प्रबंध लेखांकन के उद्देश्य - Objects or Purpose of Management Accounting
प्रबंध लेखांकन के उद्देश्य - Objects or Purpose of Management Accounting
प्रबन्ध लेखांकन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
(1) वित्तीय सूचनाओं के निर्वचन में सहायता करना (Helpful in the interpretation of financial information)
(2) नियोजन व नीति निर्धारण में सहायक (Helpful in planning and policy formulation )
(3) निश्पादन नियन्त्रण में सहायक (Helpful in Controlling performance )
(4) संगठन कार्य में सहायक (Helpful in Organising)
(5) कर्मचारियों को अभिप्रेरित करना (Motivating Employees )
(6) व्यावसायिक क्रियाकलापों के समन्वय में सहायता करना ( Helpful in Coordinating operations)
(7) निर्णयन में सहायता करना (Helpful in decision making)
(8) संवहन में सहायक (Helpful in communication)
(9) कर प्रशासन में सहायता करना (Helpful in tax administration )
(1) कार्यक्षमता में वृद्धि (Increases Efficiency) प्रबन्धकीय लेखांकन व्यावसायिक संचालन की कार्यकुशलता में वृद्धि करता है। विभिन्न विभागों के लिए लक्ष्य अग्रिम में निश्चित किए जाते हैं और इन लक्ष्यों की उपलब्धि ही उनकी कार्यकुशलता के मापन का उपकरण होता है।
(2) उचित नियोजन (Proper Planning) प्रबंध लेखांकन के परिणामस्वरूप प्रबन्ध-तन्त्र नियोजन कार्य को प्रभावपूर्ण तरीके से सम्पन्न करता है। बजटिंग तकनीक विभिन्न क्रियाओं का पूर्वानुमान लगाने में एक मास्टर बजट बनाया जाता है। प्रत्येक व्यक्ति का कार्य भार पहले से ही निश्चित कर दिया जाता है। इस प्रकार प्रबन्ध लेखाकन की सहायता से सस्था के क्रिया-कलापो का एक व्यवस्थित ढंग से नियोजन किया जाता है।
(3) कार्य-निष्पादन का मूल्यांकन (Measurements of Performance)- बजटरी नियन्त्रण तथा प्रमाप लागत लेखांकन की पद्धतियां कार्य-निष्पादन के मापन को संभव बनाती है। प्रमाप लागत लेखांकन विधि में प्रमाप निर्धारित कर दिए जाते हैं
और वास्तविक निष्पादन की पूर्व-निर्धारित प्रमापों से तुलना की जाती है। बजटरी नियन्त्रण प्रणाली भी सभी कर्मचारियों की दक्षता का माप करने में सहायक होती है।
(4) विनियोजित पूंजी पर अधिकतम लाभ (Maximum Profit on Invested Capital) प्रबंध लेखांकन कार्य कुशलता में वृद्धि करके एवं प्रभावशाली नियन्त्रण के परिणाम स्वरूप लागतों में कमी करने में सहायक होती है। इन सबका परिणाम यह होता है कि संस्था को अधिकतम लाभ की प्राप्ति होती है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि विनियोजित पूंजी पर अधिकतम लाभ कमाया जा सकता है जो कि प्रत्येक व्यवसाय सस्था का प्रमुख लक्ष्य होता है।
(5) प्रभावशाली प्रबंधकीय नियंत्रण (Effective Management Control) प्रबंधकीय लेखाविधि प्रभावशाली नियन्त्रण में भी सहायक है। वास्तविक निष्पादन की तुलना पूर्व लक्ष्यों से करके विचरण ज्ञात किए जाते हैं जिसके आधार पर नियन्त्रण प्रणाली को और अधिक प्रभावशाली बनाया जाता है।
(6) उपभोक्ताओं की सेवा में सुधार (Improves Service to Customers) प्रबंधकीय लेखाकन में प्रयुक्त की जाने वाली लागत नियन्त्रण की तकनीकों से कीमतों को कम करने में सहायता मिलती है। संस्था में समस्त कर्मचारी लागतों के संबंध में सतर्क रहते हैं कि ये नियन्त्रण में रहे। उत्पाद ( वस्तु) की गुणवत्ता अच्छी होती है क्योंकि गुणवत्ता के लिए प्रमाप पहले से ही निर्धारित किए जाते हैं। इस प्रकार उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उत्तम गुणवत्ता वाले माल की आपूर्ति होती है। माल के उत्पादन में वृद्धि होने से उपभोक्ताओं को माल की आपूर्ति भी बढ़ाना संभव हो पाता है।
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