पैवलाव का पारंपरिक /शास्त्रीय अनुबंधन का सिद्धान्त - Pavlov's Classical Conditioning Theory
पैवलाव का पारंपरिक /शास्त्रीय अनुबंधन का सिद्धान्त - Pavlov's Classical Conditioning Theory
अनुबंधन का अर्थ है अस्वभाविक उत्तेजना के प्रति स्वाभाविक क्रिया का उत्पन्न होना। पारंपरिक शास्त्रीय अनुबंधनसे तात्पर्य सौखने की उस प्रक्रिया से है जिसमें दो उद्दीपन (घटनाएँ) एक दूसरे से इस प्रकार सम्बद्ध होते हैं कि एक घटना का संयोग दूसरी घटना के होने की संभावना को दृढ़तापूर्वक पूर्वानुमानित करता है। उदाहरण के लिए एक बालक अपना बस्ता लिए बाजार के रास्ते विद्यालय जा रहा है। रास्ते में हलवाई की दूकान पड़ती है। दुकान पर सजी हुई मिठाइयों को देखकर बच्चेने मुँह से लार टपकने लगती है। धीरे-धीरे यह एक स्वाभाविक क्रिया बन जाती है। अतः जब अस्वाभाविक उत्तेजना के प्रति स्वाभाविक किया होती है तो वह पारंपरिक शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धान्त कहलाता है। यह प्रक्रिया पावलाव द्वारा किये गये निम्नलिखित प्रयोग से स्पष्ट हो जाती है।
पैवलाव द्वारा किए गए प्रयोग में एक कुत्ते को भूखा रख कर उसे प्रयोग वाली मेज के साथ बांध दिया गया। इस कुत्ते की लार ग्रन्थियों का आपरेशन कर दिया गया ताकि उसकी लार की बूंदों को परखनली में एकत्रित करके लार की मात्रा मापी जा सके। प्रयोग में प्रारंभ में घंटी बजाने के तुरंत बाद कुत्ते को भोजन दिया गया। भोजन देखकर कुत्ते के मुंह में लार आना स्वाभाविक था। इस प्रयोग को कई बार दोहराया गया और एकत्रित लार की मात्रा का माप लिया जाता रहा। प्रयोग के आखिरी चरण में भोजन न देकर केवल घंटी बजाने की व्यवस्था की गई। इस अवस्था में भी कुत्ते के मुंह से लार टपकी। इस प्रयोग द्वारा यह देखने को मिला कि भोजन जैसे प्राकृतिक उददीपन (natural stimulus) के अभाव में भी घंटी बजने जैसे कृत्रिम उददीपन के प्रभाव से भी कुत्ते ने लार टपकाने जैसी स्वाभाविक अनुक्रिया (Natural Response) को व्यक्त किया। क्योंकि कुत्ते ने यह सीखा कि जब घंटी जब बजती है तब खाना मिलता है। पैवलाव ने इस प्रकार के सीखने को अनुबन्धन द्वारा सीखना (Leaming by conditioning) कहा। इस प्रयोग में भोजन अप्रतिबंधित उद्दीपन (Uncoditioned (stimulus) था क्योंकि लार बनने की प्रतिक्रिया स्वतथी और कुत्ते के सीखने पर निर्भर नहीं थी। इसलिए यह प्रतिक्रिया भी अप्रतिबंधित अनुक्रिया (Uncoditioned Response) थी।
जबकि घंटी की आवाज एक प्रतिबंधित उद्दीपन था क्योंकि लार उत्पादन की प्रतिक्रिया घंटी पर निर्भर न करते हुए उसके तुरंत बाद मिलने वाले भोजन के लिए थी। अतव्यहा लार उत्पादन एक प्रतिबंधित अनुक्रिया के रूप में लिया गया।
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