व्यावसायिक निर्देशन - professional guidance
व्यावसायिक निर्देशन - professional guidance
नेशनल वोकेशनल गाइडेन्स एसोसियेशन (अमेरिका) द्वारा दी की गई परिभाषा (1937) के अनुसार "व्यावसायिक निर्देशन एक व्यवसाय को चुनने, इसके लिए तैयारी करने, प्रविष्ट होने तथा इसमें प्रगति करने हेतु एक व्यक्ति को दी जाने वाली सहायता की प्रक्रिया है ।"
अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (1949) के अनुसार, व्यावसायिक निर्देशन व्यक्ति की विशेषताओं और व्यावसायिक अवसरों के साथ उसके संबंध को समुचित रूपमें ध्यान रखते हुए व्यावसायिक चयन व प्रगति संबंधी व्यक्ति की समस्याओं का समाधान करने हेतु दी जाने वाली सहायता है।
नेशनल वोकेशनल गाइडेन्स एसोसियेशन का मानना है कि व्यावसायिक निर्देशन का मूल कार्य व्यक्तियों को कैरिअर बनाने, भविष्य की योजना बनाने, व्यावसायिक क्षेत्र का चुनाव करने तथा संतोषजनक व्यावसायिक समायोजन स्थापित करने के लिए सहायता देना है।
पार्सन्स द्वारा स्थापित ब्यूरो की गतिविधियों में युवकों को (1) व्यवसाय का चुनाव करने तथा (2) चुने गये व्यवसाय के लिए तैयारी करने में सहायता देना सम्मिलित था। इस कार्य को सम्पन्न करने के लिए पार्सन्स ने (1) व्यक्ति अभिक्षमताओं, क्षमताओं, रूचियों, आकांक्षाओं और उसके कारणों के समझनें (2) विभिन्न व्यावसायिक दिशाओं की जरूरतों, सफलता की दशाओं, गुण और दोष, क्षतिपूर्ति, अवसर तथा संभावनाओं को जानने तथा (3) उपर्युक्त दोनों के मध्य तर्क के आधार पर सम्बन्ध स्थापित करने के महत्व पर बल दिया।
जैसा कि उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है व्यावसायिक निर्देशन पार्सन्स के द्वारा निर्धारित सीमाओं से बाहर फैला हुआ है। आरम्भ में यह माना गया कि व्यावसायिक निर्देशन का लक्ष्य व्यक्ति की विशेषताओं और व्यावसायिक जगत अथवा व्यवसाय विशेष की माँगों जरूरतों के मध्य मेल मैचिग बैठानें तथा उसके आधार पर व्यक्ति के लिए उपयुक्त व्यवसाय का चुनाव कर लेने में व्यक्ति की सहायता करना है। बाद में उसके लक्ष्य के अर्न्तगत व्यक्ति द्वारा कर लेने में व्यक्ति की सहायता करना है। बाद में उसके लक्ष्य के बन्तर्गत व्यक्ति द्वारा चयनित व्यवसाय क्षेत्र में तैयारी करने में व्यक्ति की सहायता के उददेश्य को भी सम्मिलित कर लिया गया। आगे चलकर व्यावसायिक चयन तथा व्यावसायिक विकास के अतिरिक्त व्यावसायिक चयन एवं व्यावसायिक समायोजन को भी व्यावसायिक निर्देशन के क्षेत्र के अन्तर्गत सम्मिलित कर लिया गया। व्यावसायिक निर्देशन के अर्थ और गतिविधि में यह विस्तार व्यावसायिक निर्देशन के प्रति दृष्टिकोण में परिवर्तन के कारण उत्पन्न हुआ है। आधुनिक मनोविज्ञान की दृष्टि में निर्देशन एक सतत प्रक्रिया है
जिसका उददेश्य व्यक्ति का विकास है, अतः व्यावसायिक निर्देशन का लक्ष्य न तो व्यवसाय के चयन के बिंदु पर समाप्त हो सकता है और न ही व्यवसाय के लिए तैयारी के बिन्दु पर । व्यवसाय का चयन और तैयारी व्यवसाय क्षेत्र में प्रवेश को पूर्णतः सुनिश्चित नहीं कर देता है। अनेक कारक जो कि व्यक्ति के नियन्त्रण में नहीं होते है वे भी व्यावसायिक चयन और व्यवसाय अपनाने के व्यक्ति के नियन्त्रण में नहीं होते हैं वे भी व्यावसायिक चयन और व्यवसाय अपनाने के पश्चात व्यक्ति के समायोजन और प्रगति को प्रभावित करते है र्निदेशन का लक्ष्य और उददेश्य जीवन के सभी क्षेत्रों तथा सभी अवस्थाओं में सहयोग देना होता है अतः व्यक्ति को व्यवसाय क्षेत्र में अवसर प्राप्त करने, व्यवसाय क्षेत्र में सफलता और संतुष्टि प्राप्त करने और प्रगति करने हेतु सहयोग देना भी व्यावसायिक निर्देशन कार्यक्रम के अन्तर्गत ही सम्मिलित है। व्यावसायिक निर्देशन का उद्देश्य व्यक्ति का व्यावसायिक विकास करना होता है। व्यावसायिक विकास के अनेक चरण होते हैं। व्यावसायिक प्रगति का लक्ष्य भी व्यावसायिक विकास का भाग है । इसलिए व्यवसायिक निर्देशन का कार्य व्यवसाय क्षेत्र में प्रवेश हो चुकने के बाद भी चलता रहता है।
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