रोकड़ प्रवाह विवरण की तैयारी - Preparation of Cash-Flow Statement
रोकड़ प्रवाह विवरण की तैयारी - Preparation of Cash-Flow Statement
रोकड़ प्रवाह विवरण की तैयारी करने हेतु निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जाती है -
(1) रोकड़ और रोकड़ तुल्य खातों में शुद्ध वृद्धि / कमी की गणना (Calculation of Net Increase/Decrease in Cash and Cash Equivalents Accounts ) - रोकड़ के अभिप्राय हस्तगत रोकड़ तथा बैंकों में जमा माँग जमाओं से है। रोकड़ तुल्य से अभिप्राय अल्पकालीन उच्चतम तरल विनियोगों से हैं जो कि तुरन्त रोकड़ में परिवर्तनीय हो और जो अपनी परिपक्वता के इतने निकट हो कि, उनके मूल्य में परिवर्तन की जोखिम महत्त्वहीन हो। सरकारी प्रतिभूतियों, ट्रेजरी बिल्स एवं पूर्वाधिकारी अश आदि जो प्राप्ति की तिथि से तीन माह के अन्तर्गत परिपक्व हो रहे है, रोकड़ तुल्य के उदाहरण हैं। रोकड़ और रोकड तुल्य खातों में शुद्ध वृद्धि / कमी की गणना तुलनात्मक चिट्ठो में प्रदत्त इन खातों की तुलना करके की जाती है।
(2) परिचालन क्रियाओं द्वारा उपलब्ध या उपयोग की गई शुद्ध रोकड़ की गणना (Calculation of the Net Cash Provided ( used) by Operating Activities) - इसकी गणना लाभ-हानि खाता, तुलनात्मक चिट्ठा और सम्बन्धित अतिरिक्त सूचना का विश्लेषण करके की जाती है। इसकी विस्तृत विवेचना पीछे की जा चुकी है।
(3) विनियोजन और वित्तीयन क्रियाओं द्वारा उपलब्ध या उपयोग की गई शुद्ध रोकड़ की गणना (Calculation of the Net Cash Provided ( used) by Investing and Financing Activities) - अतिरिक्त सूचनाओं को ध्यान में रखते हुए चिट्ठों की मदों में रोकड़ पर प्रभाव निर्धारित करने के लिये सभी अन्य परिवर्तन विश्लेषित किये जाने चाहिये रोकड़ पर प्रभाव को विनियोजन और वित्तीय क्रियाओं में वर्गीकृत किया जाना चाहिये।
(4) रोकड़- प्रवाह विवरण की तैयारी ( Preparation of a Cash Flow Statement) – इसमें परिचालन, विनियोजन एवं वित्तीय क्रियाओं के अलग-अलग शीर्षकों के अन्तर्गत सभी रोकड़ अन्तर्वाहों और बहिर्वाहों (Cash inflows and outflows) को प्रकट किया जाता है तथा प्रत्येक क्रिया द्वारा उपलब्ध या उपयोग किया गया शुद्ध रोकड़ प्रवाह दर्शाया जाता है।
(5) इसके पश्चात यह देख लेना चाहिये कि परिचालन, विनियोजन एवं वित्तीय क्रियाओं से शुद्ध रोकड प्रवाहों का योग उपर्युक्त (1) के अन्तर्गत ज्ञात किये गये रोकड और रोकड तुल्य के खातों में शुद्ध वृद्धि (कमी) के बराबर होना चाहिये।
(6) गैर- रोकड़ और गैर-रोकड़ तुल्य विनियोजन एवं वित्तीयन व्यवहारों को रोकड़ प्रवाह विवरण के पश्चात् अलग अनुसूची में दिखाना चाहिये।
नोट : संशोधित लेखांकन प्रमाप- 3 (AS-3) के अनुसार रोकड़ - प्रवाह विवरण के अन्तर्गत करो के लिये आयोजन को एक गैर-चालू मद मानते हुये लाभों के नियोजन के रूप में प्रदर्शित करना चाहिये।
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