विस्मरण मुख्यतः दो प्रक्रिया - Oblivion is mainly two process
विस्मरण मुख्यतः दो प्रक्रिया - Oblivion is mainly two process
1. निष्क्रिय प्रक्रिया:- डबिंगहास (1885), मानते थे विस्मरण एकमात्र समय का बीतना है, जैसे-जैसे समय बीतता है, विस्मरण की मात्रा बढ़ती जाती है। समयांतराल के कारण विषय के स्मृति चिन्ह दुर्बल होते हैं। विस्मरण कभी भी शत-प्रतिशत नहीं होता है।
2. एक सक्रिय प्रक्रिया:- सक्रिय प्रक्रिया को मानने वाले मूलर पिल्जेकर, फ्रायड, वुडबर्थ आदि हैं। इन विद्वानों ने अपने अध्ययनों के आधार पर डविंगहास के विचारों का खण्डन किया और बताया कि भूलने का कारण समय अन्तराल नहीं है, बल्कि उस समय अन्तराल में होने वाली घटनाएँ एवं क्रियाएँ हैं। विस्मरण को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं:
समय अन्तराल :- अधिगम तथा धारण के बीच समय अन्तराल जितना अधिक होता है धारण की मात्रा उतनी ही कम होती जाती है तथा विस्मरण की मात्रा उतनी ही बढ़ती जाती है। इबिगहास ने विस्मरण के क्षेत्र में सम्भवतः सर्वप्रथम प्रयोगात्मक अध्ययन किए तथा पाया कि सीखने के उपरान्त विस्मरण तीव्रगति से प्रारंभ हो जाता है। उसने देखा कि लगभग दस घण्टे में व्यक्ति सीखी गयी निरर्थक सामग्री का 60 प्रतिशत से अधिक भाग भूल जाता है। बाद के अध्ययनों में भी लगभग इसी प्रकार के परिणाम प्राप्त हुए।
अधिगम स्तर:
अधिगम की जाने वाली विषयवस्तु का अभ्यास जितना अधिक बार किया जाता है। उसका धारण उतना ही अधिक होता है, जिसके फलस्वरूप उसका स्मरण अधिक होता है तथा विस्मरण कम होता है।
अनेक अध्ययनों ने सही कर दिया है कि एक निश्चित सीमा तक अधिगम की मात्रा अर्थात् पुनरावृत्ति जल्दी पद्धति पर धारण की मात्रा भी तीव्र गति से बढ़ती है, परन्तु उस सीमा के उपरान्त अधिगम की मात्रा बढ़ाने पर धारण उसी अनुपात में नहीं बढ़ती है।
पाठ्यवस्तु की सार्थकताः
अधिगम की गई विषयवस्तु की सार्थकता अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करती है। सार्थक विषयवस्तु का अधिगम शीघ्र होता है, वस्तुतः अधिगम जितना सरल, सहज तथा तीव्र गति से होता है। उसका स्मरण उतना अधिक होता है। जबकि विस्मरण उतना ही कम होता है। अनेक मनोवैज्ञानिक अध्ययनों ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि निरर्थक सामग्री का विस्मरण अधिक होता है।
अन्य कारक:
स्मरण को अनेक अन्य मनोवैज्ञानिक कारक जैसे- इच्छा, अधिगम वातावरण, मानसिक स्थिति, अभिप्रेरणा, सीखने की विधि आदि भी प्रभावित करते हैं। विषय सामग्री के अधिगम में अथवा उसे स्मरण रखने में रूचि न होने पर उस विषय सामग्री का विस्मरण अधिक शीघ्रता से होता है। जिस कार्य को व्यक्ति जितनी कम रूचि, ध्यान, इच्छा तथा अभिप्रेरणा से सीखता है, उसको वह उतना ही शीघ्र भूल जाता है।
संवेगात्मक दशाएँ:
जैसे- भय, क्रोश, स्नेह आदि स्मरण- विस्मरण को प्रभावित करते हैं। व्यक्ति की मानसिक स्थिति का भी स्मरण शक्ति पर प्रभाव पड़ता है। मानसिक दण्ड, मानसिक आघात अथवा मानसिक रोग आदि विस्मरण को बढ़ावा देता है। सक्रिय विधि से सीखा हुआ ज्ञान शीघ्र ही विस्मृत हो जाता है। सुख वातावरण में सीखी गई बातें अधिक समय तक स्मरण रहती हैं, जबकि दःखद वातावरण में सीखी गई बातों को व्यक्ति जल्दी विस्मृत कर देता है।
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