अनुकूलतम पूँजी संरचना - optimum capital structure

अनुकूलतम पूँजी संरचना - optimum capital structure


एक कंपनी पूँजी योजना तैयार करते समय दो बातों पर प्रमुख रूप से विचार करती है-


(अ) कंपनी की पूँजी आवश्यकताएँ क्या है ?


(ब) कंपनी अपनी पूँजी संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति किन साधनों से कर सकती है ?


उपरोक्त दोनों बातें आंतरिक एवं बाह्य कारकों से प्रभावित होती हैं तथा कंपनी के पूँजी संरचना एवं लाभदायकता को प्रभावित करती हैं। कंपनी के सही संचालन के लिए सही वित्तीयकरण किया जाना चाहिए। वित्तीय नियोजन के अंतर्गत सर्वप्रमुख समस्या पूँजी ढाँचे के निर्धारण की होती है।

पूँजी के विभिन्न साधनों के माध्य पारस्परिक अनुपात का निर्धारण विभिन्न मान्यताओं एवं परिस्थितियों पर निर्भर करता है। संगठन के समक्ष यह अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न यह होता है कि पूँजी मिश्रण का स्वरूप क्या हो ? पूँजी ढाँचे के मिश्रण का अनुपात प्राय: संगठन के उद्देश्यों पर निर्भर करता है। व्यवसाय का संचालन प्रायः स्वामियों के हितों में अभिवृद्धि के लिए किया जाता है।


अनुकूलतम पूँजी संरचना का आशय किसी कंपनी या निगम की पूँजीकरण में ऐसी प्रतिभूतियों के मिश्रण से है जिससे उस निगम या कंपनी के समता अंशधारियों को अनुकूलतम लाभ प्राप्त हो सके और प्रबंधकीय लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। तभी संभव हो सकता है

जब पूँजी संरचना में सम्मिलित विभिन्न वित्तीय साधनों की औसत लागत न्यंनतम हो और प्रबंधकीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समता अंशधारियों की अनुकूलतम आय के अतिरिक्त अन्य घटकों पर भी समुचित ध्यान दिया जाए प्रत्येक कंपनी द्वारा सृदृढ एवं संतुलित पूँजी संरचना का निर्माण करने के लिए पूँजीकरण की उचित मात्रा का निर्धारण किया जाता है। अनुकूलतम पूँजी संरचना की प्रमुख विशेषता विभिन्न प्रकार की पूँजियों का एक आदर्श मिश्रण है, जो न केवल कंपनी का उचित पूँजीकरण करता हो वरन् पूँजी लागत को भी न्यूनतम स्तर पर रखता है।


अतः पूँजी ढाँचे का निर्माण इस प्रकार होना चाहिए कि कंपनी के अंशधारकों/ स्वामियों को अधिकतम लाभ प्राप्त हो सकें तथा पूँजी के विभिन्न साधनों की औसत लागत न्यूनतम हो।

अतः पूँजी संरचना के निर्धारण हेतु उन सारे पहलुओं के विवेचन की आवश्यकता होती है जो इससे संबंधित होते है।


संक्षेप में, एक अनुकूलतम पूँजी संरचना में समता अंश पूँजी पूर्वाधिकार अंश पूँजी, दीर्घकालीन ऋणों तथा ऋणपत्रों का एक ऐसा मिश्रण रखा जाता है, जिससे आवश्यकता अनुसार पूँजी प्राप्त करने के लिए न्यूनतम पूँजी लागत वहन करनी पड़े तथा वित्तीय लक्ष्यों की भी प्राप्ति हो जाए। वस्तुत: अनुकूलतम पूँजी ढाँचे की संरचना के संदर्भ में कोई विधि मान्य सूत्र नहीं है। कतिपय विशेषताओं एवं गुणों के आधार पर ही अनुकूलतम पूँजी ढाँचे की संरचना का निर्माण किया जा सकता हैं। संक्षेप में अनुकूल पूँजी की संरचना हेतु निम्नलिखित गुण आवश्यक होती है-


1. पूँजी संरचना की योजना जटिलताओं से मुक्त तथा समझने में आसान होनी चाहिए।


2. पूँजी कलेवर ऐसा होना चाहिए जिससे आवश्यकतानुसार पूँजी की प्राप्ति संभव हो सके।


3. पूँजी ढाँचे में कठोरता नहीं होनी चाहिए। यह एक ऐसा ढाँचा होना चाहिए जिसमें भविष्य में आवश्यकतानुसार हेरफेर किया जा सकता है अतः यह लचीला होना चाहिए।


4. पूँजी ढाँचे में विभिन्न प्रकार की पूँजी का अनुकूलतम मिश्रण होना चाहिए ताकी संतुन बना रहे।


5. अनुकूलतम पूँजी संरचना वहीं होती है जिसकी पूँजी लागत न्यूनतम होती है।


6. एक सुदृढ एवं संतुलित पूँजी ढाँचा वही है जिसमें स्वामित्व नियंत्रण खोये बिना पूँजी दंतिकरण का प्रयोग कर प्रति अंश अर्जन बढ़ाने का गुण विद्यमान हो।


7. संगठन की पूँजी संरचना में जोखिम की मात्रा न्यूनतम होनी चाहिए। संगठन में कुछ ऐसे आंतरिक एवं बाह्य तथ्व अवश्य होते हैं, जो संगठन में जोखिम की मात्रा को अभिवृद्धि करते रहते हैं- लागत में वृद्धि मूल्य में कमी, करो मे वृद्धि तथा ब्याज दरों में वृद्धि आदि। इन जोखिम पूर्व स्थितियों का संगठन की लाभदेयता पर आत्यधिक प्रभाव पड़ता है। इसके लिए यह आवश्यक होता है कि संगठन का पूँजी ढाँचा इस प्रकार उपरोक्त जोखिमों को आसानी से सहन कर सके।


8. पूँजी संरचना की सफलता पूँजी लागत को न्यूनतम कर, प्रति अंश अर्जन अधिकतम करने में होते है।