वित्तीय विवरणों में हित रखने वाले पक्ष अथवा इनका महत्व - Parties Interested in Financial Statements or their Importance
वित्तीय विवरणों में हित रखने वाले पक्ष अथवा इनका महत्व - Parties Interested in Financial Statements or their Importance
वित्तीय विवरण किसी कम्पनी के एक बहुत ही उपयोगी प्रपत्र माने जाते हैं। हेनरी फेयोल के शब्दों में, "वित्तीय विवरण किसी भी उपक्रम की आँखें होते हैं।" कम्पनी के क्रियाकलापों से सम्बन्धित प्रत्येक पक्ष इनमें हित रखता है। कम्पनी की अर्जन क्षमता, शोधनक्षमता एवं इसके विवरण में प्रबन्ध व अशधारियों के साथ-साथ विनियोक्ता ऋणदाता, ऋण-पत्रधारक, बैंक, सरकार आदि सभी पक्ष पर्याप्त रुचि रखते हैं। इन विभिन्न पक्ष के लिये इनका महत्व इस प्रकार है-
(1) प्रबन्ध (Management) वित्तीय विवरणों का सर्वप्रथम उपयोग उन लोगों की सेवा करना है जो व्यवसाय का संचालन व नियन्त्रण करते हैं। प्रबन्ध अपनी नीतियों और निर्णय की सफलता चिट्ठे, लाभ-हानि खाते और अंकेक्षक के प्रतिवेदन से ही आँकता है।
इनके आधार पर ही वह अपने कर्मचारियों की कार्यकुशलता का विश्लेषण एवं जाँच कर सकता है। ये विवरण ही प्रबन्ध को अपने व्यवसाय की सम्पूर्ण उद्योग से या उसी व्यवसाय में लगी अन्य इकाइयों से अथवा अपने ही व्यवसाय के पिछले क्रियाकलापों से तुलना करने का अवसर प्रदान करते हैं। इनसे ही प्रबन्ध को विवरणात्मक रूप में उन कारणों का भी ज्ञान हो जाता है, जो व्यावसायिक स्थिति के परिणाम के लिये उत्तरदायी होते हैं। ये विवरण ही प्रबन्ध की वित्तीय नीति, नियोजन व नियंत्रण के आधार होते है। वास्तव में व्यवसाय के संचालन और नियंत्रण के लिए ये विवरण प्रबन्ध के लिये आवश्यक उपकरण होते हैं।
(2) बैंक (Bankers) बैंक अपने ग्राहकों को साख सुविधायें प्रदान करते है।
ऋण देते समय प्रत्येक बैंक इनकी अन्तिम रूप से वसूली में ही रूचि नहीं रखता, बल्कि वह यह भी जानना चाहता है कि उसका ऋण वायदानुसार समय पर भुगतान कर दिया जाये प्रत्येक बैंक के बहुत से ग्राहक होते हैं तथा विस्तृत क्षेत्र में फैले हुए होते हैं। एक बैंक के लिये उनसे व्यक्तिगत सम्पर्क सामान्यतया सम्भव नहीं होता। अतः बैंक अपने ग्राहक की आर्थिक स्थिति, लाभार्जन क्षमता, भावी योजनाओं व विकास के सम्बन्ध में आवश्यक सूचनायें वित्तीय विवरणों से ही प्राप्त करता है। वित्तीय विवरणों में चिट्ठा बैंक के लिये सबसे अधिक महत्वपूर्ण प्रलेख होते हैं। इसके विश्लेषण से ही बैंक ग्राहक की वास्तविक व तकनीकी शोधनक्षमता का ज्ञान प्राप्त करता है तथा वित्तीय जोखिम की मात्रा ( degree of financial risk) निर्धारित करता है।
(3) व्यापारिक लेनदार (Trade Creditors) इनका भुगतान अल्पकाल में ही करना होता है।
अतः बैंक की तरह ये भी कम्पनी की तकनीकी शोधनक्षमता पर ही अपना ध्यान केन्द्रित रखते हैं। यद्यपि यह साख अधिकतर क्रेता की आर्थिक स्थिति की व्यापारिक पूछताछ, ईमानदारी और भुगतान क्षमता के आधार पर प्रदान की जाती है फिर भी वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिये वित्तीय विवरणों का प्रयोग बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।
(4) विनियोगकर्ता ( Investors) – विनियोक्ताओं के अन्तर्गत कम्पनी के अशधारी तथा दीर्घकालीन ऋणदाता आते हैं। इनका कम्पनी में स्थायी हित होता है। अतः इनका दृष्टिकोण बैंक या व्यापारिक लेनदारों से भिन्न होता है। इनका मुख्य उद्देश्य अपने मूलधन की सुरक्षा एवं उस पर पर्याप्त आय प्राप्त करना होता है। अतः विनियोक्ता कम्पनी के सम्पूर्ण आर्थिक ढाँचे की दृढ़ता का विवेचन करता है।
वह लाभ-हानि खाते से कम्पनी की अर्जन-शक्ति व उसमें वृद्धि के सुअवसरों तथा प्रबन्धकीय कुशलता का पता लगाता है और चिट्ठे से कम्पनी की शोधनक्षमता (वास्तविक और तकनीकी दोनों ही) और पूँजी संरचना का ज्ञान प्राप्त करता है। कम्पनी की क्रियाओं में प्रबन्धकों की ईमानदारी व विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं का पता लगाने के लिये अंकेक्षक के प्रतिवेदन का अध्ययन किया जाता है। कम्पनी की विकास योजनाओं तथा भावी सम्भावनाओं के सम्बन्ध में जानकारी के लिये अध्यक्षीय भाषण और संचालकों के प्रतिवेदन का अध्ययन करना चाहिये।
(5) सरकार ( Government) सरकार कम्पनी की कराधान क्षमता के निश्चयन तथा कर निर्धारण में उसके वित्तीय विवरणों का ही उपयोग करती है।
इनसे ही देष के आर्थिक उत्थान का अनुमान लगाया जाता है। ये विवरण ही कम्पनी कर नियमों के आधार होते हैं। कम्पनी के कुप्रबन्ध का ज्ञान भी इन्हीं विवरणों से होता है। इन्हीं विवरणों के आधार पर सरकार यह आश्वस्त होती है कि इन विवरणों की तैयारी तथा प्रकाशन में कम्पनी अधिनियम की विभिन्न व्यवस्थाओं का पालन किया गया है या नहीं।
(6) व्यवस्थापकीय संस्थायें (Regulatory Agencies) विभिन्न सरकारी विभाग और एजेन्सियाँ (जैसे कम्पनी लॉ बोर्ड, कम्पनियों का रजिस्ट्रार, सेबी और विभिन्न कर प्राधिकारी) वित्तीय विवरणों को न केवल कर निर्धारण के आधार के रूप में प्रयोग करते हैं वरन् व्यवसायों के व्यवस्थापकीय विधा के अन्तर्गत परिचालन के मूल्यांकन के लिये भी करते हैं। आय कर, बिक्री कर आदि के निर्धारण के लिये आवश्यक सूचनायें इन्हीं विवरणों से ही प्राप्त होती हैं।
(7) स्कन्ध विनिमय (Stock Exchange) स्कन्ध विनिमय के दलालों आदि को कम्पनियों के सम्बन्ध में आवश्यक सूचनायें उनके वित्तीय विवरणों से ही प्राप्त होती है। इन विवरणों के आधार पर ही अंशों का मूल्य निर्धारित किया जाता है।
( 8 ) शोध छात्र (Research Scholars) वित्तीय विवरण शोध छात्रों द्वारा लेखाकन सिद्धान्तो और व्यावसायिक मामलों और व्यवहारों में उनके शोध में भी प्रयोग किये जाते हैं। उपर्युक्त के अतिरिक्त देश के नेता, अर्थशास्त्री, श्रम नेता तथा कर्मचारी और समाजसेवी सभी कम्पनी के वित्तीय विवरणों में रुचि रखते हैं। इनके आधार पर ही ये कम्पनियों के क्रियाकलापों की टीका-टिप्पणी करते हैं। श्रम नेता इन विवरणों के आधार पर ही अपने सदस्यों के वेतन वृद्धि, बोनस व अन्य सुविधाओं के लिये माँग करते हैं।
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