विश्लेषण व निर्वचन के उद्देश्य - Objects of Analysis and Interpretation
विश्लेषण व निर्वचन के उद्देश्य - Objects of Analysis and Interpretation
वित्तीय विवरणों के निर्वचन में विभिन्न पक्षधरों के विभिन्न उद्देश्य हो सकते हैं, फिर भी इसके कुछ सामान्य उद्देश्य निम्नलिखित होते हैं -
(1) व्यावसायिक संस्था की उपार्जन क्षमता (Eaming Capacity) का अनुमान लगाना,
(2) संस्था की वित्तीय क्षमता और कमजोरियों के विषय में ज्ञान प्राप्त करना,
(3) संस्था की अल्पकालीन सरलता और दीर्घकालीन शोधन क्षमता का निर्धारण करना,
(4) संस्था की ऋण क्षमता का निर्धारण करना,
(5) संस्था के स्कन्ध और स्थायी सम्पत्तियों में विनियोगों की समीक्षा करना,
(6) संस्था के प्रबन्ध की कुशलता और निष्पत्ति (Performance) की समीक्षा करना,
(7) संस्था की भावी सम्भावनाओं का अनुमान लगाना,
(8) उसी उद्योग की अन्य इकाइयों के साथ संचालन क्षमता सम्बन्धी तुलनात्मक अध्ययन करना ।
वास्तव में विश्लेषण के उद्देश्य अनेक और वे विश्लेषक के दृष्टिकोण,
कम्पनी में उसके हित का अश, विश्लेषण में वाछनीय गहनता, उपलब्ध वित्तीय समको व सूचनाओं की मात्रा और गुण-स्तर आदि तत्वों पर निर्भर करते हैं। प्रबन्ध के लिये यह स्व-मूल्यांकन' का एक साधन है क्योंकि यह उसकी प्रबन्धकीय चातुर्य और सामर्थ्य पर एक प्रतिवेदन स्वरूप है। एक व्यापारिक लेनदार फर्म की वित्तीय स्थिति और उसके संसाधनों की तरलता का ज्ञान प्राप्त करता है। इसी तरह एक विनियोजक फर्म की वित्तीय सामर्थ्य तथा भावी लाभप्रदता का ज्ञान प्राप्त करके अपने विनियोजन की योजना बनाता है। इस प्रकार विश्लेषण का उद्देश्य ही विश्लेषण की सीमा, गहनता और प्रकृति निर्धारित करता है। जब पूर्ण विश्लेषण करना हो तथा उसके लिये पर्याप्त समंक उपलब्ध न हों अथवा आदि फर्म द्वारा अपनी वास्तविक स्थिति को छुपाये या भ्रमित करने का संदेह हो तो विश्लेषक को सच्चाई जानने के लिये एक जासूस की नजर अपनानी होगी।
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