कार्यशील पूंजी की अपर्याप्तता के विपरीत परिणाम - Opposite consequences of inadequacy of working capital

कार्यशील पूंजी की अपर्याप्तता के विपरीत परिणाम - Opposite consequences of inadequacy of working capital


(1) विकास अवरूद्ध हो सकता है; फण्ड की उपलब्धता न होने से लाभदायक परियोजनाओं को हाथ में लेना कठिन कार्य हो जाता है


(2) संचालनात्मक योजनाओं का क्रियान्वयन जटिल हो जाता है और फलस्वरूप फर्म का लक्ष्य (लाभ) प्राप्त नहीं किया जा सकता ।


(3) दिन-प्रतिदिन के वायदों को पूरा करने में कठिनाइयों के कारण संचालनात्मक अक्षमता व अकुशलता पैदा हो सकती है।


(4) कार्यशील पूंजी की कमी के कारण स्थायी सम्पतियों का क्षमतापूर्वक प्रयोग नहीं हो सकता है और इस प्रकार विनियोगों पर प्रत्याय की दर नीचे की ओर आ सकती है।


(5) कार्यशील पूंजी में कमी के कारण आकर्षक साख अवसरों को प्रायः खोना पड़ता है।


(6) जब फर्म अल्पकालीन दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ हो, तो वह अपनी ख्याति / प्रसिद्धि को भी खो देती है। फलस्वरूप संस्था को कड़ी उधार शर्तों का सामना करना पड़ता है।