व्यक्तित्व परीक्षण - personality test

व्यक्तित्व परीक्षण - personality test


निर्देशन तथा परामर्श का आधार ही व्यक्तित्व है। विद्यालय में निर्देशन कार्यक्रम को प्रभावी बनाने हेतु, निर्देशन कार्यकर्ता को व्यक्तित्व की अवधारणा तथा मूल्यांकन की विधियों को अच्छी तरह समझ लेना आवश्यक है । व्यक्तित्व अंग्रजी भाषा के Personality शब्द का हिन्दी रूपान्तरण है । अंग्रजी भाषा का शब्द लैटिन भाषा के 'Persona´ से बना है। जिसका अर्थ वेशभूषा या नकाब होता है। आलपोर्ट महोदय के अनुसार "व्यक्तित्व के अन्दर उन मनोदैहिक गुणों का गत्यातत्मक संगठन है जो पर्यावरण के साथ उसका विशिष्ट समायोजन स्थापित करता है।"


उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में 'गॉल' तथा 'स्पंरजीम' ने मुखाकृति तथा खोपड़ी के उभारों के आधार पर व्यक्ति में सैंतीस शक्तियों की एक सूची दी । जिसमें जीने की इच्छा से लेकर विनाश प्रवृत्ति तक कितनी ही प्रवृत्तियाँ सन्निहित थीं।

इसी प्रकार अन्य विद्वानों के व्यक्तित्व को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत किया । परन्तु ये सारी विधियाँ वैज्ञानिक नहीं थीं। व्यक्तित्व मापन के लिए 1880 में गाल्टन ने प्रश्नावली विधि का प्रयोग किया तथा वुडवर्थ ने 1918 में पहली अनुसूची बनाई । इसके पश्चात विभिन्न मनोवैज्ञनिकों ने व्यक्तित्व मापन की विभिन्न विधियाँ बताई।


व्यक्तित्व मापन की विभिन्न विधियों का समग्र अध्ययन करने पर इन्हें निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है -


I. व्यक्तिनिष्ठ विधियाँ -: ये विधियाँ व्यक्ति के अनुभव तथा धारणा पर निर्भर होती हैं। जीवन इतिहास, प्रश्नावली, साक्षात्कार तथा आत्मकथा लेखन ऐसी ही विधियाँ हैं ।


II. वस्तुनिष्ठ विधियाँ: ये विधियाँ व्यक्ति के बाहरी व्यवहार पर आधारित होती हैं। ये विधियाँ अधिक वैज्ञानिक और विश्वसनीय हो जाती हैं। प्रमुख वस्तुनिष्ठ विधियाँ निम्न प्रकार की हैं -


i. क्रम निर्धारण विधि ।


ii. कोटिक्रम निर्धारण विधि ।


iii. व्यक्तित्व परिसूची


iv. समाजमिति विधि। V. निरीक्षण विधि


vi. परिस्थिति परीक्षण।


III. प्रक्षेपी विधियाँ -: इन विधियों द्वारा व्यक्ति के अचेतन मन के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। जबकि अन्य विधियों का सम्बन्ध व्यक्ति के चेतन व्यवहार से होता है। इन विधियों द्वारा व्यक्ति की दबी हुई इच्छाओं, व्यवहारों, रूचियों आदि की खोजकर व्यक्ति के व्यवहार का मूल्यांकन किया जाता है। प्रमुख प्रक्षेपी विधियाँ निम्नप्रकार की हैं-


i. रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण।


ii. प्रसंगात्मरक बोध परीक्षण (TAT)


III. बालक बोध परीक्षण (CAT)।


iv. वाक्य पूर्ति परीक्षण ।


V. कहानी पूर्ति परीक्षण।


vi. ड्राइग-पेंटिंग एवं मूर्तिकला


उपर्युक्त व्यक्तित्व परीक्षणों की सहायता से व्यक्ति के व्यक्तित्व सम्बन्धी ज्ञान प्राप्त करके निर्देशन में उपयोग कर लिया जाता है। इस प्रकार निर्देशनकर्ता प्रभावी निर्देशन प्रदान करने में सफल हो जाता है।