वित्तीय प्रबंध के उद्देश्य - objectives of financial management

वित्तीय प्रबंध के उद्देश्य - objectives of financial management


वित्तीय प्रबंध का संबंध वित्त की प्राप्ती करना एवं उसका समुचित उपयोग इन दोन तत्वों (घटकों से) से मुख्य रूप से रहता है। व्यवसायीक संघटन के पास जमा हो रहे वित्त का, संघटन की ख्याती एवं प्रतिष्ठा बढ़ाने तथा वार्षिक आय में बढ़ोतरी होगी इस हेतु उपयोग करना अत्यंत आवश्यक होता है। व्यवसायिक वित्त का उचित उपयोग करने के लिए विभिन्न प्रकार के मार्ग उपलब्ध रहते है। इन सभी वैकल्पिक मार्गों का योग्य मुल्याकन वित्तीय प्रबंधन के अंतर्गत किया जाता है। व्यवसाय संघटन के उद्देशों की प्राप्ती हेतु किन मार्गों का अवलंब करना चाहिए यह निर्णय लेने से पूर्व उस पर सभी दृष्टी ने विस्तार से विचार किया जाता है तथा संघटन के व्यापारिक रणनीतियों का भी ऐसे निर्णय लेने से पूर्व विचार किया जाता है। किसी भी व्यवसाय के मुख्य उद्देश यह होता है कि, उस व्यवसाय के मालिकों को अधिकतम आर्थिक कल्याण साध्य करना है। वित्तीय प्रबंध की निम्मनांकित दो प्रमुख उद्देश है।


1. अधिकत (महत्तम) लाभ करना 


1. (Maximization of profit) हर व्यवसाय यह एक वित्तीय संघटना रहती है। व्यवसायिक संघटना में होने वाले कोई भी आर्थिक कार्य (वित्तीय कार्य) यह महत्वम लक्ष हासिल करने के उद्देश्य से की जाती है। व्यवसायिक संघटना निरंतर विकास एवं विस्तार की योजनाओं को संचालित करता है। यह योजनाओं को कार्यशिल करने हेतु व्यवसाय संघटन को लाभ होना अत्यत आवश्यक है। व्यवसाय की कार्यकुशलता मापने का "लाभ यह एक प्रमाण है। व्यवसाय में रहने वाले विभिन्न जोखीमों को रोकथाम करने हेतु "लाभ" यह सरक्षण यंत्र के तौर पर कार्य करता है। व्यवसाय के उत्पादन के किंमत में होने वाली घट, अन्य व्यवसायिक संघटन से स्पर्धा, सरकार की प्रतिकूल नितियाँ इत्यादी भिन्न प्रकार के जोखीम के विरुद्ध "लाभ" यह प्रभावी अस्त्र दृशस्त है। इसलिए महत्तम लाभ प्राप्त करने एवं उसमें निरंतर बाढ़ करते रहना इसे व्यवसाय प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण उद्देश माना जाता है। लाभ को अधिकतम करने की आवश्यकता को न्यायोचित बताने के लिए निम्नलिखित स्वरूप के तर्कों का आधार लिए जा है।


2 जब किसी व्यवसाय का उद्देश "लाभ अर्जित करना है, तब प्रबंधन का उद्देश स्पष्ट रूप से महत्तम लाभ प्राप्त करना यही रहना आवश्यक है।


3. व्यवसाय की लाभ मात्रा ही उस व्यवसाय की कार्यकुशलता एवं आर्थिक समृद्धी के मुल्यमापन करने हेतु महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए महत्तम लाभ हासिल करना यह उद्देश श्रेष्ट उद्देश है।


4. विभिन्न परिस्थीतियों के कारण व्यवसाय उद्योग में प्रतिकुल वातावरण निर्माण होने की संभावना रहती है। ऐसे प्रतिकुल वातावरण निर्माण होने की संभावना रहती है। ऐसे प्रतिकुल परिस्थितीयों में व्यवसाय संघटन उद्योंग टिक कर रहने के लिए जादा लाभ हासिल करने का प्रयास करना बहुत अनिवार्य है।


5. व्यवसाय उद्योग संघटन के विकास हेतु वित्त की आवश्यकता होती है। "लाभ" यह वित्त प्राप्त करके देने का एक स्रोत है, जिससे व्यवसाय के विकास हेतु महत्तम लाभ प्राप्त करना संघटन को आवश्यक है।


6. व्यवसाय संघटन को विभिन्न सामाजिक जबाबदारी निभाना पडता है। व्यवसाय संघटन का विकास होने पर समाज का भी विकास होता है। इसलिए सामाजिक उद्देशों को हासील करने के लिए प्रत्येक व्यवसाय ने महत्तम लाभ प्राप्त करना अत्यत आवश्यक है।


2. महत्तम सम्पदा प्राप्त करना (Wealth Maximization)


संपत्ती को बढ़ाना या अधिकाधिक संपत्ती प्राप्त करना इसे व्यवसाय का एक अत्यत उपयुक्त उद्देश माना जाता है। भागधारकों का हित सुरक्षित एवं संवर्धन करने संपत्ती महत्तम करने यह उद्देश अत्यंत आवश्यक है ऐसा विभिन्न वित्तीय सिद्धातों के आधार पर किया जाता है।

कार्यशील वित्तीय प्रबंधन के नितियों के अनुसार संपत्ती में बढ़ोतरी करने का कार्य अत्यंत सावधानी से विवेकपुर्ण करना आवश्यक है। जिससे निवेशकर्ता, व्यवसाय में कार्यरत कर्मी एव समाज इन सबका हित सुरक्षित रखना अपेक्षित है। भागधारकों की तरह अल्पकालीन एवं दिर्घकालीन ( लेनदार) कर्जदाते इनके भी हित व्यवसाय संघटन में उनके कर्ज की मर्यादा तक रहता है। अल्पकालिन कर्जदार व्यवसाय संघटन के तरल संपत्ती पर भर देता है एवं उनके कर्ज की वापसी प्राप्त होने पर जोर देता है। उसी तरह दिर्घकालिन कर्जदार उनके वार्षिक व्याज नियमित रूप से प्राप्त करने पर भर देता है तथा अपने कर्ज वापसी हेतु प्राथमिकता अपेक्षित रखते है। इसलिए संपत्ती में बाढ़ होने पर सिर्फ भागधारकों के हित ही सुरक्षित किए जाते है ऐसा न हो कर सभी प्रकार के कर्जदारों के हित सुरक्षित करने एवं रखने को महत्व दीया जाता है। व्यवसाय संघटन के संपत्ती में बाढ़ होने पर कुशल एवं प्रशिक्षीत कर्मी प्राप्त करना आसान होता है। उत्तम कार्य कुशल कर्मी के कारण व्यवसाय संघटन के संपत्ती में बाढ़ होने की संभावना अधिक होती है। इस सभी मामलों पर उत्तम नियंत्रण रखने की आवश्यकता होती है। जिसे वित्तीय प्रबंधन महत्वपुर्ण कार्य करता है।