व्यावसायिक समायोजन - professional adjustment
व्यावसायिक समायोजन - professional adjustment
रोटी रोजी कमाना हम सभी के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इसी में हमें अपनी व्यक्तिगत तथा सामाजिक मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उचित साधन प्राप्त होते हैं। विद्यालय जीवन हो या मां-बाप तथा घर-परिवार द्वारा प्राप्त प्रशिक्षण सभी की राह में हमें किसी न किसी व्यवसाय को अपनाने का अवसर प्रदान करती है ओर आगे जाकर यह व्यवसाय हमें किस रूप में व्यावसायिक संतुष्टि प्रदान कर हमारी आशाओं तथा आकांक्षाओं की पूर्ति करता है उसी पर अधिकतर हमारा व्यावसायिक समायोजन निर्भर करता है। हम लोग अपने प्रयत्नों तथा मिलने वाले अवसरों के फलस्वरूप तरह तरह के व्यवसाय अपनाते है तथा अपने अपने ढंग से कार्य करते हुए उनसे समायोजित होने का प्रयत्न करते हैं। जितने हम अपने व्यवसाय में समायोजित रहते हैं उतना ही हमें लाभ एवं सहयोग जीवन के अन्य क्षेत्रों में पूरी तरह समायाजित होने मे मिलता है। यह बात दूसरी तरफ से लागू होती है।
जितने हम समायोजन के अन्य क्षेत्रों व्यक्तिगत या सामाजिक होने में अधिक समायोजित होते हैं उतनी ही सहायता हमें व्यावसायिक रूप से समायोजित होने में मिलती है। अब प्रश्न यह उठता है कि व्यावसायिक रूप से समायोजित व्यक्ति किसे कहा जाए। इस संदर्भ में किए गए विभिन्न अनुसंधानों द्वारा सामान्य रूप से जो परिणाम सामने आये हैं उनमें व्यावसायिक रूप से समायोजित होने वाले व्यक्तियों में अधिकतर निम्न मुख्य बातें दिखाई देती है:
(1) अपने व्यवसाय के चुनाव से वे संतुष्टि अनुभव करते हैं वह यह नहीं कहते कि उनकी तो किस्मत ही खराब थी या उन्होंने मजबूरी में अपने इस व्यवसाय का चुनाव किया है।
(2) अपने व्यवसाय से संबंधित कार्यों को करने में उन्हें प्रसन्नता का अनुभव होता है तथा इन्हें करने के बाद वे प्राय: संतुष्टि का अनुभव करते हैं। इस प्रकार व्यावसायिक संतुष्टि की भावना इन व्यक्तियों में अच्छी तरह पायी जाती है।
(3) अपने व्यवसाय और काम-काज की दुनिया से संबंधित विभिन्न परिस्थितियों से संतुष्ट नजर आते हैं। काम काज संबंधी उपकारण उठने बैठने, तथा काम करने की जगह तथा उपलब्ध सुविधाओं आदि के अभाव का वे रोना नहीं रोते या उन्हें लेकर वे परेशान नहीं होते हैं।
(4) अपने व्यावसायिक साथियों तथा अधिकारियों से उनका ठीक प्रकार समायोजन रहता है। पारस्परिक संबंधों को निभाना और उचित तालमेल कर अपने व्यावसायिक कार्यों में कोई ढील न आने देना उनके व्यक्तित्व की एक अच्छी विशेषता होती है।
(5) उनमें अपने व्यवसाय के प्रति पूरी निष्ठा होती है तथा उसके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोंण होता है वे अपने व्यवसाय को छोड़कर दूसरा व्यवसाय अपनाने की बात नहीं सोचते रहते। वह यह भावना रखते हैं कि व्यवसाय में ऐसा बहुत कुछ है जिससे वे अपने आपको तथा समाज को प्रगति के मार्ग पर ले जा सकते हैं।
(6) उनका व्यवसाय उनको पदोन्नती के समुचित अवसर प्रदान करता है कुछ कारणों से ऐसा न होने पर वे अधिक विचलित नहीं होते तथा ऐसा अनुभव नही करते कि स्थानान्तरण या प्रमोशन को लेकर उन्हें तंग किया जा रहा है अथवा भेदभाव हो रहा है।
(7) अपने व्यवसाय की कामकाज की बातों में वे पर्याप्त सुधार लाने में पूरा विश्वास रखते हैं उनमें सृजनात्मकता के तत्व भी उपयुक्त मात्रा में पाये जाते हैं जिसका प्रमाण वे यदा कदा देते रहते हैं।
(8) वे अपने व्यवसाय से आर्थिक दृष्टि से भी समुचित रूप से संतुष्टि अनुभव करते हैंवे दूसरे व्यवसायों से जिनमें अधिक पैसे या सुविधाएं मिलती हैं अपने व्यवसाय की तुलना कर अपने मन में किसी प्रकार के हीन या विरोधी भावना उत्पन्न होने देते।
(9) अपने व्यवसाय की गरिमा तथा प्रतिष्ठा बनाए रखने का वे समुचित प्रयत्न करते है तथा इस कार्य में अपने साथियों तथा अधिकारियों का पूरा साथ देते है।
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