रहता है। अतः ऐसे लेन-देनों का शुद्ध कार्यशील पूँजी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। 


(2) लेन-देन से प्रभावित होने वाले दोनों खाते चालू दायित्व वर्ग के हो जैसे-लेनदारों को देय बिलों पर स्वीकृति प्रदान करना, देय बिल का अनादृत होना, आदि। ऐसे लेन-देनों से केवल चालू दायित्वों का स्वरूप ही परिवर्तित होता है, परन्तु चालू दायित्वों की कुल रकम तथा शुद्ध कार्यशील पूँजी अपरिवर्तित रहती है। (3) चालू सम्पत्तियों व चालू दायित्वों में समान दिशा और समान मात्रा में परिर्वतन हो -


यदि किसी लेन-देन से चालू सम्पत्तियों एवं चालू दायित्वों में समान दिशा और समान मात्रा में परिवर्तन होता है तो उनका शुद्ध कार्यशील पूँजी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है अर्थात् कोई 'कोष प्रवाह नहीं होता है जैसे लेनदारों को भुगतान देय बिलों का भुगतान, उधार माल खरीदना, आदि ।


(4) स्थायी सम्पत्तियां तथा स्थायी दायित्व या पूँजी वर्ग के खाते समान रूप से प्रभावित (परिवर्तित) होते हो जैसे- अंश या ऋणपत्रों के बदले स्थायी सम्पत्तियों का क्रय। ऐसे लेन-देनों - का किसी चालू सम्पत्ति या चालू दायित्व के खाते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता जिनके कारण शुद्ध कार्यशील पूँजी अपरिवर्तित रहती है अर्थात् कोष प्रवाह नहीं होता है।


(5) लेन-देन से प्रभावित होने वाले दोनों खाते गैर चालू वर्ग के हो जैसे- ऋणपत्र या पूर्वाधिकार अंशों का समता अंशों में परिवर्तन के द्वारा शोधन, बोनस अंशों का निर्गमन आदि । उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि यदि लेने-देन से प्रभावित होने वाले दोनों खाते एक ही वर्ग (स्थायी या चालू) के हों तो कोष प्रवाह नहीं होगा।