सामान्य प्रायिकता वक्र - normal probability curve
सामान्य प्रायिकता वक्र - normal probability curve
यद्यपि व्यवहार में सामान्य प्रायिकता की प्राप्ति संभव नहीं है क्योंकि कोई भी चर पूर्ण से सामान्य प्रायिकता वक्र के सामान्य प्राथकिता रूप में वितरित नहीं होता हैं तथापि अवलोकित वक्रों की प्रवृत्ति सामान्य प्रायकिता के आकार को प्राप्त करने की होती है। जैसे-जैसे प्रतिदर्श की संख्या बढ़ती जाती है वैसे-वैसे अवलोकित आवृत्ति वक्र का आकार सामान्य प्रायिकता वक्र के अनुरूप होता जाता है। अवलोकित वक्रों की इस प्रवृत्ति के कारण N के बड़ा होने पर व्यावहारिक समस्याओं के अध्ययन में विभिन्न चरों को सामान्य प्रायकिता वक्र के अनुरूप वितरित माना जा सकता है। सामान्य प्रायकिता वक्र की विशेषताओं की सहायता से इस प्रकार की समस्याओं को हल किया जा सकता है। स्पष्ट है कि सामान्य प्रायिकता वक्र एक ऐसा सैद्धांतिक, गणितीय तथा आदर्श वक्र है जिसकी व्यवहार में पूर्ण प्राप्ति लगभग असम्भव है परंतु जिसका व्यावहारिक उपयोग अत्यंत अधिक है।
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