प्लेटो - PLATO

प्लेटो - PLATO


परिचय:


प्लेटो का जन्म एथेन्स के एक अमीर एवं प्रसिद्ध परिवार में 429 से 426 ई.पू. के बीच हुआ उनकी माता सोलन वंश की तथा पिता काइस वंश के थे। काइस एथेंस का अंतिम राजा था और सोलन एथेंस का प्रसिद्ध व्यवस्थापक था जिसने एथेंस को प्रसिद्ध कानून भेंट किया था इन प्रसिद्ध पूर्वजों के कारण प्लेटो के परिवार को ऐश्वर्य एवं सामाजिक सम्मान दोनों ही प्राप्त थे। प्लेटो का पालन-पोषण अमीरों की भाँति हुआ था। अमीर घराने का होने के कारण प्लेटो ने तत्कालीन उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। अपने पिता अरिस्टन से उसने कुश्ती लड़ना सीखा। उसका स्वास्थ्य बहुत अच्छा था और देखने में वह सुंदर था। व्यायाम में दक्ष होने के कारण उसने कई प्रतियोगिताएं जीती। उसने एथेन्स की सेना में भी काम किया था। प्लेटो को उस समय की सबसे बढ़िया शिक्षा मिली थी। इसका अध्यापक हिरक्लिटसका समर्थक था और ऐसी संभावना है कि उसने प्लेटो को हिरक्लिटस के सिद्धांतों का जान प्रदान किया हो।


प्लेटो की प्रकृति और उसके प्रारम्भिक रहन-सहन से कोई भी व्यक्ति यह अनुमान लगा सकता है कि राजनीति उसके लिए स्वाभाविक कार्यक्षेत्र रहा होगा। राजघराने के व्यक्ति से सामान्यतः यही आशा की जाती है, किंतु एथेन्स की तत्कालीन परिस्थिति ने उसे राजनीति की और जाने से रोका प्लेटो के युवावस्था में एथेन्स का सूर्य अस्तांचल की और था। स्पर्धा में सामाजिक उन्नति हो रही थी और मैसेडोनिया राज्य विकास के पथ पर था। पैलोपोलियन युद्ध में एथेन्स की बची हुई शक्ति भी समाप्त हो गई। फलतः एथेन्स में प्रजातंत्र के स्थान पर पुनः कुलीनतंत्र स्थापित हुआ। 30 निर्दयी शासकों के हाथ में शासन सूत्र आ गया। उनमें से दो तो प्लेटो के रिश्तेदार ही थे और दोनों ने सुकरात के साथ जिस निर्दयता का व्यवहार किया, उसने प्लेटो के मन में राजनीति से वैराग्य उत्पन्न कर दिया। एथेन्स में बाद में पुनः प्रजातंत्र आया, किंतु इस बार एथेन्स सुकरात की हत्या के पाप का भागी हो चुका था। इन सब स्थितियों के कारण प्लेटो राजनीति से विरक्त हो गया।


20 वर्ष की अवस्था में प्लेटो सुकरात के सम्पर्क में आया और उससे इतना प्रभावित हुआ कि उसने अपने व्यक्तित्व को सुकरात के व्यक्तित्व में विलीन कर दिया तथा दर्शन को अपना प्रिय विषय बना लिया। लगभग 8 वर्ष तक प्लेटो सुकरात का शिष्य बना रहा। 1399 ई. पूर्व में सुकरात को विष दिया गया। उस समय प्लेटो की अवस्था 28 वर्ष की थी। इसके बाद से प्लेटो के जीवन का दूसरा भाग प्रारंभ होता है। अपने परम प्रिय गुरु की निर्मम हत्या से प्लेटो की आत्मा विद्रोह कर उठी जिस एथेन्स ने उसके गुरु की कीमत नहीं पहचानी, वहाँ रहना प्लेटो ने निरर्थक समझा और एथेन्स के वातावरण को अपने लिए प्रतिकूल पाकर प्लेटो अपने नगर स्वतः निर्वासित हो गया। प्लेटो 10 वर्ष तक अपने देश से बाहर रहा और अन्य स्थानों के अतिरिक्त उसने मेगारा, मिस्र तथा इटली में काफी समय बिताया। कुछ लोग तो कहते हैं, कि वह भारतवर्ष में भी आया। मेगारा में उसका मित्र व सहपाठी यूक्लिड रहता था। यूक्लिड सुप्रसिद्ध गणितज्ञ था। प्लेटो की बिदेश यात्रा का प्रथम गंतव्य मेगारा ही बना और यहाँ पर उसने यूक्लिड के सहयोग से प्रसिद्ध दार्शनिक पार्मेनाइडिस के सिद्धांत का अध्ययन किया।

मिस्र में रहने के दौरान प्लेटो ने सभ्यता के विकास को अपनी आँखों से देखा और वहाँ की सभ्यता पर उसे बहुत आश्चर्य हुआ वहाँ पर उसको पता चला कि मिस्र की सभ्यता की तुलना में एथेन्स की सभ्यता बहुत हीन है। इटली में उसने पायथागोरस के विचार का अध्ययन किया। इटली जाकर उसने शासन व्यवस्था का अध्ययन किया। इस प्रकार 10 वर्ष तक विदेश भ्रमण के बाद वह एथेन्स वापस आया और अपनी विश्व प्रसिद्ध पाठशाला 'एकेडमी की स्थापना की तथा राजनीतिक जीवन से अलग रहकर प्लेटो ने शिक्षा देना प्रारंभ किया। प्लेटो के जीवन का यह तीसरा भाग था। यह काम वह जीवन के अंत तक लगभग 40 वर्ष तक करता रहा।


प्लेटो ने दर्शन की शिक्षा की प्रेरणा सुकरात से प्राप्त की थी, किंतु दोनोंके रहन-सहन में बड़ा अंतर था। सुकरात गरीब घराने में पैदा हुआ था और गरीबी में ही उसकी मृत्यु हुई। वह फर्टपुराने कपड़े पहन कर ही गुजर करता था। सुकरात एथेन्स का एक गरीब नागरिक था, किंतु प्लेटो की स्थिति इससे भिन्न थी। प्लेटो उच्च कुल में पैदा हुआ था और उसने गरीबी में अपना जीवन नहीं व्यतीत किया था। रहन-सहन का यह अंतर दोनों की शिक्षा-प्रणाली में भी प्रकट हुआ। सुकरात मंडी या चौराहे अर्थात सार्वजनिक स्थान पर शिक्षा देता था और प्लेटो ने एक अकादमी अर्थात निश्चित पाठशाला स्थापित की।