प्लेटो का शिक्षा दर्शन - Platonic Philosophy of Education

प्लेटो का शिक्षा दर्शन - Platonic Philosophy of Education


प्लेटो के शिक्षा दर्शन संबंधी विचार उसकी दो प्रमुख कृतियों रिपब्लिक तथा 'लॉज' में प्रकट हुए हैं। प्लेटो के अन्य संबादों में भी उसके छुटपुट विचार मिलते हैं किंतु उपर्युक्त दो पुस्तकों में तो शिक्षा पर बृहद विवेचन किया गया है। शिक्षा के इतिहास की दृष्टि से रिपब्लिक शिक्षा सम्बन्धी विचारों पर संसार में सबसे पहली पुस्तक है।


रिपब्लिक पहले लिखी गई और लॉज बाद में दोनों पुस्तकों को पढ़ने से यह पता चलता है कि प्लेटो के शिक्षा संबंधी विचारों में एकरूपता नहीं है। रिपब्लिक में वह नितांत आदर्शबादी होकर हमारे समक्ष आता है और स्पष्ट घोषणा करता है कि अजानता ही सारी बुराइयों की जड़ है, किंतु 'लॉज' में वह अज्ञानता को उतना बुरा नहीं मानता। रिपब्लिक की रचना प्लेटो ने अपने यौवनकाल में की थी, जबकि लॉज बृद्धावस्था में रची गई पुस्तक थी। ज्यों-ज्यों प्लेटो के विचार परिपक्व होते गये, वह शिक्षा संबंधी विचारों में परिवर्तन करता गया। किंतु अपने सभी संवादों में प्लेटो शिक्षा की क्षमता को स्वीकार करता है और वह समाज के कल्याण का आधार शिक्षा को ही मानता है।