स्त्री सशक्तिकरण के लिए किए गए गैर-सरकारी प्रयास - Non-Governmental Efforts Made for Women Empowerment
स्त्री सशक्तिकरण के लिए किए गए गैर-सरकारी प्रयास - Non-Governmental Efforts Made for Women Empowerment
महात्मा गांधी द्वारा प्रेरित होकर परतंत्र भारत में स्त्रियों ने विभिन्न संस्थाओं के द्वारा स्त्री सशक्तिकरण के लिए कार्य किया है। भारतीय स्त्रियों ने शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर होकर कई संस्थाओं के द्वारा महिला उत्थान के लिए कार्य किया। उन्होंने स्त्रियों की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक दृष्टि में विकास के लिए सभी को सचेत किया। स्वतंत्रता के पश्चात कई गैर-सरकारी संगठनों के प्रयास के फलस्वरूप गरीब और अशिक्षित स्त्रियों को कानूनी अधिकारों हतं आत्मनिर्भरशीलता के लाभ-संबंधी जानकारी प्राप्त हुई। इन सब महिला संगठनों ने प्रौढ़ शिक्षा केंद्र, वैषयिक शिक्षा केंद्र, सिलाई केंद्र, कार्यशील महिला आवास, वृद्धाओं के लिए घर, उपेक्षितों के लिए घर आदि की व्यवस्था की 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में कई राष्ट्रीय स्तर की महिला संस्था कार्यरत थीं
1. अखिल भारतीय महिला सम्मेलन (ए. आई डब्ल्यू.सी.)
2. भारतीय महिला संगठन (डब्ल्यू.आई.ए.)
3. राष्ट्रीय महिला परिषद, भारत (एन. सी. डब्ल्यू आई)
4. राष्ट्रीय भारतीय महिला संघ (एन.एफ.आई. डब्ल्यू)
5. भारतीय महिला अध्ययन संगठन (आई.ए.डब्ल्यू.एस.)
इनके अलावा राज्य स्तर के कई महिला गैर-सरकारी संगठन स्त्री सशक्तिकरण के लिए प्रयासरत थीं।
स्वतंत्रता के पश्चात इस कार्य में पर्याप्त तेजी आई।
गैर सरकारी संगठन सरकार के सहयोग के द्वारा ही कार्य करती हैं। गैर-सरकारी संगठनों को सार्वजनिक समर्थन के द्वारा नागरिक एवं सार्वजनिक समाज के बीच मजबूत हुए संबंध संयुक्त कार्यवाही के लिए नए अवसर प्रदान करते हैं।
सरकारी गैर-सरकारी सहयोग में वृद्धि से जन-सामान्य को उनके अधिकारों के विषय में अधिकाधिक जागरूक बनाने तथा उन्हें अधिकारों से जोड़ने में सहायता मिलती है और आगे चल कर इसी से सार्वजनिक मामलों में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व निर्धारित करके नए मार्ग खुलते हैं।
1. अखिल भारतीय महिला सम्मेलन (ए.आई.डब्ल्यू.सी.)
सन 1927 में मागरिट बहिनों एवं अन्य के प्रयासों के द्वारा अखिल भारतीय महिला सम्मेलन आयोजित किया गया। यह बाद में एक संस्था के रूप में कार्य करने लगी। यह संस्था समस्त राज्यों को प्रतिनिधित्व करने वाली वृहत संस्था है। महारानी माया राज सिंधिया के अध्यक्षता में इसका पहला अधिवेशन पुने में 1927 को आयोजित हुआ था। इसके अंतर्गत राज्य स्तर पर स्त्रियों की विभिन्न समस्याओं के संबंध में विचार किया जाता है एवं सरकार के समक्ष महिला सशक्तिकरण के लिए प्रयास किया जाता है।
इस संस्था का कार्य भारत वर्ष में फैले 500 शाखाओं तक है। वर्तमान मे शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए, मानसिक रूप से अक्षम लोगों के लिए विद्यालय, परिवार योजना, प्रौढ़ शिक्षा केंद्र, छापाखाना, कार्यशील महिला आवास, कामकाजी स्त्रियों को प्रशिक्षण, वृद्धाओं के लिए वृद्धाश्रम आदि कार्यों में यह संस्था संलग्न है।
2. भारतीय महिला संगठन (डब्ल्यू.आई.ए.)
सन 1917 को मद्रास में अनी बेसेन्ट, डोरोथी जिनजरादास एवं मार्गारिट बहिनों के द्वारा इस संगठन को स्थापित किया गया। यह स्त्रियों प्रथम संगठन है, जिसने सभी स्तर के स्त्रियों को एक साथ लाने का प्रयास किया। इसका लक्ष्य पुरुष और स्त्रियों के लिए समान अधिकार सभी स्त्रियों के लिए शिक्षा, बाल विवाह व अन्य सामाजिक व्याक्तियों पर रोक, राजनीतिक दृष्टि से स्त्रियों के अधिकार, स्त्रियों की आत्मनिर्भर बनाना आदि है।
3. भारतीय राष्ट्रीय महिला परिषद (एन.सी.डब्ल्यू. आई)
यह परिषद 1926 में स्थापित हुई जिसकी संस्थापिका लेडी अम्बरडीन, लेडी टाटा तथा बंबई प्रांत की अन्य महिलाएँ थीं। इस संगठन के साथ बंबई प्रांतीय महिला परिषद, कलकत्ता प्रांतीय सेवा लीग तथा बिहार, बंगाल की अन्य प्रांतीय परिषदों ने हिस्सा लिया था। वे सभी कार्यों में शामिल होती थी।
4.राज्यस्तर के गैर-सरकारी संगठन
महिला विकास में स्वैच्छिक संगठन महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं। जन सहयोग के अभाव में अधिकांश विकास योजनाएँ अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं कर पाती हैं, अतः ये स्वैच्छिक समूह प्रशासन एवं जनता के मध्य दूरी को कम करते हैं और जन सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अतिरिक्त ये स्वैच्छिक समूह महिला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
• स्वाधीना ( Shadhina.org.in)- इस गैर-सरकारी संस्था का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण है। यह संस्था अशिक्षा, सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता, स्वास्थ्य, आर्थिक शोषण जैसे मुद्दों को लेकर स्त्रियों को सशक्त बनाती है। विशेषतः इनका लक्ष्य आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग की महिलाएँ हैं। स्वाधीना अभी झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं तमिलनाडु जैसे राज्यों के 52 ग्रामीण इकाई में कार्यरत है।
• स्त्री आधार केंद्र - (www.stree adharkendra.org) यह स्त्रियों की सहायता के लिए एक गैर सरकारी संस्था है। इसकी आरंभ शुरुआत अस्सी दशक के प्रारंभ में महाराष्ट्र में हुआ। स्त्रियों को घरेलू हिंसा, और अन्यान्य समस्याओं से लढ़ने तथा क्षमता विकास के लिए यह संस्था कार्यरत है।
• स्व-रोजगार प्राप्त महिला संघ (अहमदाबाद सेवा) सन 1972 को महिला इस संघ की स्थापना टेक्साटाइल मजदूर संघ, के महिला इकाई द्वारा हुई। यह स्त्रियों में सहकारिता उत्पादन और वितरण के महत्व लेकर आई,
जिसके कारण कोई बिचौलिया उनका लाभ न ले सके। स्त्रियों सशक्त बनाने हेतु सेवा बैंक की भी स्थापना की गई ताकि स्व-रोजगार प्राप्त महिलाओं को कम रेट पर ऋण उपलब्ध करावाया जा सके। इससे बहुत अधिक मात्रा में महिलाएँ लाभान्वित हुई। यह गुजुरात में बानसकंठा जिले में अपना काम कर रहा है। यह जिला, राज्य के उत्तरी भाग में सूखा क्षेत्र है। इस क्षेत्र के लोग प्राकृतिक आपदाओं, स्थायी निर्धनता और अनपढ़ता से घोर रूप से प्रभावित हैं। इस क्षेत्र में उच्च मृत्यु दर देखी गई है और सूखे के दिनों में लाभप्रद रोजगार की खोज में अन्य क्षेत्रों में जाकर बसना पड़ता है। सेवा ने इन्हें एकजुट करते हुए क्षेत्र में स्त्रियों को संगठित करने का प्रयास किया है।
बानसकठा महिला संघ (बी डब्ल्यू ए) स्त्रियों का ग्राम स्तर के उत्पादकों के समूहों का परिसंघ है जिसे सेवा के सहयोग से गठित किया गया है। बी. डब्ल्यू.ए. स्त्रियों को ऋण समूहों का गठन करने में सहायता करता है।
कामकाजी महिला संघ (डब्ल्यू.डब्ल्यू. एफ) का गठन 1978 में मद्रास में किया गया था कि जो कि मद्रास झोपड़पट्टी समुदायों में निर्धन स्त्रियों की सहभागितापरक आवश्यक निर्धारण का परिणाम था। तभी से यह असंगठित क्षेत्र में कार्यरत निर्धनतम और उपेक्षित स्त्रियों को एकजुट करता आ रहा है। ये महिलाएँ साख सहकारियों और एकता के माध्यम से डब्ल्यू.डब्ल्यू. एफ. द्वारा संगठित की जा रही हैं। इसके हस्तक्षेप के कारण अब हजारों महिलाएँ साहुकारों और अन्य मध्यस्थों की जकड़ से छुट गई है और अब उन पर निर्भर नहीं हैं। इस तरह महिलाएँ बचत करने, परिसंपत्तियों सृजित करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने योग्य में बन पाई हैं।
इन सबके अलावा देश भर में कई गैर सरकारी संगठन हैं जो महिला सशक्तिकरण का कार्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कर रही है: कुछ ऐसी संगठनों के नाम इस प्रकार हैं- स्वरोजगार प्राप्त महिला संघ, अहमदाबाद, अन्नपूर्णा महिला मंडल, मुंबई, आन्ध्र महिला सभा, मद्रास, महिला अभ्युदय संस्था, आंध्र प्रदेश महिला संगम, अन्वेषी (हाइद्रावाद), महिला समाजम, केरल आदि अनेक संस्थाएँ नारी उत्थान व उन्हें सक्षम बनाने हेतु प्रयासरत हैं।
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